पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और एशियन क्रिकेट काउंसिल के प्रमुख मोहसिन नकवी को एक बार फिर असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। संभावित बहिष्कार की जानकारी होने के बावजूद वह समारोह में उपस्थित हुए, जहां उन्हें कड़े रुख का सामना करना पड़ा। यह ताजा घटनाक्रम महिला टी20 एशिया कप के खिताबी मुकाबले के दौरान सामने आया। इस मुकाबले में भारतीय महिला टीम ने श्रीलंका को 72 रनों के अंतर से शिकस्त देकर खिताब अपने नाम किया, लेकिन दुर्भाग्यवश विजेता टीम को ट्रॉफी नहीं मिल पाई। भले ही हाथ में ट्रॉफी नहीं थी, लेकिन दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम के बड़े स्क्रीन बोर्ड पर बड़े अक्षरों में टीम इंडिया को 8 बार की चैंपियन दर्शाया गया था।
मेंस एशिया कप 2025 में भी हुआ था ऐसा ही विवाद
यह पहला अवसर नहीं था जब इस प्रकार का नाटकीय दृश्य देखने को मिला हो। इससे पहले मेंस एशिया कप 2025 के दौरान भी ठीक ऐसा ही घटनाक्रम घटित हुआ था। उस टूर्नामेंट के फाइनल मैच में भारत और पाकिस्तान का आमना-सामना हुआ था, जहां टीम इंडिया ने पाकिस्तान को 5 विकेट से करारी शिकस्त दी थी। मोहसिन नकवी उस समय भी एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष के नाते स्टेडियम में मौजूद थे। उन्हें यह उम्मीद थी कि पाकिस्तान मुकाबला जीतकर खिताब हासिल करेगा और वह स्वयं अपनी टीम को विजेता कप प्रदान करेंगे, लेकिन मुकाबले का नतीजा उनके पक्ष में नहीं रहा। मैच समाप्त होने के बाद जब पुरस्कार वितरण का समय आया, तब नकवी विजेता को ट्रॉफी देने के लिए आगे बढ़ गए।
सूर्यकुमार की कप्तानी वाली टीम ने कर दिया था सीधा बहिष्कार
उस समय मेंस एशिया कप 2025 के खिताबी मुकाबले के समापन के बाद नकवी ने भारतीय टीम को ट्रॉफी सौंपने का प्रयास किया, लेकिन सूर्यकुमार यादव और उनके साथी खिलाड़ियों ने पीसीबी प्रमुख का पूरी तरह बहिष्कार करने का निर्णय लिया। भारतीय टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों ने स्पष्ट कर दिया था कि वे नकवी के हाथों से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेंगे। इसके विपरीत पीसीबी प्रमुख भी अपनी जिद पर कायम रहे और उन्होंने ठान लिया कि वही अपने हाथों से ट्रॉफी देंगे। हालांकि भारतीय खिलाड़ियों के लिए व्यक्तिगत सम्मान और देश की प्रतिष्ठा ट्रॉफी हासिल करने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण थी।
पोडियम पर बिना ट्रॉफी के ही मनाया गया था जीत का जश्न
खिलाड़ियों के इस कड़े रुख के बाद मोहसिन नकवी काफी समय तक मायूस होकर मैदान में इंतजार करते रहे। क्रिकेट के लंबे इतिहास में संभवतः यह अपनी तरह की पहली घटना मानी जा रही थी, जब किसी बड़े टूर्नामेंट में ऐसी स्थिति बनी हो। काफी देर तक प्रतीक्षा करने के बाद जब कोई रास्ता नहीं निकला, तो नकवी ने वहां से वापस लौटने का फैसला किया। नकवी के मैदान से चले जाने के तुरंत बाद टीम इंडिया के सभी खिलाड़ी पोडियम पर पहुंचे और उन्होंने बिना आधिकारिक ट्रॉफी के ही अपनी शानदार खिताबी जीत का जोरदार जश्न मनाया।



















