कर्नाटक में लोकप्रिय डेयरी ब्रांड नंदिनी का दूध जल्द ही महंगा होने जा रहा है। राज्य सरकार ने दूध की खुदरा कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस कदम से आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य भर के परिवारों को दूध के लिए हर महीने ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे।
नियमित दूध के खुदरा दाम 50 से 51 रुपये तक पहुंचने के आसार
यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से लागू कर देती है, तो नियमित नंदिनी दूध की वर्तमान कीमत करीब 46 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर लगभग 50 से 51 रुपये प्रति लीटर हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग प्रकार के दूध उत्पादों की सटीक खुदरा कीमतें और नई दरों के लागू होने की वास्तविक तारीख सरकार द्वारा औपचारिक आदेश जारी किए जाने के बाद ही स्पष्ट होगी। उपभोक्ता वर्तमान में जारी आधिकारिक आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि उत्पाद-वार बदलावों की पूरी सूची सामने आ सके।
घरेलू बजट पर पड़ेगा सीधा असर
दूध की कीमतों में होने वाली यह वृद्धि आम परिवारों के मासिक बजट को प्रभावित करेगी। दैनिक उपभोग के हिसाब से देखा जाए तो जो परिवार प्रतिदिन एक लीटर दूध खरीदता है, उसके लिए 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का मतलब होगा हर महीने करीब 150 रुपये का अतिरिक्त खर्च। वहीं, जिन परिवारों में रोजाना दो लीटर दूध की खपत होती है, उनका मासिक दूध खर्च लगभग 300 रुपये तक बढ़ जाएगा। दैनिक जीवन की आवश्यक वस्तु होने के कारण इस मूल्य वृद्धि से बचना अधिकांश घरेलू उपभोक्ताओं के लिए संभव नहीं होगा।
चाय की दुकानों और छोटे खाद्य कारोबारियों की बढ़ेगी लागत
इस फैसले का असर केवल घरों की रसोई तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। दूध चाय की दुकानों, होटलों, बेकरियों और अन्य छोटे खाद्य प्रतिष्ठानों के लिए एक मुख्य कच्चा माल होता है। ऐसे सभी छोटे व्यवसायों में दैनिक उपयोग की वस्तु के दाम थोड़े भी बढ़ते हैं, तो उनके परिचालन खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि हो जाती है। परिचालन लागत बढ़ने से आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर तैयार खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
डेयरी किसानों और सहकारी यूनियनों की मांगों के बाद फैसला
यह संभावित मूल्य संशोधन कर्नाटक के जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों और डेयरी किसानों के निरंतर दबाव के बाद सामने आया है। दुग्ध संघ लंबे समय से बेहतर खरीद मूल्य और खुदरा कीमतों में संशोधन की मांग कर रहे थे। मवेशियों के चारे, आहार, पशु चिकित्सा देखभाल, दवाइयों, परिवहन और डेयरी रखरखाव से जुड़े अन्य सभी खर्चों में भारी बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती लागत की वजह से किसानों के मुनाफे पर लगातार दबाव बन रहा था, जिसके चलते उन्होंने राहत देने के लिए दरें बढ़ाने की अपील की थी।
संघों ने की थी 8 से 10 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की मांग
जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघों ने शुरुआत में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर की बड़ी मूल्य वृद्धि की मांग उठाई थी। संघों का तर्क था कि हाल के दिनों में डेयरी संचालन से जुड़ी लागत काफी तेजी से बढ़ी है और मौजूदा दरों पर काम करना किसानों के लिए कठिन हो गया है। सरकार ने हालांकि संघों की पूरी मांग को स्वीकार नहीं किया, लेकिन किसानों की उत्पादन लागत के दबाव को देखते हुए खुदरा कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी करने की दिशा में सैद्धांतिक सहमति दे दी है।

















