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आईटीआई डिप्लोमा के बाद नौकरी नहीं मिली तो उत्तर प्रदेश के गोंडा में किसान संजय मौर्य ने बेड विधि से शुरू की भिंडी की खेती, 10 हजार रुपये लगाकर कमाए 70 हजारसक्सेस स्टोरी
7 अग॰ 2026, 10:19 am (83 दिन पहले)· 1

आईटीआई डिप्लोमा के बाद नौकरी नहीं मिली तो उत्तर प्रदेश के गोंडा में किसान संजय मौर्य ने बेड विधि से शुरू की भिंडी की खेती, 10 हजार रुपये लगाकर कमाए 70 हजार

गोंडा के संजय मौर्य ने ITI डिप्लोमा के बाद नौकरी न मिलने पर बेड विधि से भिंडी की खेती शुरू की। महज 8 से 10 हजार की लागत लगाकर वह हर साल 60 से 70 हजार रुपये कमा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित रुपईडीह विकासखंड के रहने वाले संजय मौर्य ने अपनी लगन और सूझबूझ से कृषि क्षेत्र में सफलता की एक नई मिसाल कायम की है। टेक्निकल शिक्षा के रूप में ITI डिप्लोमा हासिल करने के बाद उन्होंने काफी समय तक नौकरी पाने की कोशिश की, लेकिन जब सफलता हाथ नहीं लगी तो उन्होंने हताश होने के बजाय खेती को ही अपनी आजीविका का मुख्य साधन बनाने का फैसला किया। परिवार के सदस्यों के मार्गदर्शन और सलाह पर उन्होंने सब्जी उत्पादन में कदम रखा और आज वह आधुनिक तरीके से भिंडी की खेती करके हर साल 60 से 70 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी यह कामयाबी इलाके के अन्य ग्रामीण युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

पारंपरिक खेती छोड़ अपनाई आधुनिक बेड विधि

संजय मौर्य ने जब शुरुआती दौर में कृषि कार्य की शुरुआत की थी, तब वह सामान्य पारंपरिक तरीकों से ही भिंडी की बुआई करते थे। हालांकि, समय के साथ उत्पादन बढ़ाने और प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए उन्होंने अपनी कार्यशैली में बदलाव किया। यूट्यूब पर खेती से जुड़े वीडियो देखकर और आसपास के प्रगतिशील किसानों के अनुभवों से सीख लेकर उन्होंने बेड विधि से भिंडी उगाने की तकनीक अपनाई। इस आधुनिक तरीके से खेती करने पर पौधों के बीच पर्याप्त जगह मिल जाती है। इसके परिणामस्वरूप खेत में फसलों की सिंचाई करना और भिंडी की तुड़ाई करना बेहद सुलभ और आसान हो जाता है, जिससे श्रम और समय दोनों की बचत होती है।

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कम लागत में बंपर मुनाफा और भविष्य की योजनाएं

शुरुआत में बहुत छोटे स्तर पर भिंडी उगाकर प्रयोग करने वाले संजय मौर्य को जब अच्छे दाम और बेहतर पैदावार मिली, तो उन्होंने हर साल अपनी खेती का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया। वर्तमान समय में वह लगभग एक से डेढ़ बीघा जमीन पर भिंडी की व्यावसायिक खेती सफलता से कर रहे हैं। संजय मौर्य बताते हैं कि एक से डेढ़ बीघा क्षेत्रफल में भिंडी की फसल तैयार करने में केवल 8 से 10 हजार रुपये की शुरुआती लागत आती है। इस मामूली निवेश के बल पर उन्हें 60 से 70 हजार रुपये तक की कुल आमदनी हो जाती है। बाजार में सब्जियों के भाव और मांग के अनुसार यह कमाई कभी थोड़ी कम या ज्यादा भी हो सकती है।

बलरामपुर सब्जी मंडी में बिक्री और बढ़ती आय

अपनी ताजा भिंडी की उपज को सही समय पर और वाजिब दामों में बेचने के लिए संजय मौर्य पास की बलरामपुर सब्जी मंडी में अपनी पूरी फसल की सप्लाई करते हैं। मंडी में भिंडी की बढ़िया गुणवत्ता के कारण उन्हें अच्छे खरीदार और दाम मिल जाते हैं। भिंडी की फसल से नियमित और संतोषजनक आर्थिक लाभ मिलने की वजह से वह काफी उत्साहित हैं। इसी सकारात्मक अनुभव के आधार पर उन्होंने आने वाले समय में भिंडी की खेती के रकबे को और अधिक बढ़ाने की योजना बनाई है, ताकि अपनी आय को एक नए स्तर पर पहुंचाया जा सके।

सवाल-जवाब

संजय मौर्य ने नौकरी न मिलने के बाद खेती क्यों चुनी?
ITI डिप्लोमा हासिल करने के बाद जब नौकरी के प्रयास सफल नहीं हुए तो उन्होंने परिवार की सलाह से खेती को अपनी आजीविका का जरिया चुना।
भिंडी की खेती में बेड विधि का क्या फायदा है?
बेड विधि में फसलों के बीच पर्याप्त जगह रहने से सिंचाई करना और भिंडी की तुड़ाई करना बहुत आसान हो जाता है।
एक से डेढ़ बीघा भिंडी की खेती में कितनी लागत और कमाई होती है?
इस फसल में 8 से 10 हजार रुपये की लागत आती है और 60 से 70 हजार रुपये तक की आमदनी होती है।
संजय मौर्य अपनी फसल की बिक्री कहां करते हैं?
वह अपनी भिंडी की पूरी फसल बलरामपुर सब्जी मंडी में ले जाकर बेचते हैं।
संजय मौर्य ने बेड विधि से खेती करने की प्रेरणा कहां से ली?
उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो देखकर और आसपास के किसानों के अनुभवों से सीखकर यह तरीका अपनाया।
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