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गोरखपुर में घर के काम के साथ टेराकोटा मूर्तियों से सुशीला की हर महीने 50 हजार से अधिक की कमाईसक्सेस स्टोरी
13 अग॰ 2026, 8:30 am (77 दिन पहले)· 2

गोरखपुर में घर के काम के साथ टेराकोटा मूर्तियों से सुशीला की हर महीने 50 हजार से अधिक की कमाई

गोरखपुर की सुशीला घरेलू जिम्मेदारियां निपटाने के बाद परिवार के सहयोग से रोजाना 50 टेराकोटा मूर्तियां तैयार करती हैं, जिससे सामान्य दिनों में 50 हजार रुपये और बड़े ऑर्डर पर 1 लाख रुपये से अधिक की मासिक बिक्री होती है।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की निवासी सुशीला ने अपनी लगन, हुनर और कड़ी मेहनत के बल पर आत्मनिर्भरता की एक मिसाल कायम की है। घर के दैनिक कामकाज निपटाने के बाद वह अपने हुनर को आर्थिक स्वावलंबन का जरिया बना रही हैं। चिकनी मिट्टी को तराश कर बनाई जाने वाली उनकी सुंदर मूर्तियों की स्थानीय बाजार में भारी मांग है, जिसके चलते खरीदार स्वयं उनके निवास स्थान पर पहुंचकर मनपसंद मूर्तियों के निर्माण का ऑर्डर भी सौंपते हैं।

घरेलू जिम्मेदारियों के बीच हुनर से बनाई नई पहचान

सुशीला का दैनिक जीवन घर की देखरेख और पारिवारिक दायित्वों को पूरा करने से शुरू होता है। इन आवश्यक कार्यों से समय निकालकर वह अपने पारंपरिक हुनर को समय देती हैं। मिट्टी के शिल्प कार्य में उनकी रुचि और निरंतर प्रयास का परिणाम है कि आज उनकी पहचान एक कुशल मूर्तिकार के रूप में स्थापित हो चुकी है। ग्राहक केवल बाजार के माध्यम से ही नहीं, बल्कि सीधे उनके घर आकर अपनी व्यक्तिगत पसंद के अनुसार मूर्तियों के आकार और डिजाइन के ऑर्डर दर्ज कराते हैं।

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मशीन और पानी की मदद से मिट्टी तैयार करने की विशेष प्रक्रिया

बेहतरीन मूर्तियां तैयार करने के लिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण चरण सही मिट्टी का चुनाव तथा उसका प्रसंस्करण होता है। सुशीला के अनुसार, सबसे पहले चिकनी मिट्टी को बाहर से लाया जाता है और उसे पर्याप्त पानी में भिगोकर रखा जाता है। इसके बाद मिट्टी को मशीन की सहायता से अच्छी तरह फेटा और मिलाया जाता है। इस यांत्रिक प्रक्रिया से मिट्टी एकदम चिकनी और लोचदार बन जाती है। चिकनी मिट्टी से निर्मित मूर्तियां न केवल बेहद मजबूत होती हैं, बल्कि उनकी सतह पर एक बेहतरीन फिनिशिंग और चमक भी दिखाई देती है।

प्रतिदिन 50 मूर्तियों का निर्माण और पारिवारिक सहयोग

इस शिल्प कार्य में सुशीला अकेली काम नहीं करतीं, बल्कि उनका पूरा परिवार इस उद्यम में हाथ बटाता है। परिवार के सदस्य विभिन्न प्रकार के डिजाइन तैयार करने, मिट्टी को आकार देने और फिनिशिंग के कामों में लगातार सहयोग करते हैं। इस सामूहिक प्रयास के बल पर रोजाना लगभग 50 पीस मूर्तियां तैयार कर ली जाती हैं। ग्राहकों की आवश्यकता और बाजार के रुझान को ध्यान में रखते हुए मूर्तियों के आकार तथा पैटर्न में विविधता लाई जाती है।

टेराकोटा रंग की मूर्तियों की भारी मांग और एक लाख तक की आय

बाजार में टेराकोटा कलर की मूर्तियों को सबसे अधिक पसंद किया जाता है। व्यापारी और थोक विक्रेता एक साथ बड़ी संख्या में टेराकोटा रंग की मूर्तियों की आपूर्ति के लिए ऑर्डर प्रदान करते हैं। इसी मांग के चलते सुशीला सामान्य दिनों में प्रति माह 50 हजार रुपये से अधिक मूल्य की मूर्तियां बेच लेती हैं। जब पर्व-त्योहारों या विशेष अवसरों पर बड़े थोक ऑर्डर प्राप्त होते हैं, तब उनकी मासिक बिक्री 1 लाख रुपये के आंकड़े को भी पार कर जाती है।

सवाल-जवाब

सुशीला रोजाना कितनी टेराकोटा मूर्तियां तैयार करती हैं?
सुशीला अपने पूरे परिवार के सहयोग से प्रतिदिन लगभग 50 टेराकोटा मूर्तियां तैयार करती हैं।
मूर्तियां बनाने के लिए मिट्टी को किस प्रकार तैयार किया जाता है?
चिकनी मिट्टी को पहले पानी में भिगोया जाता है और फिर मशीन की मदद से फेटा जाता है ताकि मूर्तियां मजबूत और फिनिश्ड बनें।
सुशीला की मूर्तियों से हर महीने कितनी कमाई होती है?
सामान्य दिनों में उनकी बिक्री 50 हजार रुपये से अधिक रहती है, जबकि बड़े ऑर्डर मिलने पर यह 1 लाख रुपये के पार पहुंच जाती है।
ग्राहकों द्वारा ऑर्डर्स किस प्रकार दिए जाते हैं?
स्थानीय बाजार में बिक्री के अलावा ग्राहक स्वयं उनके घर पहुंचकर मनपसंद डिजाइन का ऑर्डर देते हैं और थोक व्यापारी भी बड़े ऑर्डर देते हैं।
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