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कबाड़ से बनी अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल जो पीछे भी चलती है, पूर्णिया के 55 वर्षीय मिस्त्री का कमालसक्सेस स्टोरी
8 जुल॰ 2026, 5:15 pm (23 दिन पहले)· 1

कबाड़ से बनी अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल जो पीछे भी चलती है, पूर्णिया के 55 वर्षीय मिस्त्री का कमाल

बिहार के पूर्णिया में रहने वाले 50 वर्षीय बिजली मिस्त्री पवन कुमार भगत ने एक अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल बनाई है, जो मात्र एक घंटे में चार्ज होकर 70 किलोमीटर चलती है और इसमें रिवर्स गियर भी लगा है।

नया करने या कुछ नया सीखने के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता। प्रतिभा और अनोखी सोच कभी भी किसी बड़े बदलाव को जन्म दे सकती है। बिहार के पूर्णिया जिले के एक 50 वर्षीय बिजली मिस्त्री ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। उन्होंने अपने हुनर और तकनीकी समझ का इस्तेमाल करके एक ऐसी इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार की है, जो इन दिनों सड़कों पर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अपनी रोजाना की जरूरतों को पूरा करने और परिवहन के खर्च को कम करने के लिए उन्होंने इस साइकिल का निर्माण किया है।

महंगी गाड़ियों के विकल्प के रूप में जन्मा यह विचार

पूर्णिया के रानीपतरा (लोखड़ा) इलाके के रहने वाले पवन कुमार भगत पेशे से एक बिजली मिस्त्री हैं। वे पिछले कई वर्षों से बिजली का काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। आज के समय में जब गाड़ियां बेहद महंगी हो चुकी हैं, तब अपने सीमित बजट में गाड़ी खरीदना उनके लिए काफी कठिन काम था। इसी आर्थिक आवश्यकता ने उन्हें कुछ नया करने की प्रेरणा दी। अपने काम को आसान और किफायती बनाने के लिए उन्होंने सामान्य साइकिल को इलेक्ट्रिक साइकिल में बदलने का फैसला किया। पवन कुमार साल 2017 से अब तक ऐसी तीन से चार इलेक्ट्रिक साइकिलें बना चुके हैं, जिन्हें लोगों ने अच्छे दामों पर खरीद भी लिया है।

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घर के कबाड़ और ऑनलाइन पार्ट्स से मात्र 3 दिनों में तैयार

पवन कुमार ने बताया कि इस बार उन्होंने एक नई इलेक्ट्रिक साइकिल बनाने के लिए घर में पड़े कबाड़ के सामान और इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन मंगाए गए कुछ पुर्जों का इस्तेमाल किया। उन्होंने केवल 3 दिनों की कड़ी मेहनत से इस शानदार साइकिल को असेंबल कर दिया। इस पूरी साइकिल को बनाने में उनका लगभग 70,000 रुपये का खर्च आया है। अब यह साइकिल जब भी सड़क पर निकलती है, तो लोग इसे कौतूहल से देखने लगते हैं।

70 किलोमीटर का सफर, डिजिटल मीटर और रिवर्स गियर

इस देसी ई-साइकिल की तकनीकी विशेषताएं किसी आधुनिक इलेक्ट्रिक बाइक से कम नहीं हैं। पवन कुमार के अनुसार, इसे पूरी तरह चार्ज होने में मात्र 1 घंटे का समय लगता है। एक बार फुल चार्ज होने के बाद यह साइकिल आसानी से 70 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। स्थानीय बाजार से खरीदे गए पार्ट्स और देसी जुगाड़ तकनीक की मदद से बनी इस साइकिल में एक डिजिटल स्पीड मीटर भी लगाया गया है। इस साइकिल की सबसे अनोखी विशेषता इसका रिवर्स गियर है, जो आमतौर पर कारों में देखने को मिलता है। इस गियर की वजह से साइकिल को आगे चलाने के साथ-साथ पीछे भी दौड़ाया जा सकता है। पवन रोजाना इसी साइकिल पर सवार होकर रानीपतरा से पूर्णिया, खुश्कीबाग और आसपास के अन्य इलाकों में अपने बिजली के काम के लिए जाते हैं।

पैसे की बचत के साथ पर्यावरण की सुरक्षा

पवन कुमार भगत का मानना है कि इस अनोखे आविष्कार से उनके पैसे की बड़ी बचत हो रही है। इस साइकिल की वजह से अब उन्हें पेट्रोल या डीजल पर पैसे खर्च नहीं करने पड़ते। इसके साथ ही, यह पूरी तरह से बैटरी चालित होने के कारण पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाती है। आज के महंगाई के दौर में यह साइकिल उनके काम के लिए बेहद उपयोगी, सस्ती और पर्यावरण अनुकूल साबित हो रही है।

सवाल-जवाब

पवन कुमार भगत कौन हैं और वे कहां के रहने वाले हैं?
पवन कुमार भगत पेशे से एक बिजली मिस्त्री हैं और वे बिहार के पूर्णिया जिले के रानीपतरा (लोखड़ा) के रहने वाले हैं।
इस अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल को बनाने में कितना खर्च और समय लगा?
इसे बनाने में लगभग 70,000 रुपये का खर्च आया है और इसे केवल 3 दिनों की कड़ी मेहनत से तैयार किया गया है।
इस ई-साइकिल की रेंज और चार्जिंग समय क्या है?
यह साइकिल महज 1 घंटे में पूरी तरह चार्ज हो जाती है और इसके बाद आसानी से 70 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है।
इस साइकिल में कौन से विशेष फीचर्स दिए गए हैं?
इसमें डिजिटल स्पीड मीटर लगाया गया है और साथ ही कारों की तरह रिवर्स गियर भी दिया गया है जिससे यह पीछे भी चल सकती है।
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