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लखनऊ के अंबेडकर विश्वविद्यालय में एमएससी टॉपर बने मऊ के मोनू कुमार, दीक्षांत समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहनाया स्वर्ण पदकसक्सेस स्टोरी
3 सित॰ 2026, 7:58 am (25 मिनट पहले)· 2

लखनऊ के अंबेडकर विश्वविद्यालय में एमएससी टॉपर बने मऊ के मोनू कुमार, दीक्षांत समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहनाया स्वर्ण पदक

मऊ जिले के खुरहट करजौली गांव निवासी मोनू कुमार ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के 11वें दीक्षांत समारोह में एमएससी में पहला स्थान हासिल कर स्वर्ण पदक जीता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों पदक प्राप्त करने के बाद गृह नगर लौटने पर उप जिलाधिकारी और स्थानीय विधायक ने भी उन्हें सम्मानित किया।

मऊ जिले के एक छोटे से गांव खुरहट करजौली के रहने वाले छात्र मोनू कुमार ने अपनी लगन और कड़ी मेहनत के दम पर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के 11वें दीक्षांत समारोह के दौरान उन्हें एमएससी पाठ्यक्रम में सर्वोच्च स्थान हासिल करने पर स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वयं अपने हाथों से मेधावी छात्र को यह प्रतिष्ठित पदक प्रदान किया, जिससे पूरे जनपद में खुशी का माहौल है।

दीक्षांत समारोह में मिला सर्वोच्च सम्मान

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ का 11वां दीक्षांत समारोह छात्र मोनू कुमार के लिए जीवन का सबसे यादगार क्षण बन गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस भव्य समारोह में देश भर से आए हजारों विद्यार्थियों और शोधार्थियों के बीच जब मोनू कुमार का नाम एमएससी टॉपर के रूप में पुकारा गया, तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंच पर उन्हें स्वर्ण पदक पहनाकर उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता की सराहना की।

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इस ऐतिहासिक सफलता पर अपने अनुभव साझा करते हुए मोनू कुमार ने बताया कि इतने बड़े केंद्रीय विश्वविद्यालय में शीर्ष स्थान हासिल करना और गोल्ड मेडल पाना उनके लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में बहुत बड़ी संख्या में मेधावी छात्र अध्ययन करते हैं और उस कड़े मुकाबले के बीच पूरे संस्थान में प्रथम स्थान प्राप्त करने के बारे में उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। जब उन्हें पहली बार यह जानकारी मिली कि वे विश्वविद्यालय के टॉपर बने हैं और उन्हें रक्षा मंत्री के हाथों पदक मिलने वाला है, तो वे अत्यधिक भावुक हो गए थे।

गरीबी और आर्थिक तंगी को पछाड़कर पाई सफलता

मोनू कुमार की यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि उनकी यह यात्रा बेहद कठिन परिस्थितियों और अभावों के बीच शुरू हुई थी। वे एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आते हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही एक छोटे से प्राथमिक विद्यालय में हुई। बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद उन्होंने शुरुआती दिनों से ही अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित रखा और हमेशा उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए।

जब उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए वे मऊ से लखनऊ चले गए, तो वहां के रहन-सहन और पढ़ाई-लिखाई का खर्च काफी बढ़ गया। एक गरीब परिवार के लिए बड़े शहर में शिक्षा का खर्च उठाना एक बड़ी चुनौती थी। हालांकि, उनके परिवार वालों ने आर्थिक तंगी को कभी मोनू की पढ़ाई के रास्ते में रोड़ा नहीं बनने दिया। परिवार के सदस्यों ने अपनी जरूरतों को सीमित करके भी मोनू की हर छोटी-बड़ी शैक्षणिक आवश्यकता को समय पर पूरा किया। परिवार के अटूट समर्थन और निरंतर मिले हौसले के बल पर ही वे इस मुकाम तक पहुंचने में सफल रहे। मोनू का मानना है कि हर छात्र को परिवार का ऐसा मजबूत संबल नहीं मिल पाता, और इसी सहयोग की बदौलत वे आज देश के रक्षा मंत्री से सम्मानित हो सके हैं।

यूपी बोर्ड से पढ़ाई और अंग्रेजी भाषा की बड़ी चुनौती

शैक्षणिक सफर के दौरान मोनू कुमार को सबसे बड़ी चुनौती भाषा के स्तर पर झेलनी पड़ी। उनकी शुरुआती और स्कूली शिक्षा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) से हिंदी माध्यम में हुई थी। गांव के स्कूल में हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के बाद जब वे केंद्रीय विश्वविद्यालय लखनऊ पहुंचे, तो वहां एमएससी का पूरा पाठ्यक्रम, संदर्भ पुस्तकें और परीक्षाएं अंग्रेजी भाषा में थीं।

अचानक माध्यम बदलने और पूरी तैयारी अंग्रेजी भाषा में करने की जरूरत ने शुरुआती दिनों में उनके सामने एक बड़ी दीवार खड़ी कर दी थी। हालांकि, उन्होंने इस कठिनाई से हार मानने के बजाय इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने दिन-रात मेहनत करके अंग्रेजी शब्दावली और वैज्ञानिक विषयों पर अपनी पकड़ मजबूत की। अपनी निरंतर लगन के बल पर उन्होंने भाषा की इस कठिन बाधा को पार करते हुए न केवल सफलता पाई, बल्कि पूरी यूनिवर्सिटी में टॉप करके यह साबित कर दिया कि माध्यम कभी प्रतिभा के रास्ते में बाधा नहीं बन सकता।

