देवघर के रहने वाले एक किसान ने वह कर दिखाया है, जिसका सपना देश का हर अन्नदाता देखता है। खेती को अक्सर घाटे का सौदा कहा जाता है, लेकिन अगर सही रणनीति और बाजार की मांग को समझकर फसल उगाई जाए, तो यह किसी भी अन्य व्यवसाय से ज्यादा मुनाफा दे सकती है। देवघर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले गोपीडीह गांव के एक प्रगतिशील किसान अंबिका कुशवाहा ने इसी सोच के साथ अपनी किस्मत बदल ली है। दशकों से धान और गेहूं की पारंपरिक खेती में उलझे रहने वाले अंबिका ने जब अपनी एक एकड़ जमीन पर भिंडी की खेती करने का साहसिक फैसला लिया, तो उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह से बदल गई। जिस खेत से कभी मुश्किल से परिवार का गुजारा हो पाता था, आज वही खेत उनके लिए नियमित आमदनी का एक शानदार जरिया बन चुका है। यह कहानी केवल एक किसान की सफलता की नहीं है, बल्कि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक बदलाव की अहमियत को भी दर्शाती है।
धान और गेहूं की खेती में छिपी चुनौतियां
अंबिका कुशवाहा का परिवार पीढ़ियों से खेती-किसानी से जुड़ा हुआ है। उनके पिता वर्षों तक उसी एक एकड़ जमीन में धान और गेहूं उगाते आ रहे थे। अंबिका बताते हैं कि पारंपरिक फसलों से अनाज तो पैदा हो जाता था, लेकिन मुनाफा ना के बराबर होता था। धान और गेहूं की खेती में महीनों का लंबा इंतजार करना पड़ता है और कड़ी मेहनत के बावजूद जो आमदनी होती थी, उससे केवल परिवार का पेट भर पाता था। आर्थिक स्थिति को मजबूत करने या भविष्य के लिए बचत करने का कोई ठोस रास्ता नजर नहीं आ रहा था। खेती में लगने वाली लागत, खाद, बीज और सिंचाई का खर्च निकालने के बाद किसान के हाथ में नाममात्र का ही पैसा बचता था। इसी मजबूरी ने अंबिका को यह सोचने पर विवश कर दिया कि अगर जिंदगी में आगे बढ़ना है और खेती से वास्तविक लाभ कमाना है, तो पुरानी परिपाटी को तोड़ना ही होगा।
भिंडी की खेती से खुला मुनाफे का रास्ता
समय की मांग और बाजार के रुख को भांपते हुए अंबिका कुशवाहा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। उन्होंने धान और गेहूं को छोड़कर नगदी फसलों, खासकर सब्जियों की खेती की तरफ रुख किया। अपनी उसी एक एकड़ जमीन पर उन्होंने भिंडी की फसल लगाई। अंबिका का अनुभव है कि भिंडी की खेती के शुरुआती चरण में खेत की तैयारी, बीज की बुआई और पौधों की देखभाल में काफी मेहनत और ध्यान की जरूरत होती है। लेकिन एक बार जब पौधे तैयार हो जाते हैं और उनमें फल लगने शुरू हो जाते हैं, तो यह फसल किसान को मालामाल कर देती है। यह एक ऐसा फैसला था जिसने उनकी खेती के पूरे अर्थशास्त्र को ही पलट कर रख दिया और घाटे के सौदे को मुनाफे की गारंटी में बदल दिया।
हर दो-तीन दिन में होने लगी नगद कमाई
भिंडी की फसल की सबसे बड़ी खासियत इसका उत्पादन चक्र है। अंबिका के मुताबिक, भिंडी की फसल एक बार तैयार हो जाने के बाद लगभग तीन महीने तक लगातार पैदावार देती रहती है। पारंपरिक फसलों की तरह इसमें उपज को बेचने के लिए महीनों तक इंतजार नहीं करना पड़ता। हर दूसरे या तीसरे दिन खेतों से ताजी भिंडी की तुड़ाई होती है और उसे सीधे बाजार में बेचकर हाथों-हाथ नगद पैसा मिल जाता है। यह नियमित नकदी प्रवाह किसी भी किसान के लिए बहुत बड़ी राहत की बात होती है। बाजार में भिंडी की मांग लगातार बनी रहती है, जिसके कारण अंबिका को अपनी उपज का सही और तुरंत दाम मिल जाता है। नगद आमदनी ने उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी काफी बढ़ा दिया है।
लागत से दस गुना मुनाफा और आर्थिक आजादी
इस नई सोच और वैज्ञानिक तरीके से की गई खेती का परिणाम यह हुआ कि अंबिका कुशवाहा अब तक अपनी भिंडी की फसल से करीब डेढ़ लाख रुपये की शानदार कमाई कर चुके हैं। यह उनके द्वारा खेत में लगाई गई शुरुआती लागत से लगभग 10 गुना अधिक है। जिस खेत से पहले कोई खास आमदनी नहीं हो पाती थी, उसी जमीन ने आज उनकी आर्थिक स्थिति को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। अंबिका का स्पष्ट मानना है कि अगर किसान सिर्फ मौसम के भरोसे रहने के बजाय बाजार की मांग का अध्ययन करें और नई कृषि तकनीकों को अपनाएं, तो सीमित जमीन में भी बेहतरीन आय प्राप्त की जा सकती है। उनकी यह सफलता गोपीडीह और आसपास के गांवों के अन्य किसानों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है।
देवघर का पर्यटन और ताजी सब्जियों की भारी मांग
अंबिका कुशवाहा की इस सफलता में देवघर की भौगोलिक और धार्मिक महत्ता का भी बहुत बड़ा योगदान है। देवघर एक विश्व प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन नगरी है। यहां स्थित पवित्र बाबा बैद्यनाथ धाम में दर्शन के लिए पूरे सालभर देश-विदेश से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। सावन के महीने के अलावा भी यहां हर दिन हजारों पर्यटक आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण देवघर के होटलों, धर्मशालाओं, लॉज और रेस्टोरेंट में ताजी सब्जियों की हमेशा भारी मांग रहती है। अंबिका बताते हैं कि उन्हें अपनी ताजी भिंडी बेचने के लिए ग्राहकों को खोजना नहीं पड़ता। स्थानीय सब्जी मंडियों में अच्छे दाम मिलने के साथ-साथ, उन्हें आसपास के व्यापारियों और होटल संचालकों से भी सब्जियों की आपूर्ति के नियमित ऑर्डर मिलते रहते हैं। इस रेडीमेड बाजार ने उनकी खेती को एक सुरक्षित और लाभदायक व्यवसाय में तब्दील कर दिया है।




















