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जमुई के दिनेश पासवान ने इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल को बनाया चलता-फिरता बाजार, रोज कमाते हैं दो से ढाई हजार रुपयेसक्सेस स्टोरी
3 अक्तू॰ 2026, 1:26 pm (19 मिनट पहले)· 0

जमुई के दिनेश पासवान ने इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल को बनाया चलता-फिरता बाजार, रोज कमाते हैं दो से ढाई हजार रुपये

बचपन से दोनों पैरों से दिव्यांग दिनेश पासवान ने सरकारी इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल को अपनी दुकान का रूप देकर रोजमर्रा का सामान बेचना शुरू किया, जिससे वे प्रतिदिन 20 से 25 किलोमीटर सफर कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।

शारीरिक अक्षमता के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति किसी भी इंसान को आत्मनिर्भर बना सकती है। बिहार के जमुई जिले में रहने वाले दिनेश पासवान ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। बचपन से दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बाद भी उन्होंने कभी मुश्किलों के आगे घुटने नहीं टेके, बल्कि अपनी मेहनत और समझदारी से जीविकोपार्जन का एक अनोखा रास्ता तैयार किया। डैनीखांड गांव के निवासी दिनेश अपनी इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल पर दैनिक जरूरतों का सामान लेकर विभिन्न बस्तियों में पहुंचते हैं और सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका चला रहे हैं।

माता-पिता के निधन के बाद संभाली घर की बागडोर

दिनेश पासवान बताते हैं कि बचपन से ही उनके दोनों पैर काम नहीं करते हैं। जब तक उनके माता-पिता जीवित थे, तब तक वे ही किसी तरह मेहनत-मजदूरी करके घर की बुनियादी जरूरतें पूरी करते थे। माता-पिता के गुजर जाने के बाद परिवार के भरण-पोषण का पूरा भार दिनेश के कंधों पर आ गया। दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय उन्होंने खुद अपने पैरों पर खड़े होने का फैसला किया और स्वरोजगार के विकल्प तलाशने शुरू किए।

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सरकारी सहायता से मिली इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल बनी आजीविका का जरिया

लगभग 2 साल पहले उन्होंने एक सरकारी कल्याणकारी योजना के तहत आवेदन फॉर्म जमा किया था। इसके बाद स्थानीय प्रखंड कार्यालय की ओर से उन्हें बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल प्रदान की गई। दिनेश ने इस वाहन को केवल आने-जाने का साधन नहीं बनाया, बल्कि इसमें बदलाव करके इसे एक चलती-फिरती दुकान में तब्दील कर दिया। वाहन के पिछले बूट स्पेस में उन्होंने एक व्यवस्थित काउंटर तैयार किया, जिसमें झालमुड़ी, मिक्चर, प्याज, मसाले और नमकीन का पूरा स्टॉक सुरक्षित रखा जाता है। इसके अलावा वाहन के अगले हिस्से में कई मजबूत जालियां फिट की गईं, जिनमें मुंबई मिठाई और घर-गृहस्थी में प्रतिदिन काम आने वाली वस्तुएं टांग दी जाती हैं।

प्रतिदिन 20 से 25 किलोमीटर का सफर और बिक्री का समय

दिनेश का दैनिक कामकाज सुबह 9 बजे से शुरू होता है। वे अपनी इस सजी-धजी ट्राई साइकिल को लेकर घर से निकलते हैं और आसपास के ग्रामीण इलाकों की ओर रुख करते हैं। दिनभर में वे करीब 20 से 25 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए गली-मोहल्लों में फेरी लगाते हैं। सफर के दौरान यदि कभी ट्राई साइकिल की बैटरी खत्म हो जाती है, तो वे रास्ते में किसी भी स्थानीय ग्रामीण के घर जाकर बैटरी चार्ज करने का अनुरोध करते हैं और लोग भी सहर्ष उनकी मदद करते हैं। शाम 5 से 6 बजे के बीच वे सामान बेचकर वापस अपने घर लौटते हैं।

दैनिक आमदनी और स्थानीय स्तर पर सराहना

इस अनूठी चलती-फिरती दुकान से प्रतिदिन लगभग 2 हजार से लेकर ढाई हजार रुपये तक के सामान की बिक्री हो जाती है। इस कमाई से वे बिना किसी लाचारी के अपने पूरे परिवार का खर्च उठा रहे हैं। डैनीखांड और आसपास के गांवों के निवासी दिनेश के इस जुगाड़ और उनकी कर्मठता की मुक्तकंठ से सराहना करते हैं, क्योंकि उन्होंने शारीरिक सीमाओं को अपनी प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया।

सवाल-जवाब

दिनेश पासवान कहां के निवासी हैं?
दिनेश पासवान बिहार के जमुई जिले के डैनीखांड गांव के रहने वाले हैं।
दिनेश पासवान को इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल कैसे प्राप्त हुई थी?
लगभग 2 साल पहले सरकारी योजना के तहत आवेदन फॉर्म भरने के बाद उन्हें प्रखंड कार्यालय से यह इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल मिली थी।
वे अपनी चलती-फिरती दुकान में क्या-क्या सामान बेचते हैं?
वे झालमुड़ी, मिक्चर, प्याज, मसाले, मुंबई मिठाई और दैनिक उपयोग का अन्य सामान बेचते हैं।
दिनेश प्रतिदिन कितने किलोमीटर की दूरी तय करते हैं?
वे प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5-6 बजे के बीच आसपास के गांवों में करीब 20 से 25 किलोमीटर का सफर तय करते हैं।
इस काम से उनकी रोजाना कितनी बिक्री हो जाती है?
वे हर दिन करीब 2 हजार से लेकर ढाई हजार रुपये तक के सामान की बिक्री कर लेते हैं।
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