तनावमुक्त अध्ययन रणनीति और खुद से मुकाबला

पढ़ाई के दौरान अपनी कार्यशैली और रणनीति के बारे में बात करते हुए मोनू कुमार ने बताया कि उन्होंने कभी खुद पर पढ़ाई का अनुचित दबाव नहीं बनने दिया। वे निरंतर अध्ययन पर ध्यान देते थे, लेकिन साथ ही मानसिक ताजगी बनाए रखने के लिए समय-समय पर मोबाइल फोन का उपयोग और अन्य मनोरंजक गतिविधियों में भी भाग लेते थे। उनका मानना था कि केवल पढ़ाई के दबाव में रहने से डिप्रेशन या मानसिक तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है, इसलिए जब उनका मन पूरी तरह एकाग्र होता था, तभी वे पढ़ाई करते थे।

अधिकांश छात्र अक्सर दूसरों की प्रगति देखकर उनसे अपनी तुलना करने लगते हैं और प्रतिस्पर्धा के तनाव में आ जाते हैं। इसके विपरीत, मोनू कुमार ने किसी अन्य छात्र से होड़ करने के बजाय केवल स्वयं से मुकाबला करने की रणनीति अपनाई। उनका पूरा ध्यान हर दिन अपनी पिछली तैयारी को बेहतर बनाने पर था। वे खुद को यह साबित करना चाहते थे कि कड़ी मेहनत के जरिए कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

माइक्रोबायोलॉजी में पीएचडी और फूड रिसर्च का लक्ष्य

एमएससी की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद मोनू कुमार ने अपने आगे के करियर और शोध के लक्ष्यों को भी स्पष्ट कर लिया है। वे फिलहाल किसी नौकरी में जाने के बजाय उच्च अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं। उनका इरादा माइक्रोबायोलॉजी विषय में पीएचडी करके गहन शोध कार्य करने का है।

अपने शोध के लिए खाद्य विभाग और आहार विज्ञान के क्षेत्र को चुनने के पीछे उन्होंने एक महत्वपूर्ण सामाजिक कारण बताया। मोनू का कहना है कि वर्तमान समय में मिलावटी और असुरक्षित खान-पान के कारण आम लोगों के स्वास्थ्य पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ रहा है और तरह-तरह की बीमारियां बढ़ रही हैं। लोगों के बिगड़ते स्वास्थ्य को सुधारने और सुरक्षित खाद्य सामग्री के मानकों को मजबूत करने के उद्देश्य से वे खाद्य माइक्रोबायोलॉजी में अनुसंधान करना चाहते हैं। यह उनका खुद का सपना है कि वे अपने शोध के जरिए समाज और जनस्वास्थ्य के लिए कोई ठोस योगदान दे सकें।

घर वापसी पर प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने किया स्वागत

दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त करने के बाद जब मोनू कुमार लखनऊ से मऊ स्थित अपने पैतृक गांव खुरहट करजौली पहुंचे, तो वहां उत्सव जैसा माहौल बन गया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा क्षेत्र गौरवान्वित महसूस कर रहा है। गांव पहुंचने पर उप जिलाधिकारी अर्चना अग्निहोत्री ने स्वयं मोनू कुमार को गोल्ड मेडल पहनाकर और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

इसके अलावा क्षेत्र के स्थानीय विधायक राजेंद्र कुमार भी मोनू कुमार के निवास पर पहुंचे। उन्होंने मेधावी छात्र को मेडल पहनाया और फूलों का गुलदस्ता भेंटकर इस शानदार सफलता की बधाई दी। मोनू के घर पर बधाई देने वाले ग्रामीणों, रिश्तेदारों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का तांता लगा हुआ है। मोनू कुमार ने बताया कि इस अभूतपूर्व सफलता से उन्हें बहुत प्रसन्नता हो रही है, विशेष रूप से जब लोग उनके साथ-साथ उनके माता-पिता के त्याग की सराहना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उनके बेटे को देश के रक्षा मंत्री ने सम्मानित किया है।

सवाल-जवाब

मोनू कुमार किस जिले और गांव के रहने वाले हैं?
मोनू कुमार उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में स्थित खुरहट करजौली गांव के निवासी हैं।
मोनू कुमार को किस विश्वविद्यालय में स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया?
उन्हें लखनऊ स्थित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में एमएससी पाठ्यक्रम में सर्वोच्च स्थान पाने पर स्वर्ण पदक मिला।
मोनू कुमार को गोल्ड मेडल किसने प्रदान किया?
भारत सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्रदान कर सम्मानित किया।
मोनू कुमार की प्रारंभिक शिक्षा किस माध्यम में हुई थी?
उनकी प्रारंभिक पढ़ाई गांव के एक छोटे विद्यालय से यूपी बोर्ड (हिंदी माध्यम) में हुई थी, जिसके बाद उन्होंने लखनऊ में अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई की चुनौती स्वीकार की।
भविष्य के लिए मोनू कुमार की क्या योजनाएं हैं?
वह फिलहाल कोई नौकरी नहीं करेंगे, बल्कि भोजन की गुणवत्ता और जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर माइक्रोबायोलॉजी विषय से पीएचडी करके रिसर्च करेंगे।
गृह नगर लौटने पर उनका स्वागत किन प्रमुख हस्तियों ने किया?
उनके घर पहुंचने पर उप जिलाधिकारी अर्चना अग्निहोत्री और स्थानीय विधायक राजेंद्र कुमार ने उन्हें मेडल और गुलदस्ता भेंटकर सम्मानित किया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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