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छत्तीसगढ़ की बास्केटबॉल खिलाड़ी इलिसीबा ने नेशनल टूर्नामेंट्स में जीते दो मेडल, जशपुर से निकलकर बनाई पहचानसक्सेस स्टोरी
16 अग॰ 2026, 7:01 pm (74 दिन पहले)· 3

छत्तीसगढ़ की बास्केटबॉल खिलाड़ी इलिसीबा ने नेशनल टूर्नामेंट्स में जीते दो मेडल, जशपुर से निकलकर बनाई पहचान

जशपुर के राजमिस्त्री की बेटी इलिसीबा ने राजनांदगांव में आयोजित दो राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में स्वर्ण और कांस्य पदक हासिल किए हैं। 12वीं कक्षा में पढ़ने वाली इलिसीबा ने अपनी मेहनत और परिवार के सहयोग से यह सफलता हासिल की।

आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद अगर इरादे बुलंद हों, तो कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की रहने वाली इलिसीबा ने इस बात को साबित कर दिखाया है। एक साधारण राजमिस्त्री की बेटी इलिसीबा ने राष्ट्रीय स्तर की दो बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में एक गोल्ड और एक ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी यह उपलब्धि यह संदेश देती है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और वे राष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।

स्कूली दिनों से शुरू हुआ बास्केटबॉल का सफर

इलिसीबा वर्तमान में 12वीं कक्षा की छात्रा हैं। उन्होंने लगभग चार-पांच साल पहले बास्केटबॉल खेलना शुरू किया था। पहली बार उन्हें अपने स्कूल में इस खेल के बारे में जानकारी मिली थी। शुरुआती दिनों में उनके लिए यह केवल मनोरंजन और खेल का एक जरिया था, लेकिन समय बीतने के साथ बास्केटबॉल उनके दैनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया। वे खेल को लेकर बेहद गंभीर होती गईं और उन्होंने इसे अपने भविष्य के लक्ष्य के रूप में अपना लिया।

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पढ़ाई और 3 घंटे के कठिन अभ्यास का संतुलन

इलिसीबा का मानना है कि जीवन में सफलता पाने के लिए शिक्षा और खेल दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसी सोच के साथ वे अपनी पढ़ाई और खेल के बीच बेहतरीन संतुलन बनाए रखती हैं। वे रोजाना शाम 4 बजे से रात 7 बजे तक लगातार 3 घंटे बास्केटबॉल कोर्ट पर पसीना बहाती हैं। शाम के कठिन प्रशिक्षण के बाद जब वे घर लौटती हैं तो शरीर में काफी थकान होती है, लेकिन इसके बावजूद वे अपनी पढ़ाई के लिए समय निकालना कभी नहीं भूलतीं। उनका कहना है कि आगे बढ़ने के लिए पढ़ाई भी उतनी ही जरूरी है जितना कि खेल।

राजनांदगांव में आयोजित प्रतियोगिताओं में लहराया परचम

उनकी निरंतर मेहनत और अनुशासन का परिणाम उनके खेल के मैदान पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। इलिसीबा ने अब तक दो बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लिया है। ये दोनों ही राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में आयोजित की गई थीं। इन प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने एक बार स्वर्ण पदक और दूसरी बार कांस्य पदक पर कब्जा किया। उनकी इस सफलता ने उनके पूरे परिवार और जिले का नाम ऊंचा किया है।

पिता की शुरुआती झिझक से मिला पूरा समर्थन

इलिसीबा के पिता बिल्यासुस तिर्की पेशे से एक राजमिस्त्री हैं और उनकी मां एक गृहिणी हैं। सीमित पारिवारिक आय के कारण आर्थिक स्थितियां बहुत अनुकूल नहीं थीं, लेकिन इसके बाद भी माता-पिता ने इलिसीबा के सपनों को साकार करने में पूरा सहयोग दिया। इलिसीबा बताती हैं कि शुरुआती दिनों में जब वे खेलने के लिए बाहर जाती थीं, तो देर से लौटने को लेकर उनके पिता चिंता व्यक्त करते थे और बाहर जाने से मना करते थे। हालांकि, जब वे राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से मेडल जीतकर घर लौटने लगीं, तो उनके पिता और पूरे परिवार का उन पर भरोसा मजबूत होता गया। अब उनका परिवार उन्हें खेल के लिए कहीं भी जाने का पूरा समर्थन देता है।

सीमित सुविधाओं के बावजूद ग्रामीण प्रतिभा की मिसाल

मूल रूप से जशपुर की रहने वाली इलिसीबा ने अपनी स्कूली शिक्षा अंबिकापुर से पूरी की है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि जशपुर के उनके मूल क्षेत्र में बड़े शहरों जैसी आधुनिक खेल सुविधाएं और बास्केटबॉल कोर्ट उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। वे कहती हैं कि बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों में प्रतिभा और लगन भरपूर होती है, जिसे सही मार्गदर्शन मिलने पर बड़े मंचों पर साबित किया जा सकता है।

सवाल-जवाब

इलिसीबा ने राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में कौन से मेडल जीते हैं?
इलिसीबा ने दो राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में भाग लेकर एक गोल्ड मेडल और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता है।
राष्ट्रीय स्तर की बास्केटबॉल प्रतियोगिताएं कहां आयोजित की गई थीं?
इलिसीबा द्वारा भाग ली गई दोनों राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में आयोजित की गई थीं।
इलिसीबा किस कक्षा में पढ़ती हैं और वे रोजाना कितने घंटे अभ्यास करती हैं?
इलिसीबा वर्तमान में 12वीं कक्षा में पढ़ रही हैं और वे रोजाना शाम 4 बजे से रात 7 बजे तक 3 घंटे अभ्यास करती हैं।
इलिसीबा के पिता क्या काम करते हैं?
इलिसीबा के पिता बिल्यासुस तिर्की पेशे से एक राजमिस्त्री का काम करते हैं।
इलिसीबा मूल रूप से कहां की रहने वाली हैं और उन्होंने पढ़ाई कहां से की है?
इलिसीबा मूल रूप से छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की रहने वाली हैं और उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा अंबिकापुर से प्राप्त की है।
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