कैरियर में आने वाली शुरुआती रुकावटें कई बार नए और बड़े अवसरों की बुनियाद बन जाती हैं। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित तरबगंज विकासखंड के निवासी राजेश कुमार पाल की जीवन यात्रा इसका प्रत्यक्ष प्रमाण पेश करती है। उच्च शिक्षा के तहत पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया था। वहां उन्होंने प्लास्टिक निर्माण से जुड़ा एक उद्योग स्थापित किया, लेकिन परिस्थितियों के अनुकूल न होने के कारण वह कारोबार आगे नहीं बढ़ सका। महानगर में मिली इस नाकामी से हताश होकर बैठने के बजाय राजेश ने अपने गृह जनपद लौटकर नए सिरे से प्रयास करने का साहसिक फैसला लिया।
सरकारी सहायता से योगेश्वर इंजीनियरिंग की नींव
गृह जनपद लौटने के बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर औद्योगिक निर्माण की संभावनाओं का अध्ययन किया। लगभग चार साल पहले उन्होंने योगेश्वर इंजीनियरिंग नाम से अपनी वर्कशॉप की नींव रखी। इस नए उद्यम को जमीन पर उतारने के लिए उन्होंने खादी ग्रामोद्योग विभाग का रुख किया, जहां से उन्हें 25 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। इस योजना के अंतर्गत उन्हें 35 प्रतिशत की सरकारी सब्सिडी का महत्वपूर्ण वित्तीय संबल मिला। व्यवस्थित कामकाज और अनुशासन के दम पर राजेश कुमार पाल ने इस पूरे ऋण की अदायगी समय पर पूरी कर ली है और अब उनका उपक्रम पूरी तरह से कर्जमुक्त होकर स्वतंत्र रूप से संचालित हो रहा है।
निर्माण उपकरण और मोबाइल टॉयलेट का उत्पादन
देवीपाटन मंडल के अंतर्गत यह अपनी तरह की पहली ऐसी औद्योगिक इकाई है, जहां बड़े पैमाने पर निर्माण क्षेत्र से जुड़े उपकरणों का निर्माण हो रहा है। इस वर्कशॉप में विशेष रूप से सीमेंट, बालू और कंक्रीट जैसी निर्माण सामग्रियों को मिलाने वाली मिक्चर मशीनों का उत्पादन किया जाता है। ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से यहां छोटी और बड़ी, दोनों श्रेणियों की मिक्चर मशीनें तैयार की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, वर्कशॉप में पानी के मजबूत टैंक और आधुनिक मोबाइल टॉयलेट भी बनाए जा रहे हैं। इन मोबाइल टॉयलेट का उपयोग सार्वजनिक कार्यक्रमों, सड़क और भवन निर्माण स्थलों तथा अस्थायी आयोजनों में सुगमता से किया जाता है क्योंकि इन्हें आवश्यकतानुसार किसी भी स्थान पर आसानी से ले जाया जा सकता है।
कच्चे माल की आपूर्ति और गुणवत्ता प्रबंधन
उत्पादों की मजबूती और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए वर्कशॉप में आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। मशीनों के निर्माण के लिए आवश्यक कच्चा माल मुख्य रूप से दिल्ली, पंजाब और अन्य प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से मंगाया जाता है। नई मशीनों के निर्माण के अलावा यहां पुरानी और खराब हो चुकी मिक्चर मशीनों की मरम्मत की व्यापक सुविधा भी दी जाती है। इस मरम्मत सेवा से स्थानीय ठेकेदारों और भवन निर्माताओं को भारी राहत मिलती है, क्योंकि उन्हें मामूली खराबी के लिए बड़े शहरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और उनका काम कम लागत में स्थानीय स्तर पर ही पूरा हो जाता है।
असम तक उत्पादों का विस्तार और स्थानीय स्तर पर रोजगार
गुणवत्ता पर ध्यान देने के कारण योगेश्वर इंजीनियरिंग के उत्पादों की मांग बहुत तेजी से फैली है। आज गोंडा के अलावा बहराइच, सीतापुर, लखीमपुर खीरी और पड़ोसी राज्य असम तक यहां निर्मित मशीनों और टंकियों की नियमित आपूर्ति की जा रही है। इस औद्योगिक प्रयास ने क्षेत्र के युवाओं के लिए आजीविका के नए द्वार भी खोले हैं। वर्तमान में इस वर्कशॉप के जरिए 12 लोगों को स्थायी रूप से रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इसके साथ ही कार्य का दबाव और मांग बढ़ने पर 20 से 25 अतिरिक्त कामगारों को अस्थायी तौर पर काम पर रखा जाता है। इस कारोबार से राजेश को अच्छी वार्षिक आय हो रही है, जिससे उनके परिवार का भरण पोषण बेहतर ढंग से हो रहा है और कामगारों को भी नियमित पारिश्रमिक मिल रहा है। उनका अगला लक्ष्य अपने इस उपक्रम का दायरा बढ़ाकर इसके उत्पादों की आपूर्ति समूचे भारत में करने का है।


















