संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा को देश के सबसे चुनौतीपूर्ण इम्तिहानों में गिना जाता है, जहां हर साल लाखों अभ्यर्थी अपनी किस्मत और काबिलियत आजमाते हैं। इस लंबी और अनिश्चित राह पर जब दो लगनशील अभ्यर्थी अपने संघर्षों को पार करते हुए शीर्ष रैंक हासिल करते हैं और आगे चलकर जीवनसाथी बन जाते हैं, तो उनकी दास्तान केवल प्रशासनिक गलियारों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि देश भर के प्रतियोगी छात्रों के लिए प्रेरणा का सबब बन जाती है। यह कहानी वर्ष 2021 की सिविल सेवा परीक्षा में उल्लेखनीय मुकाम पाने वाले दो अधिकारियों, श्रेया श्री और निखिल महाजन की है। दोनों ने न केवल प्रशासनिक सेवा का अपना सपना साकार किया, बल्कि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में मुलाकात के बाद अपने सफर को वैवाहिक जीवन की खूबसूरत शुरुआत में भी बदल दिया।
श्रेया श्री की शिक्षा और देश सेवा का संकल्प
श्रेया श्री का पैतृक संबंध बिहार से है, जबकि उनके जीवन के शुरुआती साल और स्कूली पढ़ाई मध्य प्रदेश में पूरी हुई। मेधावी छात्रा रहीं श्रेया ने कठिन प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर में दाखिला पाया। यहां से उन्होंने अपना ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया। श्रेया के जीवन पर उनके परिवार का गहरा असर रहा। उनके पिता दिनेश चौधरी पूर्व में भारतीय वायुसेना में अपनी सेवाएं दे चुके थे और बाद में एक बैंक में कार्यरत रहे। सैन्य परिवेश और पिता के अनुशासन को देखकर ही श्रेया के भीतर सार्वजनिक जीवन और देश सेवा की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा जागृत हुई।
शुरुआती झटके से उबरकर बिना कोचिंग हासिल की सफलता
इंजीनियरिंग के बाद श्रेया श्री ने सिविल सेवा का रुख किया, लेकिन उनका पहला प्रयास आसान नहीं रहा। संघ लोक सेवा आयोग की इस परीक्षा में अपने पहले दांव में वह प्रारंभिक दौर यानी प्रीलिम्स भी पास नहीं कर पाई थीं। इस असफलता से हताश होने के बजाय उन्होंने अपनी रणनीतिक कमजोरियों और गलतियों का बारीकी से विश्लेषण किया। श्रेया ने इसके बाद किसी कोचिंग संस्थान का सहारा लेने के बजाय पूरी तरह खुद से अध्ययन करने का फैसला किया।
अपनी अनुशासित दिनचर्या, व्यवस्थित नोट्स और सतत अभ्यास की बदौलत उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा 2021 में ऑल इंडिया रैंक 71 हासिल कर ली। इस परीक्षा में श्रेया श्री ने कुल 993 अंक प्राप्त किए, जिसमें साक्षात्कार के दौरान मिले 178 अंक भी शामिल थे। अपने दूसरे ही प्रयास में यह शानदार प्रदर्शन कर वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चुनी गईं।
निखिल महाजन का व्यक्तिगत संघर्ष और छह प्रयासों की तपस्या
श्रेया श्री के पति निखिल महाजन की प्रशासनिक यात्रा लगातार धैर्य और विपरीत परिस्थितियों से जूझने की एक अलग ही मिसाल पेश करती है। पंजाब के फरीदकोट से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद निखिल ने आईआईटी दिल्ली में दाखिला लिया और वहां से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विषय में बीटेक की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के बाद अपने चाचा के दिए मशविरे पर अमल करते हुए उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का निर्णय लिया। हालांकि, निखिल के निजी जीवन में बचपन में ही एक बड़ा आघात लगा था, जब उनकी माता का देहांत हो गया था। परिवार के इस गहरे नुकसान और व्यक्तिगत चुनौतियों के बीच उन्होंने अपने जीवन के लक्ष्य को कभी ओझल नहीं होने दिया।
निखिल के लिए सिविल सेवा परीक्षा का सफर बेहद कठिन और लंबा साबित हुआ। वह एक के बाद एक लगातार पांच प्रयासों में असफल रहे। कई वर्षों की इस लंबी परीक्षा और बार-बार मिलने वाली नाकामी के बावजूद उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी। अपने छठे और अंतिम अवसर में उन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। जब 2021 की परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित हुआ, तो उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 80 प्राप्त कर इतिहास रच दिया। इस शानदार रैंक के आधार पर उन्हें भारतीय विदेश सेवा (IFS) आवंटित हुई।
अकादमी की साझा राह से दांपत्य जीवन तक का सफर
वर्ष 2022 बैच के अधिकारियों के रूप में श्रेया श्री और निखिल महाजन ने मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में अपनी साझा प्रशासनिक ट्रेनिंग शुरू की। प्रशिक्षण के दौरान ही दोनों के बीच बातचीत और दोस्ती की शुरुआत हुई। एक ओर जहां श्रेया ने सटीक रणनीति और स्व-अध्ययन के जरिए दूसरे प्रयास में शीर्ष स्थान हासिल किया था, वहीं निखिल ने पांच असफलताओं के बाद अपने आखिरी प्रयास को सफलता में बदला था।
प्रतियोगी जीवन के इन दो अलग-अलग अनुभवों और मजबूत वैचारिक तालमेल ने दोनों को करीब ला दिया। दोनों अधिकारियों ने आगे बढ़कर वर्ष 2024 में विवाह करने का निर्णय लिया। आज यह आईएएस और आईएफएस दंपती उन सभी अभ्यर्थियों के लिए एक ठोस उदाहरण बन चुका है, जो लंबी तैयारियों, पारिवारिक दिक्कतों या शुरुआती असफलताओं के कारण निराश होने लगते हैं। यह सफर साबित करता है कि सही दिशा, निरंतर समर्पण और धैर्य के बूते किसी भी जटिल लक्ष्य को पाया जा सकता है।



















