उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड तरबगंज के रहने वाले युवा सत्यपाल ने सरकारी मदद से लोहा उद्योग की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। खादी एवं ग्रामोद्योग योजना के तहत बैंक से वित्तीय सहायता प्राप्त करके उन्होंने अपने इस कारोबार की नींव रखी थी। एक छोटे स्तर से शुरू हुआ उनका यह उद्यम आज काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है और उन्हें इससे बढ़िया मुनाफा हो रहा है।
लोन की मदद से शुरू किया कारोबार
सत्यपाल ने बातचीत के दौरान साझा किया कि जब उन्होंने खुद का काम शुरू करने की सोची, तब उनके पास पर्याप्त पूंजी उपलब्ध नहीं थी। इस आर्थिक तंगी से पार पाने के लिए उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग योजना के अंतर्गत बैंक से 6 लाख रुपये का ऋण लिया। इस राशि का उपयोग करके उन्होंने जरूरी मशीनरी की खरीदारी की और लोहे के गेट, रेलिंग, ग्रिल तथा शटर जैसे उत्पाद बनाने का काम शुरू कर दिया। राहत की बात यह है कि वह अपने इस लोन को पूरी तरह चुका चुके हैं। वर्तमान में उनका पूरा व्यवसाय उनकी अपनी पूंजी पर चल रहा है और इससे उन्हें शानदार आमदनी हो रही है.
लंबा अनुभव और पुश्तैनी कौशल
अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में बात करते हुए सत्यपाल ने बताया कि उन्होंने आठवीं कक्षा तक की शिक्षा प्राप्त की है। उनके पिता भी भवन निर्माण के कार्य से जुड़े हुए थे। अपने पिता को काम करते हुए देखकर ही उन्होंने लोहे के काम से जुड़ी बारीकियों को सीखा था। इसके बाद उन्होंने गोंडा के रगड़गंज इलाके में स्थित पंजाब इंजीनियरिंग में लगभग 12 वर्षों तक काम किया। नौकरी करने के बाद उन्होंने खुद का उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया। आज से करीब 7 से 8 साल पहले उन्होंने अपने इस काम की शुरुआत की थी, जो वर्तमान में दिल्ली इंजीनियरिंग के नाम से संचालित हो रहा है.
ग्राहकों की पसंद के अनुसार तैयार होता है सामान
सत्यपाल की इस फर्म में घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों के लिए लोहे के गेट, चैनल, शटर, ग्रिल और अन्य आवश्यक सामान बनाए जाते हैं। ग्राहक अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से डिजाइन बताकर अपने ऑर्डर तैयार करवाते हैं। सत्यपाल खुद एक कुशल मिस्त्री हैं, इसलिए वे ग्राहकों की अपेक्षाओं और आवश्यकताओं के अनुसार बेहतरीन उत्पाद तैयार करते हैं। शुरुआती दिनों में उन्हें काम के बहुत कम ऑर्डर मिलते थे, लेकिन समय के साथ ग्राहकों का विश्वास उनके काम पर मजबूत होता गया। परिणामस्वरूप, अब उन्हें गोंडा के अलावा आसपास के अन्य जिलों से भी अच्छे खासे ऑर्डर मिलने लगे हैं.
दूसरों के लिए बने रोजगार का जरिया
अपने व्यवसाय के विस्तार के साथ-साथ सत्यपाल स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। उनके इस उद्यम में लगभग 5 से 6 लोग काम करते हैं जो उनके साथ मिलकर उत्पाद तैयार करते हैं। इससे उन्हें खुद तो अच्छी इनकम हो ही रही है, साथ ही वे अन्य लोगों की आजीविका का साधन भी बन गए हैं। अपने काम की सफलता से उत्साहित होकर वह अब इसे और ऊंचाइयों पर ले जाने की योजना बना रहे हैं.
कारोबार को ब्रांड बनाने की योजना
भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए सत्यपाल ने कहा कि वह अपने इस कारोबार को एक स्थापित ब्रांड का रूप देना चाहते हैं। उनकी योजना है कि आने वाले समय में उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों की पहचान दूर-दूर तक फैले। अपनी इस सफलता के सफर के आधार पर उन्होंने आज के युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का पूरा लाभ उठाना चाहिए। यदि किसी युवा के पास अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, तो वह सरकारी ऋण योजनाओं का सहारा ले सकता है। सत्यपाल का मानना है कि यदि पूरी ईमानदारी से मेहनत की जाए और दिशा सही हो, तो कोई भी व्यक्ति शून्य से शुरुआत करके अपना खुद का रोजगार खड़ा कर सकता है.



















