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रांची के किसान धनेश्वर की अनोखी मिसाल: 16 साल पहले लगाए आम-कटहल-सागवान के पेड़, आज घर बैठे रोज कमा रहे ₹1600सक्सेस स्टोरी
13 जून 2026, 1:26 am (46 दिन पहले)· 0

रांची के किसान धनेश्वर की अनोखी मिसाल: 16 साल पहले लगाए आम-कटहल-सागवान के पेड़, आज घर बैठे रोज कमा रहे ₹1600

रांची के किसान धनेश्वर ने 16 साल पहले फलदार और सागवान के पेड़ लगाए थे, जिनसे आज वे हर दिन करीब ₹1600 की कमाई कर रहे हैं और साथ ही प्राकृतिक छाया का लाभ भी उठा रहे हैं।

किसान धनेश्वर बताते हैं कि उन्होंने अपने खेत-आंगन में नींबू, मिर्ची, बांस और कई तरह के पेड़-पौधे लगाए थे, मगर सबसे अधिक आमदनी उन्हें कटहल, नींबू और आम की बिक्री से होती है। गर्मी के इस मौसम में उनकी रोजाना की कमाई ₹1500 तक पहुंच जाती है। उनके मुताबिक सबसे बड़ा लाभ यह रहा कि सागवान की लकड़ी का जो फर्नीचर बाजार में लाख रुपए से कम में नहीं मिलता, वह उन्होंने बिना एक रुपया खर्च किए मुफ्त में अपने पेड़ों से तैयार करवा लिया।

कटहल और आम से रोज़ की आमदनी

धनेश्वर के अनुसार इस समय वे हर दिन आराम से 20 किलो तक कटहल बेच देते हैं। बाजार में इसका भाव ₹50 तक रहता है, यानी अकेले कटहल से ही ₹1000 की कमाई हो जाती है। इसके अलावा उनके पास आम के पेड़ भी हैं, जिनसे वे रोजाना 20 किलो आम बेचते हैं। कच्चे आम का दाम ₹30 प्रति किलो तक मिल जाता है।

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आम की बिक्री से करीब ₹600 की आमदनी हो जाती है, ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हर दिन की कमाई यूं ही ₹1600 तक पहुंच जाती है। इतना ही नहीं, नींबू से भी आसानी से ₹100 निकल आते हैं और मिर्च तथा धनिया की तो बात ही अलग है। किसान का कहना है कि 16 साल पहले की गई उनकी मेहनत आज रंग ला रही है।

फलदार पेड़ क्यों ज़रूरी

यही वजह है कि वे अपने बच्चों को भी समझाते हैं कि पेड़ लगाओ तो ऐसा पेड़ लगाओ जो फलदार हो। आजकल के बच्चे शो प्लांट लगाने में रुचि रखते हैं, मगर उनका मानना है कि शो प्लांट से कोई फायदा नहीं होता, फलदार पेड़ ही लगाना चाहिए। इसकी एक खास वजह यह भी है कि फलदार पेड़ों में जमीन के भीतर पानी को संजोकर रखने की क्षमता काफी अधिक होती है।

इससे गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत भी महसूस नहीं होती। साथ ही ये सारे पेड़ उनके आंगन के लिए एक प्राकृतिक छतरी का काम करते हैं। उनके घर में कभी एसी या कूलर की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि इतने सारे पेड़ चारों ओर से उनके आंगन को घेरे हुए हैं।

इसी वजह से वे दोपहर के समय आंगन में आकर आराम से सो जाते हैं और उनके सामने एसी की ठंडक भी फीकी पड़ जाती है। धनेश्वर बताते हैं कि वे अब भी लगातार नए पेड़ लगा रहे हैं और हर साल आम, लीची और कटहल के 5 पेड़ जरूर लगाते हैं। वे आने वाली पीढ़ी से भी यही अपील करते हैं कि अपने घर-आंगन में खूब पेड़ लगाएं।

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