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खेत में ट्रैक्टर चलाने वाला बूंदी का बेटा कुंदन मीणा अब बनेगा डॉक्टर, NEET में लाए 602 अंकसक्सेस स्टोरी
22 जुल॰ 2026, 3:26 am (100 दिन पहले)· 5

खेत में ट्रैक्टर चलाने वाला बूंदी का बेटा कुंदन मीणा अब बनेगा डॉक्टर, NEET में लाए 602 अंक

बूंदी जिले के गांव पाली में रहने वाले कुंदन मीणा ने NEET में 602 अंक हासिल कर 9,486 ऑल इंडिया रैंक और कैटेगरी में 65वीं रैंक पाई, वह भी उस दौर के बाद जब कोरोना लॉकडाउन में उन्हें खेतों में ट्रैक्टर चलाना पड़ा था.

बूंदी जिले के एक छोटे से गांव पाली में रहने वाले कुंदन मीणा ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में 602 अंक हासिल करके यह साबित कर दिया है कि विषम हालात चाहे जितने भी बड़े हों, मेहनत और हौसले के आगे टिक नहीं पाते. कुंदन ने इस परीक्षा में 9,486 ऑल इंडिया रैंक और अपनी कैटेगरी में 65वीं रैंक हासिल की है, जिसके बाद परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके में खुशी की लहर है. हर साल देशभर के लाखों छात्र MBBS और BDS जैसे मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए NEET देते हैं, और इसमें अच्छी रैंक हासिल करना आसान नहीं माना जाता. एक साधारण किसान परिवार से निकलकर मेडिकल कॉलेज की दहलीज तक पहुंचने का कुंदन का यह सफर आसान नहीं रहा, इसमें कई मोड़ ऐसे भी आए जब उनकी पढ़ाई पूरी तरह छूट जाने का खतरा पैदा हो गया था.

शिक्षक पिता के संस्कार और नवोदय विद्यालय की पढ़ाई

कुंदन के पिता एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां घर की जिम्मेदारियां संभालती हैं. पिता के शिक्षक होने का असर शुरू से ही कुंदन की पढ़ाई पर दिखने लगा था और उनका दाखिला कक्षा 6 में ही जवाहर नवोदय विद्यालय में हो गया. वे कक्षा 11 तक इसी विद्यालय में पढ़ते रहे और यहीं से उनकी शैक्षणिक बुनियाद मजबूत हुई. घर में पढ़ाई को लेकर बना यही माहौल आगे चलकर उनके लिए सबसे बड़ा संबल साबित हुआ.

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कोरोना काल में पढ़ाई छोड़कर संभाला खेत

कक्षा 8 और 9 के दौरान जब देशभर में कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन लगा, तो कुंदन के परिवार के सामने आर्थिक तंगी जैसी कई मुश्किलें खड़ी हो गईं. परिवार के सबसे बड़े बेटे की जिम्मेदारी निभाते हुए कुंदन को अपनी पढ़ाई पीछे छोड़कर घर संभालने के लिए आगे आना पड़ा. करीब एक साल तक वे किताबों से दूर रहकर पूरी तरह खेती के काम में जुटे रहे. इस दौरान कुंदन खुद खेत में ट्रैक्टर चलाते, बुआई करते और एक अनुभवी किसान की तरह दिनभर मेहनत करते. जिस उम्र में उनके साथी छात्र कोचिंग और किताबों में डूबे थे, उस दौर में कुंदन धूप में खड़े होकर खेतों में पसीना बहा रहे थे, लेकिन यही संघर्ष आगे चलकर उनके इरादों को और मजबूत करता गया.

पिता के भरोसे और हिम्मत ने बदली सोच

कुंदन बताते हैं कि गांव के माहौल में अक्सर पढ़ाई से ज्यादा दूसरे कामों को तवज्जो दी जाती है, लेकिन उनके पिता ने हमेशा शिक्षा को ही सबसे ऊपर रखा और अपने सभी बच्चों को अच्छी पढ़ाई दिलाने के लिए लगातार संघर्ष किया. खेतों में मेहनत करते हुए कुंदन ने अपने पिता और चाचा के इसी संघर्ष को बेहद करीब से महसूस किया. उस दौर में पिता अक्सर उनसे कहते थे, "बेटा, तू अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, यह सब हम संभाल लेंगे." इसके बावजूद घर के हालात देखते हुए कुंदन ने खुद खेतों में हाथ बंटाना जरूरी समझा. लेकिन पिता की इसी हिम्मत को देखकर कुंदन के मन में अपने माता-पिता, गांव और शहर का नाम रोशन करने की चाहत जाग उठी. जैसे ही हालात सामान्य हुए, कुंदन दोबारा नियमित पढ़ाई में जुट गए और लॉकडाउन के दौरान कक्षा 8 और 9 में छूटा सिलेबस उन्होंने कक्षा 10 में अतिरिक्त मेहनत करके पूरा किया.

कोटा में एक साल की तैयारी और सपना हुआ साकार

कक्षा 12वीं पास करने के बाद कुंदन ने एक साल का ड्रॉप लिया और आगे की तैयारी के लिए शिक्षा नगरी कोटा पहुंच गए, जहां उन्होंने पीडब्ल्यू विद्यापीठ से नीट की कोचिंग ली. कुंदन खुद बताते हैं कि कक्षा 11 में उनकी पढ़ाई उतनी असरदार नहीं रही थी, लेकिन कक्षा 12 में उन्होंने जमकर मेहनत की और वहां से मिले अच्छे नतीजों के बाद उन्होंने कोटा में रहकर अपनी तैयारी को अंतिम रूप देने का फैसला किया. वे अपनी इस कामयाबी का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को देते हैं. जिस दौर में लॉकडाउन के चलते उनकी पढ़ाई बीच में छूटने का खतरा पैदा हो गया था, आज उसी संघर्ष के बाद कुंदन अपनी मेहनत और माता-पिता के आशीर्वाद से डॉक्टर बनने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं.

सवाल-जवाब

कुंदन मीणा कहां के रहने वाले हैं?
वे बूंदी जिले के छोटे से गांव पाली के रहने वाले हैं.
कुंदन ने NEET में कितने अंक और रैंक हासिल की?
उन्होंने 602 अंक हासिल कर 9,486 ऑल इंडिया रैंक और अपनी कैटेगरी में 65वीं रैंक पाई.
लॉकडाउन के दौरान कुंदन ने क्या किया था?
करीब एक साल तक उन्होंने पढ़ाई से दूरी बनाकर खेती संभाली, खुद ट्रैक्टर चलाया और बुआई की.
कुंदन के माता-पिता क्या करते हैं?
उनके पिता एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं और मां हाउसवाइफ हैं.
कुंदन ने NEET की तैयारी कहां से की?
12वीं के बाद एक साल का ड्रॉप लेकर उन्होंने कोटा के पीडब्ल्यू विद्यापीठ से नीट की कोचिंग ली.
कुंदन किस स्कूल में पढ़े थे?
वे कक्षा 6 से कक्षा 11 तक जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़े.
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