NEET UG 2026 के परिणाम घोषित होने के बाद राजस्थान के एक छोटे से गांव से एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। जयपुर जिले के किशनगढ़-रेनवाल ब्लॉक के दीपपुरा गांव में रहने वाले विक्रम गर्वा ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे विक्रम ने यह साबित कर दिया है कि अगर इंसान के मन में कुछ कर गुजरने का पक्का जज्बा हो, तो पैसों की कमी और जीवन की कोई भी परेशानी कभी उसके रास्ते की रुकावट नहीं बन सकती। उन्होंने बिना किसी महंगी कोचिंग के पहले ही प्रयास में नीट जैसी देश की सबसे कठिन और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में से एक को पास कर लिया है। यह कहानी सिर्फ एक परीक्षा को क्रैक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों-लाखों ग्रामीण और गरीब छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद की किरण है, जो आमतौर पर बुनियादी संसाधनों की कमी के कारण अपने बड़े सपनों को मार देते हैं। विक्रम की इस सफलता से पूरे इलाके में खुशी की लहर है।
संसाधनों का भारी अभाव, लेकिन हौसले पूरी तरह से बुलंद
विक्रम की यह ऐतिहासिक सफलता इसलिए भी बहुत खास और असाधारण है क्योंकि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा से ही बेहद कमजोर रही है। उनके पिता पुखराज गर्वा दिन-रात कड़ी शारीरिक मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं और मुश्किल से अपनी आजीविका चला पाते हैं। गरीबी और सीमित संसाधनों के कड़े संघर्ष के बावजूद, विक्रम के माता-पिता ने अपने बेटे की पढ़ाई-लिखाई में अपनी तरफ से कभी कोई कसर नहीं छोड़ी और हर कदम पर उसका पूरा साथ दिया। इस सफलता में उनकी मां के निस्वार्थ त्याग की भी बहुत बड़ी भूमिका है। विक्रम के दादा मूलचंद गर्वा गर्व के साथ बताते हैं कि पैसों की भारी तंगी के कारण परिवार विक्रम को किसी बड़े शहर या नामी कोचिंग संस्थान में भेजने में पूरी तरह से असमर्थ था। उनके पास इतने पैसे ही नहीं थे कि वे जयपुर या कोटा जाकर पढ़ाई कर सकें। हालांकि, इस कठिन स्थिति ने विक्रम को जरा भी निराश करने के बजाय उन्हें और अधिक कड़ी मेहनत करने के लिए अंदर से प्रेरित किया। उनके गांव अणतपुरा और दीपपुरा में अब हर तरफ जश्न का ही माहौल है। आसपास के इलाकों से लगातार लोग उन्हें और उनके परिवार को बधाई देने पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का पूरी तरह से मानना है कि यह उनके गांव और पंचायत के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी और गौरवशाली उपलब्धि है।
सरकारी स्कूल से पढ़ाई और 12 घंटे का सख्त अध्ययन रूटीन
महंगी कोचिंग सेंटर्स और बड़े निजी स्कूलों की चकाचौंध से कोसों दूर, विक्रम ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक की पूरी पढ़ाई अणतपुरा के स्थानीय राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय से ही पूरी की। उन्होंने अपनी तैयारी के लिए पूरी तरह से अपने सरकारी स्कूल के अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन और खुद की कड़ी मेहनत यानी सेल्फ-स्टडी पर ही भरोसा किया। विक्रम का कहना है कि वे रोजाना बिना नागा किए 10 से 12 घंटे लगातार पढ़ाई करते थे और कभी भी अपने इस सख्त रूटीन को टूटने नहीं दिया। उनकी तैयारी की रणनीति बिल्कुल स्पष्ट और सटीक थी—सिलेबस का लगातार कई बार रिवीजन करना और परीक्षा पैटर्न को समझने के लिए ज्यादा से ज्यादा मॉक टेस्ट की प्रैक्टिस करना। उन्होंने मीडिया को बताया कि उनके स्कूल के शिक्षकों ने उन्हें जो भी दिशा-निर्देश, टाइम-टेबल और रणनीतियां दीं, उन्होंने उस पर आंख बंद करके पूरा विश्वास किया और उसी के अनुसार अपनी पूरी पढ़ाई की। ज्यादा से ज्यादा अलग-अलग तरह के प्रश्न हल करने और नियमित रूप से टाइमर लगाकर टेस्ट देने से उनका आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया। इसी सटीक रणनीति का नतीजा यह हुआ कि उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की इस अत्यधिक कठिन परीक्षा में अपनी जगह बहुत ही शान से पक्की कर ली।
पहले प्रयास में शानदार रैंक और भविष्य के लिए एक बड़ा लक्ष्य
हाल ही में जारी किए गए री-नीट (Re-NEET) परीक्षा के अंतिम नतीजों में विक्रम ने अपने पहले ही प्रयास में शानदार प्रदर्शन करते हुए ओवरऑल ऑल इंडिया लेवल पर 3621वीं रैंक हासिल की है। वहीं, SC कैटेगरी वर्ग में उनकी ऑल इंडिया रैंक (AIR) 90 है, जो कि किसी भी ग्रामीण छात्र के लिए एक बहुत ही बड़ी बात है। एक साधारण सरकारी स्कूल के छात्र का बिना किसी बाहरी मदद के इस मुकाम तक पहुंचना, पूरे इलाके और राज्य की ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल बन गया है। विक्रम अपनी इस असाधारण उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के निस्वार्थ त्याग, स्कूल के गुरुजनों के उचित और निरंतर मार्गदर्शन, और सबसे बढ़कर खुद के कड़े अनुशासन को देते हैं। उनका यह दृढ़ विश्वास है कि परिवार के भरोसे और समर्थन ने ही उन्हें जीवन की किसी भी चुनौती के सामने कभी टूटने नहीं दिया।
युवाओं और छात्रों के लिए एक बहुत ही खास संदेश
भविष्य में एक बेहद काबिल डॉक्टर बनकर समाज के सबसे गरीब और बेसहारा लोगों की निस्वार्थ सेवा करने का महान सपना देखने वाले विक्रम ने देश के अन्य छात्रों और युवाओं के लिए भी एक बहुत ही मजबूत और स्पष्ट संदेश दिया है। उनका कहना है कि छात्रों को अपनी आर्थिक तंगी, जीवन की मुश्किलों या पारिवारिक परिस्थितियों को कभी भी अपनी कमजोरी नहीं मानना चाहिए, बल्कि उसे ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाकर जिंदगी में सफलता की ओर आगे बढ़ना चाहिए। विक्रम के सटीक शब्दों में, “लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से हो तो कोई भी सपना असंभव नहीं।” उनकी इस एक बात ने पूरे देश के सामने यह मजबूती से साबित कर दिया है कि अगर इंसान के नेक इरादे हों और खुद पर अटूट विश्वास हो, तो सीमित संसाधनों के दम पर भी किसी भी बड़ी चुनौती को आसानी से पार किया जा सकता है और प्रतिभा कभी भी छिपकर नहीं रहती।



















