रांची की रहने वाली सीमा शर्मा ने महज 10,000 रुपये की शुरुआती पूंजी से कपड़ा कारोबार शुरू कर उसे केवल दो सालों में 8 से 10 लाख रुपये का व्यवसाय बना दिया है। एक साधारण गृहिणी के रूप में लंबे समय तक परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां संभालने वाली सीमा ने 46 साल की उम्र में अपने उद्यम की नींव रखी थी। आज 48 वर्ष की उम्र में वे जयपुरी मोडाल सिल्क फैब्रिक पर आधारित साड़ियों, सलवार सूट और विभिन्न परिधानों की डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग कर देशभर में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
पारिवारिक प्रोत्साहन से गृहिणी से उद्यमी बनने का निर्णय
सीमा शर्मा का शुरुआती जीवन पारिवारिक जिम्मेदारियों के इर्द-गिर्द बीत रहा था। वे घर और बच्चों की देखरेख में ही व्यस्त रहती थीं। हालांकि, जब उनके बच्चे बड़े हो गए, तो उनके पास खुद का कुछ नया शुरू करने का अवसर आया। इस मोड़ पर उनके सास-ससुर ने उन्हें प्रेरित करते हुए कहा कि घर पर खाली बैठने के बजाय बाहर निकलकर कुछ काम करना चाहिए।
पति के पूर्ण समर्थन और सास-ससुर की इस सीख ने सीमा के भीतर एक नया आत्मविश्वास जगाया। उन्होंने अपने घर से ही काम करने का फैसला लिया। जयपुरी फैब्रिक में गहरी समझ और रुचि होने के कारण उन्होंने इसी क्षेत्र को अपने व्यापार का आधार बनाया और 46 वर्ष की उम्र में अपनी नई पहचान बनाने की ओर पहला कदम बढ़ाया।
जयपुरी मोडाल सिल्क की हस्तकला और डिजाइनिंग की विशिष्टता
सीमा के व्यापार की सबसे बड़ी खासियत उनका उत्पाद और उसकी गुणवत्ता है। वे खुद राजस्थान के जयपुर जाती हैं और वहां अपनी देखरेख में परिधान तैयार करवाती हैं। वे साड़ियों, सलवार सूट और अन्य तरह के कपड़ों की डिजाइनिंग तथा मैन्युफैक्चरिंग खुद संभालती हैं। इसके लिए उन्होंने अपनी वर्कशॉप में कुशल कारीगरों को भी काम पर रखा है।
उनके बनाए उत्पादों में मुख्य रूप से हाथ का काम होता है। धागों की अलग-अलग बुनाई और फैब्रिक के अनोखे पैटर्न के कारण उनका कोई भी डिजाइन दोबारा दोहराया नहीं जाता। हर कपड़ा अपने आप में अलग और खास होता है। इसी विशिष्टता की वजह से एक बार उनसे कपड़ा खरीदने वाला ग्राहक उनका स्थायी ग्राहक बन जाता है।
10 हजार के बजट से 10 लाख का व्यापारिक विस्तार
सीमा शर्मा ने अपने इस व्यवसाय की शुरुआत बहुत ही छोटे स्तर पर मात्र 10,000 रुपये के साथ की थी। लेकिन उनकी लगन और ग्राहकों की बढ़ती मांग के कारण उनका काम तेजी से आगे बढ़ा। महज 2 वर्षों के भीतर ही उनके इस छोटे से प्रयास ने 8 से 10 लाख रुपये तक के कारोबार का रूप ले लिया।
48 साल की उम्र में मिली इस शानदार सफलता के बाद अब स्थिति यह है कि उन्हें एक दिन भी फुर्सत नहीं मिलती। उनके तैयार किए गए कपड़े अब सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जयपुर, कोलकाता, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत पूरे भारत के विभिन्न राज्यों में भेजे जा रहे हैं।
आर्थिक स्वतंत्रता और महिलाओं के लिए प्रेरणादायी संदेश
आज सीमा अपने दम पर खड़ी होकर न केवल अपने व्यक्तिगत सपनों और शौकों को पूरा कर रही हैं, बल्कि अपने परिवार को भी आर्थिक रूप से सहयोग दे रही हैं। आत्मनिर्भर बनने के बाद मिलने वाली इस अनुभूति को वे अपने जीवन का बेहद खास पल मानती हैं।
अन्य महिलाओं को प्रेरित करते हुए सीमा कहती हैं कि हर महिला को कोई न कोई काम जरूर करना चाहिए। काम की शुरुआत चाहे किसी भी स्तर से हो, लेकिन किसी को खाली नहीं बैठना चाहिए। सीमा का मानना है कि ईमानदारी और कड़ी मेहनत के साथ किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता और सफलता अवश्य दिलाता है।




















