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एक हाथ की चुनौती को ताकत बनाकर नागौर की कोशिका ने 5 साल में जीते 15 पदकसक्सेस स्टोरी
25 जून 2026, 10:35 pm (45 दिन पहले)· 1

एक हाथ की चुनौती को ताकत बनाकर नागौर की कोशिका ने 5 साल में जीते 15 पदक

नागौर के ताऊसर गांव की पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी कोशिका देवड़ा ने तुर्की के वर्ल्ड एबिलिटी स्पोर्ट्स यूथ गेम्स-2026 में एक स्वर्ण और दो रजत जीते। पांच साल के सफर में वह कुल 15 पदक अपने नाम कर चुकी हैं।

राजस्थान के नागौर जिले के ताऊसर गांव की बेटी कोशिका देवड़ा ने यह दिखा दिया है कि इरादे मजबूत हों तो शरीर की कोई भी सीमा रास्ता नहीं रोक सकती। पैरा बैडमिंटन के कोर्ट पर सिर्फ पांच साल के सफर में इस युवा खिलाड़ी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग पहचान बना ली है। हाल ही में तुर्की में हुए वर्ल्ड एबिलिटी स्पोर्ट्स यूथ गेम्स-2026 में उन्होंने दमदार खेल दिखाते हुए एक स्वर्ण और दो रजत पदक अपने नाम किए।

कोशिका इस समय हैदराबाद में रहकर पढ़ाई और खेल दोनों को साथ लेकर चल रही हैं। वह बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं और देश की उभरती हुई पैरा बैडमिंटन खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। उनका ज्यादातर वक्त बैडमिंटन कोर्ट और फिटनेस ट्रेनिंग में ही बीतता है। बेहतर नतीजों के लिए वह रोजाना 8 से 10 घंटे अभ्यास करती हैं और खेल पर पूरा ध्यान बनाए रखने के लिए मोबाइल का इस्तेमाल भी काफी सीमित कर रखा है।

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आम खिलाड़ियों के साथ अभ्यास की रणनीति

एकेडमी में कोशिका सामान्य खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करती हैं। इससे उन्हें खेल की तेज रफ्तार और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच खुद को लगातार बेहतर बनाने का मौका मिलता है। उनके पिता राजेश देवड़ा बताते हैं कि बचपन से ही उनकी रुचि खेलों में रही है। शुरुआती दिनों में वह फुटबॉल खेला करती थीं।

केरल के दौरे ने बदली दिशा

स्कूल टीम के साथ जब वह केरल गईं तो वहां पहली बार उन्होंने पैरा बैडमिंटन खिलाड़ियों को करीब से खेलते देखा। यही वह पल था जब उनके मन में इस खेल में करियर बनाने का विचार आया। परिवार ने भी उनकी प्रतिभा और लगन को पहचानकर हर मोड़ पर साथ दिया। इसके बाद उन्हें लखनऊ भेजा गया, जहां मशहूर पैरा बैडमिंटन कोच गौरव खन्ना की देखरेख में उनका खेल और निखरकर सामने आया।

शारीरिक चुनौती को कभी कमजोरी नहीं बनने दिया

कोशिका एसयू-5 वर्ग में खेलती हैं। बचपन से ही उनके एक हाथ की कलाई के नीचे का हिस्सा पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को कभी अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। आज जो पहचान उनके नाम है, वह पूरी तरह उनकी मेहनत की देन है। यही वजह है कि राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक वह लगातार पदक जीत रही हैं।

15 पदकों का सफर

अब तक कोशिका कुल 15 पदक जीत चुकी हैं, जिनमें 2 स्वर्ण, 6 रजत और 7 कांस्य शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की बात करें तो तुर्की के वर्ल्ड एबिलिटी स्पोर्ट्स यूथ गेम्स-2026 में उन्होंने एक स्वर्ण और दो रजत, इंडोनेशिया इंटरनेशनल पैरा बैडमिंटन-2024 में एक कांस्य और युगांडा इंटरनेशनल पैरा बैडमिंटन-2023 में एक रजत व एक कांस्य पदक हासिल किया।

राष्ट्रीय स्तर पर 7वीं नेशनल पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 में उन्होंने 1 कांस्य, यूथ नेशनल पैरा बैडमिंटन 2025 में 2 रजत और 1 कांस्य जीता। इसके अलावा खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2024 में 1 कांस्य, नेशनल गेम्स 2024 में 1 रजत व 1 कांस्य और पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप 2023 में 1 स्वर्ण और 1 रजत पदक उनके नाम रहा।

सवाल-जवाब

कोशिका देवड़ा कौन हैं?
वह नागौर जिले के ताऊसर गांव की पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी हैं, जो एसयू-5 वर्ग में खेलती हैं और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुकी हैं।
उन्होंने तुर्की में कौन से पदक जीते?
तुर्की में हुए वर्ल्ड एबिलिटी स्पोर्ट्स यूथ गेम्स-2026 में उन्होंने एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते।
अब तक उनके कुल कितने पदक हैं?
कोशिका अब तक कुल 15 पदक जीत चुकी हैं, जिनमें 2 स्वर्ण, 6 रजत और 7 कांस्य शामिल हैं।
कोशिका के कोच कौन हैं?
उन्हें लखनऊ में मशहूर पैरा बैडमिंटन कोच गौरव खन्ना की देखरेख में प्रशिक्षण मिला।
वह रोजाना कितने घंटे अभ्यास करती हैं?
बेहतर प्रदर्शन के लिए वह हर दिन 8 से 10 घंटे तक अभ्यास करती हैं।
कोशिका ने किस खेल से शुरुआत की थी?
शुरुआती दिनों में वह फुटबॉल खेलती थीं और केरल दौरे पर पैरा बैडमिंटन देखने के बाद उन्होंने इस खेल को चुना।
वह इस समय कहां रहती हैं?
कोशिका इस समय हैदराबाद में रहकर पढ़ाई और खेल साथ-साथ कर रही हैं और बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं।
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