राजस्थान के सिरोही जिले में जिला ओलंपिक संघ के प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर विवाद गहरा गया है। अदालत की रोक के बावजूद संगठन का नया चुनाव कराने और नई कार्यकारिणी का ऐलान करने का मामला सामने आया है। वर्तमान अध्यक्ष जितेंद्र सिंह चौहान ने इस पूरी प्रक्रिया पर कड़ा एतराज जताया है। उनका कहना है कि उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेश की अनदेखी करके चुनावी गतिविधियां संचालित की गईं, जिसके बाद स्थानीय खेल गलियारों में खींचतान तेज हो गई है।
हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बीच चुनाव कराने का आरोप
विवाद की मुख्य वजह राजस्थान हाईकोर्ट में चल रही कानूनी लड़ाई है। सिविल रिट पिटीशन संख्या 19727/2025 (जितेंद्र सिंह चौहान बनाम राजस्थान राज्य ओलंपिक एसोसिएशन) के तहत मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है। इस याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्थगन आदेश जारी किया था। जितेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, यह न्यायिक स्टे अब भी पूरी तरह प्रभावी है और इसके रहते संगठन में कोई नई नियुक्ति या चुनाव नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद 10 अगस्त 2026 को सिरोही में चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराने का दावा किया गया है।
एडहॉक कमेटी के गठन और प्रक्रिया पर उठे सवाल
अध्यक्ष जितेंद्र सिंह चौहान ने चुनावी प्रक्रिया की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि राजस्थान राज्य ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव सुरेंद्र गुर्जर ने नियमों के विपरीत जाकर सिरोही जिला ओलंपिक संघ के लिए एक एडहॉक कमेटी बनाई। इस कमेटी का कन्वीनर भीक सिंह देवड़ा को नियुक्त किया गया। चौहान का कहना है कि इसके बाद भीक सिंह देवड़ा ने खुद को चुनाव अधिकारी घोषित कर दिया और अपने स्तर पर मतदाता सूची जारी कर चुनाव कार्यक्रम का ऐलान कर दिया, जो कि न्यायिक प्रक्रिया का खुला उल्लंघन है।
सोशल मीडिया पर नई कार्यकारिणी की घोषणा से बढ़ा तनाव
कथित तौर पर 10 अगस्त 2026 को चुनाव संपन्न होने के बाद जब अखबारों में खबरें छपीं और सोशल मीडिया पर बधाई संदेशों के पोस्टर वायरल हुए, तब यह मामला पूरी तरह तूल पकड़ गया। जारी किए गए पोस्टरों में सुरेश कोठारी को चेयरमैन, पायल परसरामपुरिया को मुख्य संरक्षक और सागरमल अग्रवाल को संरक्षक बताया गया। इसके अलावा भीक सिंह देवड़ा को अध्यक्ष, हरदेव आर्य को महासचिव तथा महेंद्र सिंह उमट को कोषाध्यक्ष नियुक्त करने का दावा किया गया। चौहान ने इन गतिविधियों को अदालत के निर्देशों की सीधी अवमानना करार देते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
हाईकोर्ट के भावी रुख पर टिकीं सभी पक्षकारों की निगाहें
अदालत की रोक के बावजूद चुनाव कराने वाले पक्ष की ओर से फिलहाल इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए अब सबकी निगाहें राजस्थान हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और आने वाले आदेशों पर टिक गई हैं। खेल प्रेमी और कानूनी विशेषज्ञ यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि अदालत इस चुनाव की वैधता पर क्या निर्णय लेती है और स्थगन आदेश के उल्लंघन पर क्या कदम उठाती है।



















