गूगल अपने जेमिनी एआई प्लेटफॉर्म के तहत मिलने वाले अलग-अलग सब्सक्रिप्शन टियर्स की सुविधाओं को नए सिरे से तय कर रहा है. आगामी 9 अक्टूबर से लागू होने वाली इस व्यवस्था के तहत उन यूजर्स के विकल्पों में कटौती होगी जो बिना किसी शुल्क के इस सेवा का उपयोग कर रहे हैं. अब जेमिनी के फ्री टियर का इस्तेमाल करने वाले लोगों को केवल फ्लैश-लाइट मॉडल की पहुंच दी जाएगी, जबकि फ्लैश और प्रो मॉडल्स को इस मुफ्त श्रेणी से पूरी तरह बाहर किया जा रहा है. यह कदम कंपनी के उस प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत अलग-अलग स्तर के उपयोगकर्ताओं के लिए कंप्यूटेशनल संसाधनों का नया ढांचा तैयार किया जा रहा है.
एआई प्लस से भी हटेगा प्रो मॉडल का विकल्प
इस बदलाव की आंच केवल मुफ्त सेवा लेने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि भुगतान करने वाले ग्राहकों के एक वर्ग पर भी इसका सीधा असर दिखेगा. कंपनी के 4.99 डॉलर यानी करीब 500 रुपये प्रति महीने वाले एआई प्लस टियर के ग्राहकों के लिए भी सुविधाएं बदली जा रही हैं. इस योजना के तहत उपयोगकर्ताओं को अब आगे प्रो मॉडल की सुविधा नहीं दी जाएगी. हालांकि, एआई प्लस प्लान से जुड़े यूजर्स फ्लैश-लाइट और फ्लैश मॉडल्स का उपयोग पहले की तरह जारी रख सकेंगे. कंपनी ने एक अपडेटेड सपोर्ट डॉक्यूमेंट के जरिए जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि जिन भी ग्राहकों के खाते इससे प्रभावित होंगे, उन्हें ईमेल भेजकर तारीख और बदलाव की जानकारी दी जाएगी.
एआई प्रो और अल्ट्रा में बने रहेंगे सभी मॉडल्स, जुड़ा डीप थिंक
ऊपरी स्तर के महंगे प्लान्स का चयन करने वालों के लिए कंपनी ने सुविधाओं का दायरा मजबूत रखा है. एआई प्रो और एआई अल्ट्रा प्लान लेने वाले ग्राहकों को जेमिनी के फ्लैश-लाइट, फ्लैश और प्रो मॉडल्स का पूरा सेट बिना किसी रुकावट के मिलता रहेगा. इसके साथ ही गूगल 19.99 डॉलर यानी करीब 1,900 रुपये प्रति माह वाले एआई प्रो प्लान में डीप थिंक फीचर जोड़ने जा रहा है. यह एडवांस फीचर पहले केवल एआई अल्ट्रा प्लान तक ही सीमित रखा गया था, जो 99.99 डॉलर और 199.99 डॉलर वाले मौजूदा प्लान्स में उपलब्ध रहता आया है. डीप थिंक तकनीक जटिल और पेचीदा सवालों के समाधान के लिए पैरेलल रीजनिंग पद्धति का सहारा लेती है, जिसके संचालन के लिए प्रो मॉडल की कार्यक्षमता अनिवार्य होती है.
रिक्वेस्ट की जटिलता के आधार पर तय होगा यूसेज कोटा
सेवाओं में यह फेरबदल ऐसे दौर में सामने आया है जब गूगल जेमिनी के समग्र इस्तेमाल की गणना पूछे गए सवालों और रिक्वेस्ट की प्रकृति के अनुसार कर रहा है. इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि कोई यूजर ज्यादा जटिल सवाल पूछता है, लंबी बातचीत जारी रखता है या किसी बेहद आधुनिक मॉडल का उपयोग करता है, तो उसके तय यूसेज कोटे का बड़ा हिस्सा तेजी से खर्च हो सकता है. कंपनी रिसोर्स खपत और यूजर की मांग के बीच संतुलन बनाने के लिए खपत मापने की इस प्रक्रिया को अपना रही है.
थिंकिंग एफर्ट सेटिंग्स और आर्गन मॉडल की तैयारी
उपयोगकर्ताओं को अपनी रीजनिंग प्राथमिकताएं नियंत्रित करने की छूट देने के मकसद से गूगल जेमिनी ऐप के भीतर थिंकिंग एफर्ट के तीन अलग-अलग विकल्पों का परीक्षण भी कर रहा है. इनमें लो, मीडियम और हाई सेटिंग्स शामिल हो सकती हैं. इन सेटिंग्स का उपयोग करके यूजर्स खुद यह चुन सकेंगे कि जेमिनी किसी सवाल का जवाब तैयार करने में कितना विचार या रीजनिंग एफर्ट लगाए. हालांकि, ज्यादा रीजनिंग एफर्ट का चयन करने पर यूजर का यूसेज अलाउंस भी अधिक तेजी से खत्म हो सकता है. वर्तमान समय में जेमिनी के भीतर पेचीदा सवालों को हल करने के लिए एक्सटेंडेड थिंकिंग नाम का विकल्प पहले से मौजूद है.
इसके अलावा कंपनी जेमिनी 4 आर्गन को भी अगले चरण में ले जाने पर काम कर रही है. फेयरविंड प्रोग्राम के तहत कुछ चुनिंदा और भरोसेमंद साइबरसिक्योरिटी प्रोफेशनल्स के साथ इस मॉडल की टेस्टिंग की जा रही है. इस शुरुआती परीक्षण प्रक्रिया के पूरा होने के बाद इसे पेड एपीआई ग्राहकों और एआई अल्ट्रा सब्सक्राइबर्स के लिए जारी किया जा सकता है. हालांकि, कंपनी ने अभी यह स्थिति स्पष्ट नहीं की है कि आर्गन को एआई प्रो प्लान में जगह मिलेगी या फिर इसके लिए एआई अल्ट्रा से भी ऊपर का कोई बिल्कुल नया सब्सक्रिप्शन टियर पेश किया जाएगा.



















