न्यूजीलैंड दौरे पर देवदत्त पडिक्कल का शानदार शतक, साई सुदर्शन सिर्फ 8 रन से चुकेवेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट से बाहर रह सकते हैं लिटन दास, चोट के बावजूद चयन को लेकर असमंजससाउथ अभिनेता अर्जुन सरजा के घर गूंजी शहनाइयां, बेटी अंजना अर्जुन ने लॉन्गटाइम पार्टनर इसाई संग रचाई दो अलग रीति-रिवाजों से शादीनेपाल प्रीमियर लीग में पाकिस्तानी क्रिकेटरों की राह में अड़चन, NOC को लेकर खड़ी हुई बड़ी मुश्किलउड़ता तीर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन डे 3: आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की फिल्म ने पहले वीकेंड पर कमाए इतने करोड़भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरे टी20 मुकाबले की तारीख, समय और वेन्यू की पूरी जानकारीफिल्मों में आने से पहले ही शक्ति कपूर की तस्वीर पान की दुकान पर लगाता था एक शख्स, भविष्य को लेकर कही थी बड़ी बातशादाब खान के ऐतिहासिक शतक से इंग्लैंड चित, पाकिस्तान ने दर्ज की रोमांचक जीतटाइगर श्रॉफ पर हमले को लेकर वायरल बयानों पर सफाई, प्रवक्ता ने दावों को बताया पूरी तरह फर्जीमुंबई में कृष्णा दास के कीर्तन में भक्तिमय हुए अनुष्का शर्मा और विराट कोहली
मंथली सैलरी की तंगी से तंग आकर गांव लौटे सुनील कुमार, 40 मवेशियों से खड़ा किया 10 लाख रुपये का डेयरी कारोबारसक्सेस स्टोरी
31 जुल॰ 2026, 7:28 am (91 दिन पहले)· 1

मंथली सैलरी की तंगी से तंग आकर गांव लौटे सुनील कुमार, 40 मवेशियों से खड़ा किया 10 लाख रुपये का डेयरी कारोबार

दिल्ली में 12 से 13 हजार रुपये प्रति माह की प्राइवेट नौकरी छोड़कर बिहार के सीतामढ़ी निवासी सुनील कुमार अपने गांव लौटे और पशुपालन शुरू किया। आज वह 40 गाय-भैंसों के डेयरी फार्म से हर साल 8 से 10 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं।

बिहार के सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा प्रखंड स्थित परछइयां गांव के रहने वाले सुनील कुमार का जीवन संघर्ष और सफलता की एक मिसाल बनकर उभरा है। देश की राजधानी दिल्ली की व्यस्त जिंदगी और सीमित मासिक आय को छोड़कर उन्होंने अपने गृह जिले में खुद का व्यवसाय शुरू करने का रास्ता चुना। पिछले 4 वर्षों के दौरान अपनी कड़ी मेहनत और कुशल प्रबंधन के बल पर उन्होंने पशुपालन को एक बेहद लाभदायक उद्यम में बदल दिया है, जो आसपास के इलाकों में स्वरोजगार की नई प्रेरणा दे रहा है।

दिल्ली की कम सैलरी से गांव के स्वरोजगार तक का सफर

सुनील कुमार पहले दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत थे। वहां दिन-रात लगातार मेहनत करने के बाद भी उन्हें हर महीने केवल 12,000 से 13,000 रुपये ही वेतन के रूप में मिलते थे। शहर की भागदौड़, भारी खर्चों और सीमित आय से परेशान होकर उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया। किसी अन्य संस्थान या व्यक्ति पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने अपने ही गांव परछइयां वापस लौटकर अपनी मेहनत के दम पर नया काम शुरू करने की ठानी।

ये भी पढ़ें

4 साल पहले जब उन्होंने पशुपालन के क्षेत्र में कदम रखा, तो शुरुआती दिनों में उन्हें कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि, शुरुआती चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सही प्रबंधन तथा निरंतर लगन से अपने काम को आगे बढ़ाया। आज उनका यह देशी डेयरी कारोबार न केवल मजबूती से स्थापित हो चुका है, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को भी गांव में रहकर आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखा रहा है।

40 मवेशी और दैनिक दूध उत्पादन का गणित

वर्तमान समय में सुनील के खटाल में छोटी-बड़ी मिलाकर कुल 40 गाय और भैंसें शामिल हैं। इस पूरे मवेशी कुनबे में से फिलहाल 18 गायें दूध दे रही हैं। इस दैनिक उत्पादन से वे हर रोज लगभग 100 से 120 लीटर शुद्ध दूध आसानी से बाजार में बेच लेते हैं। सुनील अपने मवेशियों की सेहत, खान-पान, साफ-सफाई और उचित देखरेख का विशेष ध्यान रखते हैं, जिससे दूध की गुणवत्ता उत्कृष्ट बनी रहती है और स्थानीय बाजारों तथा नजदीकी गांवों में इसकी जबरदस्त मांग रहती है।

मौसम अनुकूल होने और मवेशियों की स्थिति बेहतर रहने पर उत्पादन में और भी इजाफा होता है। जब खटाल की 25 से 30 गायें एक साथ दूध देने लगती हैं, तब दैनिक दूध बिक्री का आंकड़ा बढ़कर रोजाना 150 से 170 लीटर तक पहुंच जाता है। सही समय पर सही देखभाल के कारण उनका यह फार्म बिना किसी रुकावट के लगातार बेहतर आपूर्ति बनाए रखता है।

सालाना 10 लाख रुपये तक की कमाई और आत्मनिर्भरता

डेयरी व्यवसाय के इस सुनियोजित मॉडल के जरिए सुनील कुमार आज सालाना 8 लाख से 10 लाख रुपये तक की शानदार आमदनी हासिल कर रहे हैं। दिल्ली में 12 से 13 हजार रुपये की सीमित नौकरी छोड़कर अपने गांव में डेयरी फार्मिंग शुरू करने का उनका फैसला उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद दूरदर्शी और फायदेमंद साबित हुआ है। उनका यह प्रयास उन सभी ग्रामीण युवाओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो बड़े शहरों की ओर पलायन करने के बजाय अपने गांव-घर में ही रहकर सम्मानजनक कमाई और आत्मनिर्भरता हासिल करना चाहते हैं।

सवाल-जवाब

सुनील कुमार पहले कहां काम करते थे और उनकी सैलरी कितनी थी?
सुनील कुमार पहले दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे, जहां उन्हें हर महीने केवल 12,000 से 13,000 रुपये मजदूरी मिलती थी।
सुनील कुमार का गांव और जिला कौन सा है?
वे बिहार के सीतामढ़ी जिले में स्थित सोनबरसा प्रखंड के परछइयां गांव के रहने वाले हैं।
सुनील कुमार के डेयरी फार्म में कुल कितने मवेशी हैं?
उनके खटाल में फिलहाल छोटी-बड़ी मिलाकर कुल 40 गाय और भैंसें मौजूद हैं।
सुनील कुमार रोज कितना दूध बेचते हैं?
सामान्य दिनों में 18 गायों से लगभग 100 से 120 लीटर दूध बिकता है, जबकि अनुकूल मौसम में 25-30 गायों से बिक्री बढ़कर 150 से 170 लीटर रोजाना हो जाती है।
पशुपालन व्यवसाय से सुनील कुमार की सालाना कमाई कितनी है?
इस डेयरी व्यवसाय के जरिए वे हर साल 8 लाख से 10 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp