बेंगलुरु के श्री कांतिरावा स्टेडियम में जब बारिश की फुहारें बरस रही थीं, तब वहां मौजूद फुटबॉल प्रेमियों को शायद ही इस बात का अंदाजा रहा होगा कि वे इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाले एक अत्यंत रोमांचक मुकाबले के गवाह बनने जा रहे हैं। वैश्विक फुटबॉल पटल पर दुनिया की 44वें नंबर की मजबूत टीम पनामा के खिलाफ भारतीय टीम की यह भिड़ंत किसी क्लासिक 'डेविड वर्सेस गोलियाथ' की टक्कर से कम नहीं आंकी जा रही थी। हालांकि मैच के अंत में स्कोरबोर्ड पर 1-1 की बराबरी दर्ज हुई, लेकिन भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम ने मैदान पर जिस अटूट जज्बे और अनुशासन का परिचय दिया, उसने देश भर के करोड़ों खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।
रणनीतिक बदलाव और खालिद जमील का नया दांव
ब्राजील और उरुग्वे जैसी दुनिया की सिरमौर टीमों के विरुद्ध होने वाली अत्यंत कठिन बहसों से ठीक पहले, मुख्य कोच खालिद जमील की कुशल देखरेख में भारतीय टीम ने हालिया समय का अपना सबसे बेहतरीन और अनुशासित प्रदर्शन कर दिखाया है। मैच के आगाज से पहले ही कोच जमील ने बड़े रणनीतिक फेरबदल के स्पष्ट संकेत दे दिए थे। उन्होंने इस साल यूनिटी कप के दौरान इस्तेमाल किए गए 'बैक फाइव' यानी पांच डिफेंडर्स वाले फॉर्मेशन को पूरी तरह से किनारे करते हुए 'बैक फोर' यानी चार डिफेंडर्स की बिल्कुल नई रणनीति को मैदान पर उतारा। इस नई रक्षापंक्ति के बिल्कुल केंद्र में अनुभवी अनवर अली और युवा बिजॉय वर्गीज की नई नवेली जोड़ी ने गजब का तालमेल और सूझबूझ दिखाई।
विंग्स का आक्रामक इस्तेमाल और आशिक का जलवा
कोच जमील की इस नई सोची-समझी रणनीति का सबसे ज्यादा सकारात्मक फायदा भारतीय आक्रमण पंक्ति को मिला। भले ही टीम ने अपनी पुरानी शैली के तहत लंबी गेंदों यानी लांग बॉल्स पर अपनी शुरुआती निर्भरता को पूरी तरह से छोड़ा नहीं था, लेकिन मैदान पर एक अतिरिक्त खिलाड़ी की मौजूदगी ने आशिक कुरुनियन और विक्रम प्रताप सिंह को विंग्स के दोनों छोर पर पूरी तरह खुलकर खेलने और मैदान की चौड़ाई को बरकरार रखने की सुनहरी आजादी दे डाली। मुकाबले के शुरुआती हाफ के दौरान आशिक कुरुनियन पनामा के डिफेंस के लिए लगातार एक बड़ा सिरदर्द साबित होते रहे। अपनी जबर्दस्त तेज रफ्तार के दम पर उन्होंने पनामा के कप्तान सेसर ब्लैकमैन को कई मौकों पर बुरी तरह छकाया। ठीक ऐसे ही एक शानदार हमले के दौरान आशिक ने बॉक्स के बिल्कुल भीतर एक बेहतरीन फ्लैट क्रॉस नुमा पास निकाला, जिसे गोल की जादुई रेखा के पार पहुँचाने से मनवीर सिंह और रयान विलियम्स मामूली अंतर से चूक गए।
स्टेडियम में बढ़ता रोमांच और पनामा पर बना मानसिक दबाव
इस एक शानदार हमले ने मैदान पर खेल रहे भारतीय खिलाड़ियों के भीतर इस अटूट विश्वास को भर दिया कि पनामा की मजबूत रक्षापंक्ति को भी भेदा जा सकता है, खासकर तब जब पनामा के खेमे के तीन मुख्य डिफेंडर्स अपना डेब्यू मैच ही खेल रहे थे। जैसे-जैसे मैच का समय आगे बढ़ता गया, स्टेडियम की दीर्घाओं में मौजूद दर्शकों का उत्साह और जोश चरम सीमा पर पहुंच गया। भारतीय खिलाड़ियों द्वारा लगाए गए हर एक सटीक पास, हर एक बेहतरीन टैकल और खतरे को टालने के लिए गेंद को बाहर भेजने के हर एक साहसिक प्रयास पर पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट और नारों से गूंज उठता था।
रयान विलियम्स का जादुई गोल और भारत की ऐतिहासिक बढ़त
