सिविल सेवा की तैयारी का रास्ता जितना लंबा और चुनौतीपूर्ण होता है, इसके पड़ाव कई बार जिंदगी में अप्रत्याशित और खूबसूरत मोड़ भी ले आते हैं। देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा के लिए चुने जाने के बाद जब युवा अधिकारी ट्रेनिंग के लिए मसूरी पहुंचते हैं, तो वहां न केवल देश संचालन के गुर सीखे जाते हैं बल्कि कई बार ऐसे रिश्ते भी बनते हैं जो ताउम्र साथ निभाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरक यात्रा वर्ष 2018 बैच के दो अधिकारियों, साहिला हीर और नितिन कुमार सिंह की रही है, जिनकी मुलाकात लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में हुई और आज दोनों बिहार में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
साहिला हीर का प्रारंभिक जीवन और शैक्षणिक पृष्ठभूमि
पंजाब के जालंधर से ताल्लुक रखने वाली साहिला हीर का जन्म 22 फरवरी 1991 को हुआ था। वे एक शिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं। उनके पिता बीएल हीर पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में डिप्टी चीफ इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि उनकी मां कुलजीत हीर एक स्कूल प्रिंसिपल थीं। साहिला ने अपनी स्कूली शिक्षा जालंधर के एमजीएन स्कूल से पूरी की।
स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने तकनीकी शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया और पटियाला स्थित थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में दाखिला लिया। वहां से उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन कंट्रोल में बीटेक की डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने कौशल का दायरा बढ़ाते हुए इवेंट मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया।
तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में हासिल की 572वीं रैंक
तकनीकी और प्रबंधन की पढ़ाई के बाद साहिला हीर ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का फैसला किया। यह राह उनके लिए आसान नहीं रही और उन्हें शुरुआती दौर में कड़े इम्तिहान से गुजरना पड़ा। पहले तीन प्रयासों में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमियों को दूर करते हुए तैयारी जारी रखी।
आखिरकार चौथे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 572वीं रैंक हासिल करके 2018 बैच में आईएएस बनने का गौरव प्राप्त किया। चयन के बाद उन्हें शुरुआत में त्रिपुरा कैडर आवंटित किया गया था। बाद में नितिन कुमार सिंह से विवाह के पश्चात उनके कैडर में बदलाव हुआ और वे बिहार कैडर में आ गईं।
बिहार में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का सफर
बिहार में साहिला हीर ने जमीनी स्तर पर कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्होंने नरकटियागंज में अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के रूप में कार्यभार संभाला। इसके बाद वे सहरसा और पूर्णिया में उप विकास आयुक्त (DDC) के पद पर तैनात रहीं। उन्होंने राज्य स्तर पर प्राथमिक शिक्षा निदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। प्रशासनिक क्षेत्र में उनके कार्य अनुभव को देखते हुए दिसंबर 2025 में उन्हें बक्सर जिले के जिलाधिकारी (DM) का दायित्व सौंपा गया।
IIT कानपुर से प्रशासनिक सेवा तक: नितिन कुमार सिंह का सफर
उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी वाराणसी के रहने वाले आईएएस नितिन कुमार सिंह की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद मजबूत रही है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT कानपुर से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा का रुख किया और कड़ी मेहनत के दम पर वर्ष 2018 बैच में ही आईएएस अधिकारी बनने में सफलता पाई। उन्हें मूल रूप से बिहार कैडर आवंटित हुआ था।
नितिन कुमार सिंह ने अपनी प्रशासनिक सेवा की शुरुआत पटना सदर के एसडीओ के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने मधेपुरा जिले में डीडीसी के रूप में काम किया और भागलपुर में नगर आयुक्त के पद पर रहते हुए अपनी कार्यशैली से पहचान बनाई।
पड़ोसी जिलों के डीएम से लेकर राज्य स्तरीय जिम्मेदारी तक
प्रशासनिक सेवा के दौरान इस दंपती के करियर में ऐसा दौर भी आया जब दोनों पड़ोसी जिलों की कमान संभाल रहे थे। दिसंबर 2025 के दौरान जब साहिला हीर को बक्सर जिले का डीएम नियुक्त किया गया, उसी समय नितिन कुमार सिंह को पड़ोसी जिले कैमूर का डीएम बनाया गया था। दोनों अधिकारी एक ही समय पर सीमावर्ती जिलों के मुखिया के रूप में जनता की सेवा कर रहे थे।
इसके बाद अगस्त 2026 में हुए प्रशासनिक फेरबदल के तहत नितिन कुमार सिंह को नई जिम्मेदारी सौंपी गई और वे राज्य स्तर पर माध्यमिक शिक्षा के निदेशक पद पर पदस्थापित किए गए। कठिन परीक्षाओं को पास कर प्रशासनिक पदों पर रहते हुए जनसेवा और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन बनाने के मामले में इस अधिकारी दंपती का सफर प्रशासनिक हलकों में काफी सराहा जाता है।



















