बिहार के सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा प्रखंड स्थित परछइयां गांव के रहने वाले सुनील कुमार का जीवन संघर्ष और सफलता की एक मिसाल बनकर उभरा है। देश की राजधानी दिल्ली की व्यस्त जिंदगी और सीमित मासिक आय को छोड़कर उन्होंने अपने गृह जिले में खुद का व्यवसाय शुरू करने का रास्ता चुना। पिछले 4 वर्षों के दौरान अपनी कड़ी मेहनत और कुशल प्रबंधन के बल पर उन्होंने पशुपालन को एक बेहद लाभदायक उद्यम में बदल दिया है, जो आसपास के इलाकों में स्वरोजगार की नई प्रेरणा दे रहा है।
दिल्ली की कम सैलरी से गांव के स्वरोजगार तक का सफर
सुनील कुमार पहले दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में कार्यरत थे। वहां दिन-रात लगातार मेहनत करने के बाद भी उन्हें हर महीने केवल 12,000 से 13,000 रुपये ही वेतन के रूप में मिलते थे। शहर की भागदौड़, भारी खर्चों और सीमित आय से परेशान होकर उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया। किसी अन्य संस्थान या व्यक्ति पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने अपने ही गांव परछइयां वापस लौटकर अपनी मेहनत के दम पर नया काम शुरू करने की ठानी।
4 साल पहले जब उन्होंने पशुपालन के क्षेत्र में कदम रखा, तो शुरुआती दिनों में उन्हें कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि, शुरुआती चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सही प्रबंधन तथा निरंतर लगन से अपने काम को आगे बढ़ाया। आज उनका यह देशी डेयरी कारोबार न केवल मजबूती से स्थापित हो चुका है, बल्कि क्षेत्र के युवाओं को भी गांव में रहकर आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखा रहा है।
40 मवेशी और दैनिक दूध उत्पादन का गणित
वर्तमान समय में सुनील के खटाल में छोटी-बड़ी मिलाकर कुल 40 गाय और भैंसें शामिल हैं। इस पूरे मवेशी कुनबे में से फिलहाल 18 गायें दूध दे रही हैं। इस दैनिक उत्पादन से वे हर रोज लगभग 100 से 120 लीटर शुद्ध दूध आसानी से बाजार में बेच लेते हैं। सुनील अपने मवेशियों की सेहत, खान-पान, साफ-सफाई और उचित देखरेख का विशेष ध्यान रखते हैं, जिससे दूध की गुणवत्ता उत्कृष्ट बनी रहती है और स्थानीय बाजारों तथा नजदीकी गांवों में इसकी जबरदस्त मांग रहती है।
मौसम अनुकूल होने और मवेशियों की स्थिति बेहतर रहने पर उत्पादन में और भी इजाफा होता है। जब खटाल की 25 से 30 गायें एक साथ दूध देने लगती हैं, तब दैनिक दूध बिक्री का आंकड़ा बढ़कर रोजाना 150 से 170 लीटर तक पहुंच जाता है। सही समय पर सही देखभाल के कारण उनका यह फार्म बिना किसी रुकावट के लगातार बेहतर आपूर्ति बनाए रखता है।
सालाना 10 लाख रुपये तक की कमाई और आत्मनिर्भरता
डेयरी व्यवसाय के इस सुनियोजित मॉडल के जरिए सुनील कुमार आज सालाना 8 लाख से 10 लाख रुपये तक की शानदार आमदनी हासिल कर रहे हैं। दिल्ली में 12 से 13 हजार रुपये की सीमित नौकरी छोड़कर अपने गांव में डेयरी फार्मिंग शुरू करने का उनका फैसला उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद दूरदर्शी और फायदेमंद साबित हुआ है। उनका यह प्रयास उन सभी ग्रामीण युवाओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो बड़े शहरों की ओर पलायन करने के बजाय अपने गांव-घर में ही रहकर सम्मानजनक कमाई और आत्मनिर्भरता हासिल करना चाहते हैं।



















