पश्चिम चम्पारण में मधुमक्खी पालन के जरिए केवल शहद का कारोबार ही नहीं किया जा रहा है, बल्कि कुछ लोग इससे एक कदम आगे बढ़कर मधुमक्खी का विष इकट्ठा करने का काम भी कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस विष की कीमत एक करोड़ रुपये प्रति किलो तक आंकी जाती है। कीट विशेषज्ञों के अनुसार, इस खास कारोबार में सफलता पाने के लिए थोड़ी शुरुआती लागत और कुछ खास सावधानियों की जरूरत होती है। वर्तमान में जहानाबाद समेत बिहार के चुनिंदा जिलों में इस व्यवसाय को बेहद सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है।
प्रजाति का चुनाव और एक्सट्रैक्शन प्रक्रिया
माधोपुर स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के प्रभारी अधिकारी और कीट विशेषज्ञ डॉ. नीरज कुमार का कहना है कि इस कार्य के लिए सबसे पहले मधुमक्खियों की सही प्रजाति का चयन करना बेहद जरूरी है। आम लोगों में यह गलतफहमी आम है कि किसी भी प्रजाति की मधुमक्खी से विष निकाला जा सकता है, जो कि व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इस काम के लिए केवल 'एपिस मेलिफेरा' प्रजाति की मधुमक्खियों का ही पालन करना पड़ता है। केवल यही मेलिफेरा प्रजाति है जिससे विष का संग्रहण किया जा सकता है।
उत्पादन और बॉक्स की सीमाएं
डॉ. नीरज कुमार के मुताबिक, मात्र एक ग्राम विष प्राप्त करने के लिए करीब 10 हजार मधुमक्खियों की आवश्यकता पड़ती है। यदि कोई पालक 10 हजार से ज्यादा मधुमक्खियों को एक साथ जुटा भी ले, तब भी उनसे विष निकाल पाना आसान काम नहीं होता है। खुले वातावरण में घूम रही मधुमक्खियों से विष निकालना पूरी तरह असंभव है क्योंकि इस प्रक्रिया में एक्सट्रैक्टर और अन्य विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके लिए मधुमक्खियों का जमीन पर एक स्थान पर स्थाई रूप से रहना अनिवार्य होता है। यदि बक्से में पालन शुरू भी कर दिया जाए, तो एक बक्से में मौजूद मधुमक्खियों से केवल पांच ग्राम तक ही विष निकाला जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारी भरकम मांग
मधु मक्खी के विष की कीमत और इसके वैश्विक बाजार पर नजर डालें तो आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मधुमक्खी के एक किलो विष की कीमत एक करोड़ रुपये तक पहुंचती है। इसके अलावा, साल 2025 में वैश्विक स्तर पर इसका बाजार लगभग 425 मिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जो लगातार हर साल ऊपर की ओर बढ़ रहा है।


