पहले हाफ का खेल समाप्त होने से ठीक पहले तक ऐसा प्रतीत हो रहा था कि यह मुकाबला बिना किसी गोल के शून्य-शून्य की बराबरी पर समाप्त होगा, लेकिन तभी रयान विलियम्स ने कांतिरावा स्टेडियम के पूरे माहौल का नक्शा ही बदलकर रख दिया। खिलाड़ी आकाश मिश्रा ने एक थ्रो-इन के जरिए गेंद पर पूरी तरह कब्जा हासिल किया और पनामा की सतर्क रक्षापंक्ति को चालाकी से छकाते हुए अपने अपेक्षाकृत कमजोर दाएं पैर से एक बेहद खूबसूरत लांग बॉल आगे की ओर धकेल दी। रयान विलियम्स उस समय पनामा के हाफ में बिल्कुल अकेले खड़े थे। कांतिरावा स्टेडियम, जो कि उनका अपना घरेलू मैदान भी है, की तेज रोशनी के नीचे 32 वर्षीय विलियम्स ने गजब का शारीरिक नियंत्रण दिखाया और गेंद को बड़ी आसानी से पनामा के गोलपोस्ट के निचले दाएं कोने में पहुंचा दिया। इस शानदार गोल के साथ ही भारतीय खेमे और स्टेडियम में बैठे फैंस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
पनामा के जवाबी हमले और गुरप्रीत की चट्टानी दीवार
दूसरी तरफ पनामा की टीम ने अपनी रणनीति बदलते हुए ज्यादातर समय गेंद को अपने पास रखकर यानी पॉसेशन फुटबॉल खेलने का रास्ता चुना। उनके डिफेंडर जोसेफ जोन्स कॉर्डोबा ने मैदान पर गेंद का वितरण तो काफी सलीके से किया, लेकिन पनामा के विंगर्स भारतीय फुलबैक्स अभिषेक टेकचम और आकाश मिश्रा द्वारा बनाई गई अभेद्य दीवार को किसी भी कीमत पर तोड़ पाने में नाकाम साबित हो रहे थे। जब कभी भी वे इस मजबूत रक्षात्मक घेरे को पार करने में हल्के से सफल भी होते, तो भारतीय टीम के विशालकाय और अनुभवी गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू उनके सारे नापाक इरादों पर पानी फेर देते थे।
दूसरा हाफ और पनामा की लाचारी
मैच के दूसरे हाफ में भारतीय टीम ने मैदान पर बेहद संयम और परिपक्वता का परिचय दिया तथा किसी भी प्रकार के गैर-जरूरी फाउल करने से पूरी तरह बचती नजर आई। पनामा के पास मैदान पर गेंद का कब्जा तो भारी मात्रा में मौजूद था, लेकिन उनके पास भारतीय रक्षात्मक व्यूह-रचना को भेदने के लिए जरूरी रचनात्मकता की साफ तौर पर कमी नजर आ रही थी। इसी का परिणाम यह निकला कि वे लगातार दूर से ही बेअसर शॉट लगाने के लिए मजबूर होते चले गए।
उमर वेलेंसिया का बराबरी का गोल
जब कोई भी टीम इतनी अभेद्य और मजबूत रक्षात्मक शैली का प्रदर्शन करती है, तो उस लंबे गतिरोध को तोड़ने के लिए किसी खास और चमत्कारी प्रयास की सख्त जरूरत होती है। पनामा के सब्स्टिट्यूट खिलाड़ी उमर वेलेंसिया ने ठीक वैसा ही जादुई करिश्मा कर दिखाया। भारतीय हाफ के भीतर एक मामूली सी खराब टच की वजह से उनसे गेंद थोड़ी छिटक गई थी, लेकिन गनीमत यह रही कि गेंद दोबारा टप्पा खाकर सीधे उनके सामने आ गई और उन्होंने बिना कोई मौका गंवाए एक जबर्दस्त वॉली शॉट जड़ दिया। गेंद हवा में खूबसूरत गोता लगाते हुए सीधे जाकर साइड नेटिंग में उलझ गई और भारतीय गोलकीपर गुरप्रीत बस उसे अपनी आंखों से जाते हुए देखते रह गए।
अंतिम क्षणों का रोमांच और भविष्य की उम्मीदें
खेल के 68वें मिनट में हुए इस बराबरी के गोल के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों का हौसला एक इंच भी कम नहीं हुआ। कोच जमील ने तुरंत मैदान पर ताजे पैरों वाले फ्रेश खिलाड़ियों को उतारा, जिससे टीम ने एक बार फिर अपनी खोई हुई आक्रामकता हासिल कर ली। मैच के अंतिम कुछ पलों में मनवीर सिंह और एडमंड लालरिंदिका के पास गोल करने के अत्यंत सुनहरे मौके आए, लेकिन बदकिस्मती से एडमंड एक पूरी तरह खुले हुए गोलपोस्ट के सामने आसान सा मौका गंवा बैठे, जो उन्हें शायद लंबे समय तक कचोटता रहेगा।
इन तमाम मौकों के हाथ से निकल जाने के बावजूद भारत ने इस मुकाबले का अंत बेहद मजबूती और गरिमा के साथ किया। कागजी समीकरणों को अगर देखा जाए तो पनामा जैसी मजबूत टीम के खिलाफ यह ड्रा का नतीजा किसी असंभव चमत्कार जैसा प्रतीत होता है, लेकिन भारत ने वर्ल्ड कप खेल चुकी इस दिग्गज टीम को बराबरी पर रोककर पूरी दुनिया को यह साफ संदेश दे दिया है कि वे आने वाली हर चुनौती का डटकर सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आगामी समय में ब्राजील और उरुग्वे जैसी फुटबॉल जगत की महाशक्तियों से भिड़ने से ठीक पहले इस कड़े मुकाबले ने भारतीय टीम के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

















