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पलामू के किसान ओमकार नाथ ने नीलगाय की मार से बचने के लिए अपनाया पिपरमेंट, अब एक एकड़ से तीन गुना कमाईसक्सेस स्टोरी
2 जुल॰ 2026, 11:04 am (29 दिन पहले)· 4

पलामू के किसान ओमकार नाथ ने नीलगाय की मार से बचने के लिए अपनाया पिपरमेंट, अब एक एकड़ से तीन गुना कमाई

पलामू जिले के पड़वा प्रखंड में किसान ओमकार नाथ ने नीलगाय से बचने के लिए पिपरमेंट की खेती शुरू की, जो अब एक एकड़ में लागत का तिगुना मुनाफा दे रही है।

खरीफ सीजन शुरू होते ही झारखंड के पलामू जिले के किसानों की सबसे बड़ी चिंता एक बार फिर सामने आ गई है, नीलगाय के झुंड जो धान, मक्का और दलहन जैसी फसलों को रातोंरात तबाह कर देते हैं। लेकिन पड़वा प्रखंड के किसान ओमकार नाथ ने इस मुसीबत का तोड़ ढूंढ लिया है। उन्होंने अपने खेत में पिपरमेंट लगाना शुरू किया, ऐसी फसल जिसे नीलगाय छूती तक नहीं, और आज यही फैसला उनकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन गया है।

नीलगाय से बचाव के साथ मुनाफे का जरिया

जिन किसानों के खेत नीलगाय के हमलों से बार-बार बर्बाद होते हैं, उनके लिए ओमकार नाथ की यह पहल किसी उम्मीद से कम नहीं है। पिपरमेंट की खुशबू और उसका तीखापन नीलगाय को पसंद नहीं आता, इसलिए यह फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है। यही वजह है कि पलामू के बाकी किसान भी अब ओमकार नाथ के खेत की तरफ देखने लगे हैं और उनसे प्रेरणा लेकर एरोमैटिक फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं।

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लखनऊ से प्रशिक्षण, गांव में ही डिस्टिलेशन यूनिट

ओमकार नाथ यहीं नहीं रुके। उन्होंने पिपरमेंट का तेल निकालने के लिए अपने गांव में मशीन भी लगवा ली। इसके लिए उन्होंने लखनऊ स्थित सीएमएफ यानी सेंट्रल मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स संस्थान से बाकायदा प्रशिक्षण लिया और फिर गांव में डिस्टिलेशन यूनिट खड़ी की। अब इसी यूनिट की मदद से वे सिर्फ पिपरमेंट ही नहीं, बल्कि लेमन ग्रास, तुलसी, खस और दूसरी एरोमैटिक फसलों का तेल भी निकाल रहे हैं। इन फसलों से बनने वाले एसेंशियल तेल की बाजार में जबरदस्त मांग है और इसके दाम भी अच्छे मिलते हैं।

बहन के घर से लाया पौधा, अब बन गया व्यवसाय

इस खेती की जड़ें करीब 26 साल पुरानी हैं। ओमकार नाथ बताते हैं कि उनकी बहन बरेली में रहती हैं और उन्हीं के घर से वे पहली बार पिपरमेंट का पौधा लेकर आए थे। तब से यह पौधा उनके खेत का हिस्सा बना रहा, लेकिन इसे व्यावसायिक स्तर पर उगाना उन्होंने पिछले दो साल से ही शुरू किया है। शुरुआत में एक एकड़ में खेती पर उन्हें 15 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़े, लेकिन जो उपज और बाजार भाव मिला, वह उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा निकला। इसी सफलता के बाद अब वे अपनी खेती का रकबा और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

एक एकड़ से 80 से 90 लीटर तेल, लागत का तिगुना रिटर्न

ओमकार नाथ के मुताबिक, एक एकड़ में लगाई गई पिपरमेंट की फसल से करीब 80 से 90 लीटर तेल निकलता है। चूंकि उनके पास अपनी डिस्टिलेशन यूनिट है, इसलिए तेल निकलवाने के लिए उन्हें कहीं बाहर भटकना नहीं पड़ता। बाजार में पिपरमेंट तेल 800 से 1000 रुपये प्रति लीटर तक बिक जाता है। इस हिसाब से देखा जाए तो एक एकड़ से होने वाली कमाई लागत के मुकाबले करीब तीन गुना तक पहुंच जाती है, यानी किसान को हर तरह से फायदा ही फायदा है।

दूसरे किसानों के लिए बड़ा सबक

ओमकार नाथ का कहना है कि जिन इलाकों में नीलगाय लगातार फसलों को नुकसान पहुंचाती रहती है, वहां एरोमैटिक फसलों की खेती एक बेहतर और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है। कम लागत, कम जोखिम और अच्छी बाजार कीमत, इन तीन वजहों से यह खेती पलामू जैसे इलाकों के किसानों की आमदनी बढ़ाने का असरदार जरिया बन सकती है।

सवाल-जवाब

ओमकार नाथ कहां के किसान हैं?
वे झारखंड के पलामू जिले के पड़वा प्रखंड के किसान हैं।
पिपरमेंट की खेती नीलगाय की समस्या में कैसे मदद करती है?
नीलगाय पिपरमेंट की तीखी खुशबू के कारण इस फसल को नुकसान नहीं पहुंचाती, इसलिए यह पूरी तरह सुरक्षित रहती है।
उन्होंने प्रशिक्षण कहां से लिया?
उन्होंने लखनऊ स्थित सीएमएफ यानी सेंट्रल मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स संस्थान से प्रशिक्षण लिया।
एक एकड़ पिपरमेंट की खेती में लागत और मुनाफा कितना है?
शुरुआती लागत करीब 15 से 20 हजार रुपये आती है, जबकि एक एकड़ से करीब 80 से 90 लीटर तेल मिलता है, जिससे कमाई लागत के मुकाबले करीब तीन गुना तक पहुंच जाती है।
बाजार में पिपरमेंट तेल की कीमत क्या है?
बाजार में पिपरमेंट तेल 800 से 1000 रुपये प्रति लीटर तक बिकता है।
क्या वे सिर्फ पिपरमेंट का ही तेल निकालते हैं?
नहीं, अपनी डिस्टिलेशन यूनिट से वे लेमन ग्रास, तुलसी, खस और अन्य एरोमैटिक फसलों का भी तेल निकालते हैं।
उन्होंने पिपरमेंट का पौधा सबसे पहले कहां से लाया था?
करीब 26 साल पहले उन्होंने अपनी बहन के घर बरेली से पिपरमेंट का पहला पौधा लाकर लगाया था।
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