परमाणु संलयन यानी न्यूक्लियर फ्यूजन से असीमित और स्वच्छ बिजली पैदा करने का सपना दशकों से वैज्ञानिकों के लिए एक दूर का लक्ष्य बना हुआ था। कई पीढ़ियों से इस तकनीक को भविष्य की ऊर्जा कहा जाता रहा, लेकिन अब यह प्रयोगशालाओं से निकलकर सीधे बिजली ग्रिड पर उतरने की तैयारी कर रही है। ऊर्जा क्षेत्र में काम कर रही दो प्रमुख अमेरिकी कंपनियां इस तकनीक को व्यावहारिक और व्यावसायिक रूप देने के लिए तेजी से अपने प्लांट और प्रोटोटाइप विकसित कर रही हैं।
स्पार्क और आर्क के जरिए कॉमनवेल्थ फ्यूजन सिस्टम्स का रोडमैप
वर्ष 2018 में स्थापित कॉमनवेल्थ फ्यूजन सिस्टम्स की नींव जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए स्वच्छ ऊर्जा को जल्द से जल्द बाजार में उतारने के मकसद से रखी गई थी। कंपनी के सह संस्थापक और मुख्य विज्ञान अधिकारी ब्रैंडन सोरबोम ने एमआईटी में अपने डॉक्टरेट शोध के दौरान आर्क नामक पावर प्लांट के मूल डिजाइन का प्रस्ताव तैयार किया था। उस अकादमिक अध्ययन को अब जमीन पर उतारने के लिए कंपनी स्पार्क नाम की एक प्रदर्शन मशीन तैयार कर रही है।
स्पार्क मशीन के सफल संचालन से कंपनी के पहले पूर्ण व्यावसायिक पावर प्लांट आर्क के निर्माण का रास्ता साफ होगा। इस साल अप्रैल में कंपनी ने अमेरिकी थोक बिजली बाजार पीजेएम इंटरकनेक्शन में ग्रिड से जुड़ने का औपचारिक आवेदन दाखिल किया। किसी फ्यूजन ऊर्जा कंपनी द्वारा ग्रिड इंटरकनेक्शन के लिए उठाया गया यह पहला कदम था। वित्तीय मोर्चे पर भी कंपनी ने जुलाई में 1 अरब डॉलर की ताजा पूंजी जुटाई, जिससे उसका कुल जुटाया गया निवेश बढ़कर 4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
हीलियन का 150 मिलियन डिग्री तापमान और ओरियन प्रोजेक्ट
दूसरी तरफ डेविड किर्टली के नेतृत्व वाली हीलियन पूरी तरह अलग तकनीकी दृष्टिकोण के साथ फ्यूजन बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने पर काम कर रही है। नासा और एनएसएफ एडवांस्ड कॉन्सेप्ट्स फेलो रह चुके किर्टली उच्च बीटा प्लाज्मा और अंतरिक्ष प्रणोदन के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने ऊर्जा को सीधे व्यावसायिक पैमाने पर बिजली में बदलने के लक्ष्य के साथ इस उद्यम की शुरुआत की थी।
कंपनी के पोलारिस प्रोटोटाइप ने इसी साल फरवरी में प्लाज्मा को 150 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक गर्म करने में सफलता हासिल की थी। इस वैज्ञानिक सफलता के आधार पर अब हीलियन 50 मेगावाट क्षमता वाला ओरियन पावर प्लांट तैयार कर रही है। इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य वर्ष 2028 की शुरुआत से ही टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट को वाणिज्यिक स्तर पर बिजली की आपूर्ति करना है। कंपनी ने जून में प्लांट निर्माण और संचालन से जुड़े जरूरी विनियामक पड़ाव को पार करने की जानकारी दी थी।
अरबों डॉलर की फंडिंग और व्यावसायिक ग्रिड की चुनौतियां
हीलियन ने जून के महीने में सीरीज जी फंडिंग राउंड के तहत 465 मिलियन डॉलर जुटाने की शुरुआती घोषणा की थी, जो सितंबर में बढ़कर 500 मिलियन डॉलर पर बंद हुआ। हालांकि दोनों कंपनियां परमाणु संलयन की अलग-अलग तकनीकों और वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आगे बढ़ रही हैं, लेकिन दोनों के सामने चुनौती एक जैसी ही है। इंजीनियरिंग और लैब के नतीजों को बड़े पैमाने पर लगातार चलने वाले पावर प्लांट में बदलना और उसे मौजूदा पावर ग्रिड के अनुकूल बनाना ही इस पूरे क्षेत्र की सबसे बड़ी परीक्षा है।



















