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35 सेकंड में खुलेगा अपराधी का पूरा रिकॉर्ड, अमित शाह ने लॉन्च किया अभिज्ञान ऐपतकनीक
22 जून 2026, 11:29 am (38 दिन पहले)· 3

35 सेकंड में खुलेगा अपराधी का पूरा रिकॉर्ड, अमित शाह ने लॉन्च किया अभिज्ञान ऐप

केंद्र सरकार ने अभिज्ञान ऐप लॉन्च किया है जो पुलिस को सड़क पर ही फिंगरप्रिंट स्कैन के जरिए 35 सेकंड में किसी संदिग्ध का पूरा आपराधिक रिकॉर्ड दिखा सकता है। NCRB द्वारा बनाए गए इस ऐप में 1.3 करोड़ से ज्यादा फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।

भारतीय पुलिस को अब फील्ड में काम करते वक्त किसी संदिग्ध की पहचान के लिए थाने लौटने की जरूरत नहीं रहेगी। केंद्र सरकार ने अभिज्ञान ऐप लॉन्च किया है, जो मात्र 35 सेकंड में फिंगरप्रिंट के जरिए किसी भी व्यक्ति का पूरा आपराधिक रिकॉर्ड पुलिसकर्मी के स्मार्टफोन पर सामने रख देता है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऐप को लॉन्च किया, जिसे राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB ने तैयार किया है।

अभिज्ञान ऐप क्या है और यह काम कैसे करता है?

अभिज्ञान एक मोबाइल एप्लिकेशन है जो NAFIS यानी नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम से जुड़ा हुआ है। इस डेटाबेस में देशभर के 1.3 करोड़ से ज्यादा अपराधियों और संदिग्धों के फिंगरप्रिंट संग्रहित हैं। पुलिस अधिकारी सड़क पर किसी संदिग्ध को रोककर एक पोर्टेबल फिंगरप्रिंट स्कैनर से उसकी उंगली का निशान ले सकते हैं। स्कैनर को ऐप से जोड़ते ही 35 सेकंड के भीतर उस व्यक्ति के पुराने मामले, गिरफ्तारी का इतिहास और जेल रिकॉर्ड सब कुछ पुलिसकर्मी के मोबाइल पर आ जाता है।

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ऐप की खास सुविधाएं

अभिज्ञान कई अहम तकनीकी खूबियों के साथ आता है। यह रियल-टाइम में फिंगरप्रिंट से पहचान करता है और पूरी तरह मोबाइल आधारित होने की वजह से पुलिसकर्मी को थाने जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन का फीचर है जो बिना अनुमति के इस्तेमाल को रोकता है। NAFIS डेटाबेस से जुड़े होने के कारण ड्रग्स तस्करी, मानव तस्करी और दूसरे संगीन अपराधों से जुड़े रिकॉर्ड भी इस ऐप पर देखे जा सकते हैं।

1.3 करोड़ से बड़ा डेटाबेस

सरकार के मुताबिक NAFIS में अभी करीब 1.29 करोड़ फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड मौजूद हैं। इसके अलावा करीब 9.91 लाख नारकोटिक्स यानी नशे से जुड़े अपराधियों का डेटा भी सिस्टम में दर्ज है। 3.65 लाख मानव तस्करी के मामलों से संबंधित जानकारी भी यहां उपलब्ध है। जेलों से जुड़े विस्तृत रिकॉर्ड भी इस डेटाबेस का हिस्सा हैं। सरकार का कहना है कि यह विशाल डेटा भंडार भविष्य में अपराध जांच को और ज्यादा प्रभावी बनाएगा।

सिर्फ पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए

यह समझना जरूरी है कि अभिज्ञान ऐप आम नागरिकों के लिए नहीं है। यह सिर्फ पुलिस, CID और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के इस्तेमाल के लिए बनाया गया है। आम लोग इसे डाउनलोड नहीं कर सकते। इसका मकसद फील्ड स्तर पर पुलिसिंग को मजबूत करना है ताकि अपराधी सड़क पर ही पकड़े जाएं और जांच की प्रक्रिया तेज व सटीक हो।

स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में बड़ी छलांग

अभिज्ञान ऐप पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ अधिकारियों की सुरक्षा को भी बेहतर बनाता है क्योंकि अब वे मैदान में रहते हुए ही किसी संदिग्ध का खतरा आंक सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि यह तकनीक पूरे देश में प्रभावी तरीके से लागू हो, न्याय व्यवस्था मजबूत हो और क्राइम कंट्रोल में मदद मिले। इसे डिजिटल इंडिया और आधुनिक पुलिसिंग की दिशा में एक ठोस और जरूरी पहल माना जा रहा है।

सवाल-जवाब

अभिज्ञान ऐप किसने लॉन्च किया और इसे किसने बनाया?
इसे गृह मंत्री अमित शाह ने लॉन्च किया और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी NCRB ने इसे विकसित किया है।
यह ऐप किस डेटाबेस से जुड़ा है?
यह NAFIS यानी नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम से जुड़ा है, जिसमें करीब 1.29 करोड़ फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड मौजूद हैं।
फिंगरप्रिंट स्कैन के बाद आपराधिक रिकॉर्ड कितने समय में मिलता है?
स्कैन के बाद महज 35 सेकंड के भीतर संदिग्ध का पूरा आपराधिक इतिहास पुलिसकर्मी के मोबाइल पर आ जाता है।
क्या आम नागरिक अभिज्ञान ऐप डाउनलोड कर सकते हैं?
नहीं, यह ऐप केवल पुलिस, CID और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों के लिए है और आम लोग इसे डाउनलोड नहीं कर सकते।
NAFIS डेटाबेस में नारकोटिक्स और मानव तस्करी के कितने रिकॉर्ड हैं?
डेटाबेस में करीब 9.91 लाख नारकोटिक्स अपराधियों का डेटा और 3.65 लाख मानव तस्करी मामलों से जुड़ी जानकारी शामिल है।
इस ऐप में अनधिकृत उपयोग से बचने के लिए क्या व्यवस्था है?
इसमें टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन का फीचर है जो बिना अनुमति के ऐप का इस्तेमाल रोकता है।
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