भारतीय राष्ट्रीय हॉकी टीमों के किट के रंग को लेकर बना सस्पेंस और विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। आगामी 2026 एशियन गेम्स में भारतीय पुरुष और महिला दोनों हॉकी टीमें अपने पहचान बन चुके पारंपरिक नीले रंग की जर्सी पहनकर मैदान में उतरेंगी। नीदरलैंड और बेल्जियम में आयोजित हुए एफआईएच वर्ल्ड कप (FIH World Cup) के दौरान नीली जर्सी की जगह नारंगी रंग के परिधान को अपनाने का निर्णय लिया गया था, जिसकी व्यापक आलोचना हुई थी और खेल जगत में तीखी बहस छिड़ गई थी। अब इस निर्णय को बदलते हुए नीले रंग की वापसी पर अंतिम मुहर लग गई है।
वर्ल्ड कप में नारंगी किट के प्रयोग और उस पर उठे विवाद
हॉकी इंडिया द्वारा नीली जर्सी की जगह नारंगी परिधान लाने के पीछे तर्क दिया गया था कि नीले टर्फ पर नीले रंग के कपड़े पहनने से मैदान और टीवी स्क्रीन पर खिलाड़ियों को स्पष्ट रूप से पहचानने में बाधा उत्पन्न होती है। हालांकि, जब एफआईएच वर्ल्ड कप में भारतीय टीम नारंगी जर्सी पहनकर उतरी, तो इस फैसले का कड़ा विरोध शुरू हो गया। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने भी इस प्रक्रिया पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाए थे। उन्होंने स्पष्ट किया था कि किट का रंग बदलने की यह कवायद उनकी जानकारी या हॉकी इंडिया के निर्वाचित नेतृत्व और कार्यकारी बोर्ड की औपचारिक सहमति के बिना की गई थी।
भारतीय ओलंपिक संघ को भेजी गई नीले रंग की प्राथमिक पसंद
आगामी महाद्वीपीय प्रतियोगिता के संदर्भ में स्थिति साफ करते हुए दिलीप तिर्की ने जानकारी दी कि भारतीय ओलंपिक संघ ने टीमों की किट के रंग के संबंध में विकल्प मांगे थे। इसके जवाब में हॉकी इंडिया ने अपनी पहली पसंद के रूप में नीले रंग को आधिकारिक तौर पर पेश किया, जबकि नारंगी रंग को केवल दूसरे विकल्प के रूप में रखा गया था। तिर्की ने याद दिलाया कि उन्होंने वर्ल्ड कप आयोजन से पूर्व भी यह स्पष्ट कर दिया था कि नारंगी रंग का चयन कोई स्थायी बदलाव नहीं था और भविष्य के टूर्नामेंटों में इसमें संशोधन संभव है। उन्होंने पुष्टि की कि 2026 एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ी नीली जर्सी में ही अपनी चुनौती पेश करेंगे।
पूर्व कप्तानों की आपत्ति और राजनीतिक रूप से गरमाया मुद्दा
भारतीय हॉकी की पहचान मानी जाने वाली नीली जर्सी को हटाने के निर्णय पर देश के कई दिग्गज हॉकी सितारों ने भी अपनी नाराजगी जताई थी। पूर्व राष्ट्रीय कप्तानों वीरन रसक्विन्हा, परगट सिंह, धनराज पिल्लै और अजित पाल सिंह ने सार्वजनिक रूप से नारंगी रंग की किट पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। दिग्गज खिलाड़ियों के विरोध के साथ ही यह मामला खेल के मैदान से बाहर निकलकर एक राजनीतिक बहस का रूप भी ले चुका था, जिससे हॉकी इंडिया पर अपनी नीति स्पष्ट करने का दबाव बढ़ गया था।
एशियन गेम्स और लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक का रास्ता
हालिया वर्ल्ड कप में भारतीय पुरुष हॉकी टीम का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था और टीम को आठवें स्थान से ही संतोष करना पड़ा था। दूसरी ओर, भारतीय महिला हॉकी टीम ने टूर्नामेंट में पांचवां स्थान प्राप्त किया, जो वर्ष 1974 के बाद से वर्ल्ड कप के इतिहास में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। अब दोनों टीमों का पूरा ध्यान 2026 एशियन गेम्स पर केंद्रित है। यह प्रतियोगिता केवल महाद्वीपीय स्तर पर सम्मान हासिल करने का जरिया नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक (LA 2028) का सीधा क्वालिफिकेशन भी दांव पर रहेगा। ऐसे में अपनी पुरानी नीली जर्सी में मैदान पर उतरने वाली भारतीय टीमों के लिए यह टूर्नामेंट बेहद निर्णायक साबित होने वाला है।



















