न्यूजीलैंड दौरे पर देवदत्त पडिक्कल का शानदार शतक, साई सुदर्शन सिर्फ 8 रन से चुकेनेपाल प्रीमियर लीग में पाकिस्तानी क्रिकेटरों की राह में अड़चन, NOC को लेकर खड़ी हुई बड़ी मुश्किलशादाब खान के ऐतिहासिक शतक से इंग्लैंड चित, पाकिस्तान ने दर्ज की रोमांचक जीतउड़ता तीर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन डे 3: आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की फिल्म ने पहले वीकेंड पर कमाए इतने करोड़अशोक सेन: नोबेल से तीन गुना बड़े इनाम वाले भारतीय वैज्ञानिक, जिनकी सादगी आज भी साइकिल पर टिकी हैमुंबई में कृष्णा दास के कीर्तन में भक्तिमय हुए अनुष्का शर्मा और विराट कोहलीभारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरे टी20 मुकाबले की तारीख, समय और वेन्यू की पूरी जानकारीन्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट स्क्वाड में देवदत्त पडिक्कल ने मजबूत की अपनी दावेदारी, 199 रनों की खेली शानदार पारीरजनीकांत की 'धर्मन' में हुई नयनतारा की एंट्री, पांच साल बाद दोनों कलाकार आएंगे साथ नजरआरआरआर की छोटी मल्ली का बदल गया है पूरा अंदाज, 160 लड़कियों को पीछे छोड़कर मिला था रोल
कबाड़ से बनी अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल जो पीछे भी चलती है, पूर्णिया के 55 वर्षीय मिस्त्री का कमालसक्सेस स्टोरी
8 जुल॰ 2026, 5:15 pm (113 दिन पहले)· 2

कबाड़ से बनी अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल जो पीछे भी चलती है, पूर्णिया के 55 वर्षीय मिस्त्री का कमाल

बिहार के पूर्णिया में रहने वाले 50 वर्षीय बिजली मिस्त्री पवन कुमार भगत ने एक अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल बनाई है, जो मात्र एक घंटे में चार्ज होकर 70 किलोमीटर चलती है और इसमें रिवर्स गियर भी लगा है।

नया करने या कुछ नया सीखने के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता। प्रतिभा और अनोखी सोच कभी भी किसी बड़े बदलाव को जन्म दे सकती है। बिहार के पूर्णिया जिले के एक 50 वर्षीय बिजली मिस्त्री ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। उन्होंने अपने हुनर और तकनीकी समझ का इस्तेमाल करके एक ऐसी इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार की है, जो इन दिनों सड़कों पर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अपनी रोजाना की जरूरतों को पूरा करने और परिवहन के खर्च को कम करने के लिए उन्होंने इस साइकिल का निर्माण किया है।

महंगी गाड़ियों के विकल्प के रूप में जन्मा यह विचार

पूर्णिया के रानीपतरा (लोखड़ा) इलाके के रहने वाले पवन कुमार भगत पेशे से एक बिजली मिस्त्री हैं। वे पिछले कई वर्षों से बिजली का काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। आज के समय में जब गाड़ियां बेहद महंगी हो चुकी हैं, तब अपने सीमित बजट में गाड़ी खरीदना उनके लिए काफी कठिन काम था। इसी आर्थिक आवश्यकता ने उन्हें कुछ नया करने की प्रेरणा दी। अपने काम को आसान और किफायती बनाने के लिए उन्होंने सामान्य साइकिल को इलेक्ट्रिक साइकिल में बदलने का फैसला किया। पवन कुमार साल 2017 से अब तक ऐसी तीन से चार इलेक्ट्रिक साइकिलें बना चुके हैं, जिन्हें लोगों ने अच्छे दामों पर खरीद भी लिया है।

ये भी पढ़ें

घर के कबाड़ और ऑनलाइन पार्ट्स से मात्र 3 दिनों में तैयार

पवन कुमार ने बताया कि इस बार उन्होंने एक नई इलेक्ट्रिक साइकिल बनाने के लिए घर में पड़े कबाड़ के सामान और इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन मंगाए गए कुछ पुर्जों का इस्तेमाल किया। उन्होंने केवल 3 दिनों की कड़ी मेहनत से इस शानदार साइकिल को असेंबल कर दिया। इस पूरी साइकिल को बनाने में उनका लगभग 70,000 रुपये का खर्च आया है। अब यह साइकिल जब भी सड़क पर निकलती है, तो लोग इसे कौतूहल से देखने लगते हैं।

70 किलोमीटर का सफर, डिजिटल मीटर और रिवर्स गियर

इस देसी ई-साइकिल की तकनीकी विशेषताएं किसी आधुनिक इलेक्ट्रिक बाइक से कम नहीं हैं। पवन कुमार के अनुसार, इसे पूरी तरह चार्ज होने में मात्र 1 घंटे का समय लगता है। एक बार फुल चार्ज होने के बाद यह साइकिल आसानी से 70 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। स्थानीय बाजार से खरीदे गए पार्ट्स और देसी जुगाड़ तकनीक की मदद से बनी इस साइकिल में एक डिजिटल स्पीड मीटर भी लगाया गया है। इस साइकिल की सबसे अनोखी विशेषता इसका रिवर्स गियर है, जो आमतौर पर कारों में देखने को मिलता है। इस गियर की वजह से साइकिल को आगे चलाने के साथ-साथ पीछे भी दौड़ाया जा सकता है। पवन रोजाना इसी साइकिल पर सवार होकर रानीपतरा से पूर्णिया, खुश्कीबाग और आसपास के अन्य इलाकों में अपने बिजली के काम के लिए जाते हैं।

पैसे की बचत के साथ पर्यावरण की सुरक्षा

पवन कुमार भगत का मानना है कि इस अनोखे आविष्कार से उनके पैसे की बड़ी बचत हो रही है। इस साइकिल की वजह से अब उन्हें पेट्रोल या डीजल पर पैसे खर्च नहीं करने पड़ते। इसके साथ ही, यह पूरी तरह से बैटरी चालित होने के कारण पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाती है। आज के महंगाई के दौर में यह साइकिल उनके काम के लिए बेहद उपयोगी, सस्ती और पर्यावरण अनुकूल साबित हो रही है।

सवाल-जवाब

पवन कुमार भगत कौन हैं और वे कहां के रहने वाले हैं?
पवन कुमार भगत पेशे से एक बिजली मिस्त्री हैं और वे बिहार के पूर्णिया जिले के रानीपतरा (लोखड़ा) के रहने वाले हैं।
इस अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल को बनाने में कितना खर्च और समय लगा?
इसे बनाने में लगभग 70,000 रुपये का खर्च आया है और इसे केवल 3 दिनों की कड़ी मेहनत से तैयार किया गया है।
इस ई-साइकिल की रेंज और चार्जिंग समय क्या है?
यह साइकिल महज 1 घंटे में पूरी तरह चार्ज हो जाती है और इसके बाद आसानी से 70 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है।
इस साइकिल में कौन से विशेष फीचर्स दिए गए हैं?
इसमें डिजिटल स्पीड मीटर लगाया गया है और साथ ही कारों की तरह रिवर्स गियर भी दिया गया है जिससे यह पीछे भी चल सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp