भारत के दिग्गज पहलवान और अब मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) के जाने-माने चेहरे संग्राम सिंह ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया है। मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित प्रतिष्ठित 'स्ट्राइक एशिया' चैंपियनशिप में उन्होंने शानदार खेल दिखाते हुए खिताब अपने नाम कर लिया है। खेल के किसी भी मैदान पर जब भारत और पाकिस्तान के एथलीट आमने-सामने होते हैं, तो दर्शकों का रोमांच अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है। इस बहुचर्चित और भारी दबाव वाले मुकाबले में भी कुछ ऐसा ही माहौल था, लेकिन संग्राम सिंह ने अपने अनुभव और ताकत के दम पर इस ऐतिहासिक मैच को पूरी तरह से एकतरफा बना दिया। उन्होंने पाकिस्तानी प्रतिद्वंद्वी को रिंग में संभलने का एक भी मौका नहीं दिया और विदेशी धरती पर भारतीय तिरंगे का परचम शान से लहरा दिया।
महज 80 सेकंड में किया नॉकआउट
जैसे ही मुकाबले की शुरुआत का संकेत मिला, संग्राम सिंह की रणनीति पूरी तरह से स्पष्ट थी। उन्होंने पहले ही राउंड से बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए पाकिस्तानी फाइटर पर जोरदार प्रहारों की झड़ी लगा दी। संग्राम की असाधारण फुर्ती और सटीक निशानों ने मोहम्मद आबिद अली को इस कदर बैकफुट पर धकेल दिया कि उन्हें बचाव करने का भी वक्त नहीं मिला। भारतीय दिग्गज ने रिंग में उतरते ही अपने दांव-पेचों का ऐसा जाल बुना कि प्रतिद्वंद्वी के पास वापसी का कोई रास्ता नहीं बचा। यह बहुप्रतीक्षित महामुकाबला केवल 1 मिनट और 20 सेकंड यानी कुल 80 सेकंड के भीतर ही खत्म हो गया। संग्राम के एक निर्णायक और घातक दांव ने आबिद अली को रिंग में चारों खाने चित कर दिया, जिसके बाद रेफरी को तुरंत बीच-बचाव कर मैच रोकना पड़ा। इस धमाकेदार नॉकआउट के साथ संग्राम ने एमएमए में अपना अपराजित पेशेवर रिकॉर्ड (Unbeaten Pro Record) भी शान से बरकरार रखा है।
147 करोड़ देशवासियों को समर्पित
इस एकतरफा और ऐतिहासिक जीत के बाद संग्राम सिंह काफी भावुक नजर आए। उनके लिए यह सिर्फ एक मेडल या बेल्ट की जीत नहीं थी, बल्कि राष्ट्र के लिए गर्व का क्षण था। अपनी सफलता का श्रेय पूरे देश को देते हुए संग्राम सिंह ने कहा, "यह जीत मेरे देश भारत के 147 करोड़ देशवासियों को समर्पित है।" उन्होंने विस्तार से बताया कि जब भी वह फाइट के लिए रिंग में कदम रखते हैं, तो उनके दिमाग में सिर्फ अपनी व्यक्तिगत जीत का ख्याल नहीं होता, बल्कि पूरे देश की ढेरों उम्मीदें और हमारे तिरंगे का सम्मान दांव पर होता है। उन्होंने इस बड़े खिताब को श्रद्धापूर्वक भारत माता को समर्पित किया। इसके अलावा, उन्होंने अपने विजन के बारे में बताते हुए कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार देश का गौरव बढ़ाना है। वह तहे दिल से चाहते हैं कि भारत के युवा शारीरिक रूप से फिट रहें और मार्शल आर्ट्स जैसे खेलों में आगे आकर अपना करियर बनाएं।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर अजेय सफर
विदेशी सरजमीं पर भारत का दबदबा कायम करने का संग्राम सिंह का यह कोई पहला वाकया नहीं है। 'स्ट्राइक एशिया' चैंपियनशिप की इस शानदार जीत से पहले भी वह दुनिया भर के कई खतरनाक फाइटर्स को धूल चटा चुके हैं। उनके एमएमए करियर के आंकड़े बताते हैं कि उनके सटीक दांव के आगे बड़े-बड़े खिलाड़ी टिक नहीं पाते। इससे पहले संग्राम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के ही अली रजा नासिर को करारी मात दी थी। उनके अलावा ट्यूनीशिया के हाकिम त्राबेलसी और फ्रांस के फ्लोरियन कूडियर जैसे नामी अंतरराष्ट्रीय एथलीट भी रिंग में संग्राम सिंह के सामने घुटने टेकने पर मजबूर हो चुके हैं। इस ताजा जीत ने पूरी दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि कुश्ती के अखाड़े में धूम मचाने के बाद अब मिश्रित मार्शल आर्ट्स की दुनिया में भी उनका सिक्का पूरी मजबूती से जम चुका है। इस जीत के बाद से ही सोशल मीडिया और खेल जगत में उन्हें बधाइयां देने का तांता लगा हुआ है।




















