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विंबलडन के मैदान में गुजरात का जलवा, टेनिस खिलाड़ियों का पसीना सुखाते हैं भारत में बने तौलिएखेल
9 जुल॰ 2026, 9:39 am (20 दिन पहले)· 3

विंबलडन के मैदान में गुजरात का जलवा, टेनिस खिलाड़ियों का पसीना सुखाते हैं भारत में बने तौलिए

दुनिया के सबसे बड़े टेनिस टूर्नामेंट विंबलडन में इस्तेमाल होने वाले मशहूर तौलिये भारत में तैयार किए जाते हैं। गुजरात के वापी में बनी ये एक्सेसरीज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के बीच यादगार निशानी बन चुकी हैं।

टेनिस की दुनिया में विंबलडन को एक विशेष और गौरवशाली दर्जा प्राप्त है। यह न केवल ग्रास कोर्ट और खेल की परंपराओं के लिए जाना जाता है, बल्कि अपने उन सूक्ष्म पहलुओं के लिए भी प्रसिद्ध है जो मैच की गर्मी के बीच खिलाड़ियों को आराम पहुंचाते हैं। टूर्नामेंट का यह संस्करण अब अपने निर्णायक मोड़ पर है, लेकिन हर मैच के दौरान एक ऐसा भारतीय जुड़ाव देखने को मिलता है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। नोवाक जोकोविच, नाओमी ओसाका, सेरेना विलियम्स और इगा स्वियातेक जैसे विश्व स्तरीय खिलाड़ी जब कोर्ट पर पसीना बहाते हैं, तो उसे सुखाने के लिए वे जिस तौलिए का सहारा लेते हैं, वह असल में गुजरात में तैयार होकर लंदन पहुंचता है। पिछले 15 वर्षों से भी अधिक समय से यह मेड इन इंडिया उत्पाद विंबलडन का एक अनिवार्य हिस्सा बना हुआ है।

गुजरात से लंदन तक का सफर

विंबलडन के लिए विशेष रूप से बनाए जाने वाले इन तौलियों की एक खास रंग योजना होती है, जिसमें हरा और बैंगनी रंग प्रमुखता से इस्तेमाल होता है। इनका निर्माण गुजरात के वापी में वेल्सपन्स लिविंग लिमिटेड के विनिर्माण संयंत्र में किया जाता है। यह प्रक्रिया कंपनी की सहायक इकाई क्रिस्टी यूके के जरिए पूरी की जाती है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो क्रिस्टी का जुड़ाव मैनचेस्टर से रहा है, जहाँ 1850 में इसकी स्थापना हुई थी। हालांकि, 2009-10 के वर्षों में जब कंपनी ने अपने उत्पादन केंद्र को पूरी तरह भारत में स्थानांतरित किया, तब से विंबलडन के लिए इन प्रतिष्ठित तौलियों का निर्माण भारत में ही हो रहा है। यही कारण है कि आज गुजरात का नाम खेल जगत के सबसे बड़े आयोजनों में से एक के साथ गर्व से जुड़ गया है।

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खिलाड़ियों के बीच लोकप्रियता और दीवानगी

ये तौलिए केवल खेल के दौरान पसीना पोंछने के साधन नहीं हैं, बल्कि खिलाड़ियों के लिए एक बहुमूल्य स्मृति चिन्ह बन गए हैं। मैच समाप्त होने के बाद अक्सर खिलाड़ियों को इन तौलियों को अपने साथ ले जाते हुए देखा गया है। टेनिस स्टार्स के बीच इनके प्रति दीवानगी इस हद तक है कि वे इन्हें जमा करने में बहुत रुचि रखते हैं। चर्चा तो यह भी है कि नोवाक जोकोविच तो अपने साथ इन तौलियों के लिए एक अतिरिक्त सूटकेस तक लेकर चलते हैं। इसके अलावा, रोजर फेडरर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों ने भी टूर्नामेंट के बाद इन्हें बतौर यादें घर ले जाने के प्रति अपनी पसंद जाहिर की है, जिससे ये एक आम एक्सेसरी से ऊपर उठकर संग्रहणीय वस्तु बन गए हैं।

विशेष तकनीक और निर्माण की जटिलता

एक प्रीमियम विंबलडन तौलिया तैयार करने में लगभग एक सप्ताह का समय लगता है। टूर्नामेंट शुरू होने से करीब 18 महीने पहले ही इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। सबसे पहले इनके डिजाइन, पैटर्न और रंगों के आधुनिक रुझानों को निर्धारित किया जाता है। इन तौलियों में हाइग्रोकॉटन नामक उन्नत तकनीक का उपयोग किया जाता है, जो पसीने को तेजी से सोखने और तौलिये को जल्दी सुखाने की क्षमता रखती है। यह सुविधा कड़ी धूप और तीव्र मुकाबलों के दौरान खिलाड़ियों के लिए बेहद उपयोगी सिद्ध होती है। बाजार में इन विशेष तौलियों की कीमत करीब 40 पाउंड यानी 5000 रुपये से थोड़ी अधिक होती है।

सवाल-जवाब

विंबलडन में इस्तेमाल होने वाले तौलिए कहाँ बनाए जाते हैं?
ये तौलिए गुजरात के वापी में वेल्सपन्स लिविंग लिमिटेड के प्लांट में तैयार किए जाते हैं।
विंबलडन तौलियों के लिए किस तकनीक का उपयोग होता है?
इन तौलियों में हाइग्रोकॉटन तकनीक का इस्तेमाल होता है जो पसीने को तेजी से सोखने और जल्दी सूखने में मदद करती है।
क्या खिलाड़ी इन तौलियों को अपने साथ घर ले जाते हैं?
हाँ, टेनिस सितारे अक्सर इन तौलियों को यादगार निशानी के रूप में अपने साथ घर ले जाते हैं और कुछ खिलाड़ी तो इन्हें जमा भी करते हैं।
एक विंबलडन तौलिया बनाने में कितना समय लगता है?
एक तौलिया तैयार करने में लगभग एक सप्ताह का समय लगता है और इसकी प्रक्रिया टूर्नामेंट से 18 महीने पहले शुरू हो जाती है।
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