उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रहने वाली होनहार छात्रा नंदनी वर्मा ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह में नंदनी को विश्वविद्यालय के सबसे प्रतिष्ठित कुलाधिपति स्वर्ण पदक से अलंकृत किया गया। सतीश चंद्र कॉलेज से एमएससी रसायन विज्ञान की पढ़ाई करने वाली नंदनी ने अपनी कक्षा और पूरे विश्वविद्यालय में सर्वोच्च अंक हासिल कर यह विशेष स्थान बनाया है। यह स्वर्ण पदक पूरे विश्वविद्यालय परिसर और संबद्ध कॉलेजों में से केवल एक ही मेधावी विद्यार्थी को प्रदान किया जाता है।
दीक्षांत समारोह में मिला सर्वोच्च सम्मान
जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय के अष्टम दीक्षांत समारोह के दौरान नंदनी वर्मा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उनके कॉलेज और जिले का मान बढ़ा है। स्नातकोत्तर रसायन विज्ञान विषय की इस परीक्षा में उन्होंने लगातार कड़ी मेहनत के बल पर अव्वल स्थान प्राप्त किया। नंदनी के अनुसार, उन्होंने परीक्षा में बेहतर अंक लाने का विश्वास तो रखा था, लेकिन संपूर्ण विश्वविद्यालय में एकमात्र मिलने वाले चांसलर मेडल को हासिल करने का सपना सच होगा, इसका अंदाजा उन्हें पहले नहीं था। यह पुरस्कार मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
पारिवारिक परिस्थितियां और दैनिक दिनचर्या
बलिया के सिकंदरपुर बहेरी क्षेत्र की निवासी नंदनी वर्मा का पारिवारिक जीवन साधारण परिस्थितियों से होकर गुजरता है। उनके माता और पिता दोनों ही एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। घर पर नंदनी अपने दादा-दादी और भाई-बहनों के साथ रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करती हैं। उन्होंने अपनी कक्षाओं में नियमित उपस्थिति दर्ज कराई और खुद से पढ़ाई यानी सेल्फ स्टडी पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया। माता-पिता के बाहर काम करने के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई को कभी प्रभावित नहीं होने दिया और घर की जिम्मेदारियों के बीच एकाग्रता बनाए रखी।
पढ़ाई का तरीका और भविष्य का सपना
अपनी सफलता की रणनीति साझा करते हुए नंदनी ने बताया कि पढ़ाई के लिए समय की कोई निश्चित सीमा तय करने के बजाय प्रतिदिन एक निश्चित कार्य सूची यानी टास्क पूरा करना बेहद प्रभावी होता है। उनका मानना है कि विषय को इस तरह से समझा जाना चाहिए कि यदि किसी अन्य व्यक्ति को उसे समझाना पड़े, तो बिना किसी झिझक के सरल भाषा में समझाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि जुनून और निरंतरता ही किसी भी क्षेत्र में बड़ी कामयाबी दिलाती है। आगे चलकर शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने के उद्देश्य से नंदनी का सपना एक असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का है। उनका कहना है कि समय का सही और कुशल उपयोग ही हर असफलता को सफलता में बदलने की असली कुंजी है।



















