कभी एक चद्दर के नीचे लगने वाली छोटी सी दुकान आज कोटा शहर की एक बड़ी पहचान बन चुकी है। राजस्थान के इस कोचिंग हब में जहां हर रोज नए-नए ब्रांड बाजार में उतरते हैं, वहीं गुमानपुरा में एक ऐसा ठिकाना भी है जो कपड़ों को परफेक्ट फिटिंग देने के हुनर के दम पर पूरे शहर का भरोसा जीत चुका है। इस दुकान का नाम है जनता अल्टरेशन, और इसकी कहानी सूई-धागे के जरिए बुनी गई मेहनत और भरोसे की एक अनोखी मिसाल है। आज इसी दुकान पर परिवार की तीसरी पीढ़ी भी कैंची और फीता संभाल चुकी है।
दुकान से जुड़े साबिर हुसैन बताते हैं कि इस सफर की नींव करीब 45 साल पहले उनके वालिद ने रखी थी। उस दौर में कोटा के ज्यादातर लोग अल्टरेशन शब्द से ठीक से वाकिफ भी नहीं थे। तब लोगों के लिए अल्टरेशन का मतलब बस पैंट की लंबाई घटाना या ढीली सिलाई को दुरुस्त कर देना भर था। कपड़ों के सही नाप और फैशन की बारीकियां इसी दुकान ने पूरे शहर को समझाईं। परिवार के बुजुर्गों ने इससे पहले कई तरह के कारोबार आजमाए थे, लेकिन असली बरकत उन्हें इसी टेलरिंग की लाइन में मिली।
शुरुआत बेहद मुश्किल थी। एक छोटी सी दुकान किराए पर ली गई और उस जमाने में महज ₹3,000 की पगड़ी देकर इस काम की बुनियाद डाली गई। वही छोटी सी रकम आज एक बड़ी मिसाल बन चुकी है।
चार भाइयों की मेहनत और नई पीढ़ी की एंट्री
वक्त बदला, कोटा शहर देश के सबसे बड़े कोचिंग हब के रूप में उभरा, लेकिन जनता अल्टरेशन पर लोगों का भरोसा कभी नहीं डगमगाया। परिवार में सबसे बड़े भाई शाकिर हुसैन हैं और उनसे छोटे इकबाल हुसैन। दोनों ने दिन-रात एक करके इस काम को खड़ा किया। अब साबिर हुसैन और उनके छोटे भाई इसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। कहानी का सबसे खूबसूरत मोड़ यह है कि अब इस दुकान में तीसरी पीढ़ी की भी शानदार एंट्री हो चुकी है। साबिर हुसैन का भतीजा भी अब इस पुश्तैनी काम को और आधुनिक व बड़ा बनाने में पूरी शिद्दत से जुट गया है।
तीन कारीगरों से 15 परिवारों तक का सफर
साबिर हुसैन कहते हैं, "आज से 45 साल पहले जब काम शुरू हुआ था, तब हमारे पास सिर्फ 3 कारीगर हुआ करते थे। लेकिन आज हमारे पास 10 से ज्यादा पक्के कारीगर काम कर रहे हैं। इनमें से कुछ तो ऐसे हैं जो पिछले 15 से 20 सालों से हमारे साथ एक परिवार की तरह जुड़े हुए हैं।" शुरुआत भले एक दुकान से हुई हो, लेकिन आज इनके पास 4 दुकानें हैं, जिनमें से तीन किराए की हैं। मेहनत की बदौलत आज इस काम से सिर्फ एक परिवार का ही नहीं, बल्कि दुकान में काम करने वाले 14 से 15 अन्य कारीगरों के परिवारों का भी पेट पल रहा है।
रोजाना 100 ग्राहक और संतुष्टि की सबसे बड़ी ताकत
इस दुकान पर हर दिन औसतन 100 से ज्यादा ग्राहक अपने कपड़ों की फिटिंग दुरुस्त कराने पहुंचते हैं। पुरानी यादें ताजा करते हुए साबिर हुसैन बताते हैं कि पहले के जमाने में भी इस काम से इतनी अच्छी कमाई हो जाती थी कि घर का खर्च आराम से चल जाए, और आज भी मेहनत का पूरा फल मिल रहा है। उनके मुताबिक ग्राहकों का अटूट विश्वास और उनके चेहरे की खुशी ही उनकी सबसे बड़ी यूएसपी है। 45 साल पहले बोया गया वह नन्हा सा बीज आज एक ऐसा बरगद बन चुका है, जिसके सूई-धागे के मजबूत रिश्ते ने पूरे कोटा शहर को अपना मुरीद बना रखा है।













