भारतीय मुक्केबाजी दल ने राष्ट्रमंडल खेलों में 7 स्वर्ण पदक सहित रिकॉर्ड 10 पदक जीतकर ऐतिहासिक सफलता दर्ज की है। इस शानदार प्रदर्शन के उपरांत दल ने खेल मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की। इस दौरान ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने पिछले एक साल के कठिन दौर, चोटों और आत्मविश्वास की कमी से उबरने के अपने अनुभवों को साझा किया। अपने करियर के तीसरे राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा ले रहीं 28 वर्षीय लवलीना ने अब अगले महीने से शुरू हो रहे एशियाई खेलों में शीर्ष स्थान हासिल करने की तैयारी शुरू कर दी है।
चुनौतियों से उबरकर रिंग में लवलीना बोरगोहेन की वापसी
पेरिस ओलंपिक 2024 के क्वार्टर फाइनल में हारकर बाहर होने के बाद लवलीना बोरगोहेन के सामने करियर को आगे बढ़ाने की बड़ी मानसिक और शारीरिक चुनौतियां थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेरिस ओलंपिक के बाद रिंग में बने रहना ही उनके लिए एक बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है। इस दौरान अनेक उतार चढ़ाव आए और उनके खेल जारी रखने को लेकर भी सवाल उठे।
लवलीना का कहना है कि उन्होंने लगभग हर प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक हासिल किए हैं, लेकिन स्वर्ण पदक नहीं जीत पाने की कसक बनी हुई है। उन्होंने कहा, "पेरिस ओलंपिक के बाद कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन मैंने वापसी की और खेल जारी रखा।" उन्होंने पूरी भारतीय टीम के प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि 7 स्वर्ण पदक जीतना पूरी टीम के लिए गर्व का क्षण है और वह आगामी एशियाई खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने हेतु पूरी तरह केंद्रित हैं।
भारतीय मुक्केबाजी टीम की ऐतिहासिक उपलब्धि और विदेशी कोच का विश्लेषण
भारतीय मुक्केबाजी टीम के विदेशी कोच सैंटियागो नीवा ने राष्ट्रमंडल खेलों के नतीजों को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि 10 पदक हासिल करने से मुक्केबाजों का मनोबल काफी बढ़ा है, जो आगामी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में टीम के काम आएगा। कोच नीवा ने विशेष रूप से महिला 51 किलोग्राम वर्ग का उदाहरण दिया, जहां भारतीय दल के भीतर ही प्रतिस्पर्धा का स्तर अत्यंत ऊंचा था।
राष्ट्रीय चयन मुकाबलों के दौरान इस वर्ग में तीन विश्व चैंपियन और दो युवा विश्व चैंपियन मुक्केबाज आमने-सामने थीं। ऐसे कड़े माहौल में जगह बनाकर साक्षी ने मुख्य प्रतियोगिता में प्रवेश किया। कोच सैंटियागो नीवा के अनुसार, साक्षी ने खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड की मजबूत मुक्केबाज के विरुद्ध जिस परिपक्वता और अनुभव का प्रदर्शन किया, वह भारतीय मुक्केबाजी के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। उन्होंने कहा, "साक्षी ने फाइनल में इंग्लैंड की मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ जिस तरह का प्रदर्शन किया, वह भविष्य के लिए काफी सकारात्मक संकेत है।" नीवा ने बताया कि अब कोचिंग स्टाफ और खिलाड़ियों का मुख्य ध्यान एशियाई खेलों की तैयारी और आगामी ओलंपिक क्वालीफिकेशन प्रक्रिया पर केंद्रित रहेगा।
साक्षी का शानदार प्रदर्शन और जैस्मीन लंबोरिया की भावी रणनीति
राष्ट्रमंडल खेलों में खिताबी जीत दर्ज करने वाली विश्व चैंपियन जैस्मीन लंबोरिया ने भी अपनी भविष्य की योजनाओं को रेखांकित किया। हाल ही में बीमारी से उबरकर रिंग में उतरीं जैस्मीन ने माना कि विश्व चैंपियन का तमगा साथ होने के कारण उन पर बेहतर प्रदर्शन करने का अतिरिक्त दबाव था। हालांकि, उन्होंने इस दबाव को सकारात्मक ऊर्जा में बदलकर राष्ट्रमंडल खेलों का खिताब अपने नाम किया।
जैस्मीन लंबोरिया ने कहा, "राष्ट्रमंडल खेलों में खिताब जीतने के बाद मेरा मुख्य लक्ष्य लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वह निरंतर अपने खेल में तकनीकी सुधार करती रहेंगी ताकि आने वाली चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया जा सके। भारतीय मुक्केबाजी दल की यह सफलता आगामी एशियाई खेलों और 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक अभियानों के लिए मजबूत आधार तैयार करती है।



















