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नींबू की खेती में मधुमक्खी पालन जोड़कर बलिया के एक किसान ने पैदावार चार गुना कर दीसक्सेस स्टोरी
17 जुल॰ 2026, 11:40 am (104 दिन पहले)· 4

नींबू की खेती में मधुमक्खी पालन जोड़कर बलिया के एक किसान ने पैदावार चार गुना कर दी

बलिया जिले के किसान जयप्रकाश पांडेय ने नींबू के बाग में मधुमक्खी पालन शुरू कर उत्पादन को करीब चार गुना बढ़ा दिया, अब हर साल शहद बेचकर ही वे लाखों रुपये कमा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक किसान ने यह साबित कर दिया है कि मधुमक्खी पालन सिर्फ शहद के लिए नहीं, बल्कि फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए भी कारगर हथियार है। जयप्रकाश पांडेय नाम के इस प्रगतिशील किसान ने नींबू के बाग में मधुमक्खी के बक्से रखकर उत्पादन को लगभग चार गुना तक पहुंचा दिया है, और अब वे इलाके के दूसरे किसानों के लिए एक मिसाल बन चुके हैं।

किताबों से मिला आइडिया, खेत में हुआ कमाल

जयप्रकाश पांडेय ने सबसे पहले अपने खेत में नींबू की खेती शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने खेती से जुड़ी किताबें और रिसर्च पढ़नी शुरू कीं, जहां उन्हें पता चला कि मधुमक्खी पालन से दलहन और तिलहन की फसलों की पैदावार 20 से 30 प्रतिशत तक और सब्जियों की पैदावार 60 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है। सबसे दिलचस्प बात यह निकली कि नींबू की खेती में मधुमक्खियों के जरिए परागण बेहतर होने से पैदावार कई गुना तक बढ़ सकती है। इसी जानकारी को उन्होंने अपने खेत में आजमाने का फैसला किया।

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चार गुना बढ़ी पैदावार, लाखों में पहुंची कमाई

मधुमक्खी पालन शुरू करने के कुछ ही समय बाद जयप्रकाश पांडेय को शानदार नतीजे मिलने लगे। मधुमक्खियों की मौजूदगी से नींबू के बाग में बंपर फसल हुई और कुल उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ गया। इसका सीधा असर उनकी कमाई पर पड़ा और आमदनी लाखों रुपये तक पहुंच गई। आज मधुमक्खी पालन उनकी कमाई का एक मजबूत सहारा बन चुका है। हर साल वे करीब 12 से 14 क्विंटल शहद तैयार करते हैं और इसे 300 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचते हैं। सिर्फ शहद की बिक्री से ही उन्हें सालाना 3.60 लाख रुपये से लेकर 4.20 लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है।

काटती नहीं, दोस्त बन जाती हैं ये मधुमक्खियां

जयप्रकाश पांडेय बताते हैं कि उनकी मधुमक्खियां किसी को काटती नहीं, बल्कि दोस्त जैसा व्यवहार करती हैं। ये तभी काटती हैं जब इन्हें कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे। अपनी बात साबित करने के लिए वे खुद मधुमक्खी के बक्से पर जाकर बैठ गए, मधुमक्खियां उनके पूरे शरीर पर बैठी रहीं, फिर भी उन्होंने काटा नहीं।

राज्यपाल के हाथों मिल चुका है सम्मान

जयप्रकाश पांडेय बलिया जिले के जाने-माने किसानों में गिने जाते हैं। उनके इस प्रयोग और मेहनत को देखते हुए राज्यपाल भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। उनकी यह कहानी बताती है कि सही जानकारी, नए तरीकों और प्रकृति के साथ मिलकर काम करने से एक ही खेत से कई गुना कमाई की जा सकती है।

सवाल-जवाब

जयप्रकाश पांडेय कौन हैं और कहां के रहने वाले हैं?
वे उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के एक प्रगतिशील किसान हैं, जो नींबू की खेती के साथ मधुमक्खी पालन भी करते हैं।
मधुमक्खी पालन से नींबू की पैदावार कितनी बढ़ी?
मधुमक्खी पालन शुरू करने के बाद उनके नींबू के बाग का उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ गया।
वे हर साल कितना शहद बनाते हैं और कितनी कमाई होती है?
वे हर साल करीब 12 से 14 क्विंटल शहद तैयार करते हैं और 300 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचकर सालाना 3.60 लाख से 4.20 लाख रुपये कमाते हैं।
क्या मधुमक्खियां जयप्रकाश पांडेय को काटती हैं?
नहीं, वे बताते हैं कि उनकी मधुमक्खियां दोस्त जैसा व्यवहार करती हैं और तभी काटती हैं जब उन्हें नुकसान पहुंचाया जाए।
मधुमक्खी पालन से बाकी फसलों को क्या फायदा होता है?
मधुमक्खी पालन से दलहन और तिलहन की फसलों की पैदावार 20 से 30 प्रतिशत और सब्जियों की पैदावार 60 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
जयप्रकाश पांडेय को अब तक क्या सम्मान मिल चुका है?
उन्हें राज्यपाल के हाथों सम्मानित किया जा चुका है और वे बलिया जिले के जाने-माने किसानों में गिने जाते हैं।
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