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भारत और अमेरिका की रणनीतिक तकनीकी साझेदारी को धरातल पर उतारेगी निजी कंपनियांतकनीक
28 जून 2026, 4:49 am (45 दिन पहले)· 5

भारत और अमेरिका की रणनीतिक तकनीकी साझेदारी को धरातल पर उतारेगी निजी कंपनियां

विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत-अमेरिकी रणनीतिक योजनाओं को लागू करने के लिए निजी क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।

भारत और अमेरिका के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सेमीकंडक्टर से जुड़ी महत्वाकांक्षी योजनाओं को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण होगी। विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के नागराज नायडू ने यह बात उस समय कही जब दोनों देश रणनीतिक तकनीक के मोर्चे पर अपने द्विपक्षीय सहयोग का लगातार विस्तार कर रहे हैं। इस रणनीतिक साझेदारी के मुख्य फोकस क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं।

रणनीतिक तकनीकी साझेदारी की मजबूत नींव

के नागराज नायडू ने रेखांकित किया कि भारत और अमेरिका द्वारा हाल ही में उठाए गए नीतिगत कदम भविष्य में प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों के भीतर दीर्घकालिक सहयोग का आधार तैयार कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस साझेदारी की सफलता न केवल मजबूत नीतिगत फ्रेमवर्क बनाने पर निर्भर करती है बल्कि परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर भी टिकी है। उन्होंने आगे कहा कि जैसे-जैसे दोनों देशों के संबंध प्रगाढ़ हो रहे हैं, इन योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए निजी उद्योगों को इस पूरे अभियान के केंद्र में रखा गया है।

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यह अहम विषय एक गोलमेज बैठक के दौरान चर्चा के केंद्र में रहा जिसका शीर्षक "सिक्योरिंग द फाउंडेशन ऑफ एआई टुगेदर: यूएस-इंडिया कोऑपरेशन फ्रॉम मिनरल्स टू माइक्रोचिप्स" था। इस कार्यक्रम का आयोजन यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) द्वारा किया गया था। इस विचार-विमर्श में भारतीय दूतावास और सिल्वरैडो पॉलिसी एक्सीलरेटर ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

सिद्धांतों से परियोजनाओं की ओर बढ़ता कदम

बैठक में बोलते हुए अतिरिक्त सचिव के नागराज नायडू ने कहा कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने 21वीं सदी की जरूरतों के अनुकूल एक बेहद व्यापक रणनीतिक साझेदारी का ढांचा खड़ा किया है। उन्होंने बताया कि AI, क्वांटम तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज, उन्नत ऊर्जा और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए दोनों देश अब केवल नीतिगत सिद्धांतों से आगे बढ़कर ठोस परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इस पूरी व्यवस्था को व्यावहारिक रूप से सफल बनाने में निजी क्षेत्र का योगदान बेहद अनिवार्य होगा।

सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत की प्रगति

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस कृष्णन ने इस चर्चा के दौरान देश में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विकास की वर्तमान स्थिति को सामने रखा। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण आधार बहुत तेजी से विकसित हुआ है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश के भीतर ही सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों की स्थापना अब हकीकत रूप लेने के बेहद नजदीक पहुंच चुकी है।

एस कृष्णन ने बताया कि भारत तेजी से खुद को वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय और लचीले भागीदार के रूप में स्थापित कर रहा है। देश का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बहुत बड़े पैमाने पर विस्तृत हुआ है और हमारे राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन का अगला चरण इसी गति को और आगे बढ़ाने का काम करेगा। उन्होंने इस विनिर्माण विकास को भारत की अन्य बड़ी खूबियों जैसे मजबूत प्रतिभा पूल, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और AI क्षमताओं से जोड़ा, जो वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप समाधान तैयार करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

चिप से लेकर न्यूरल नेटवर्क तक का मजबूत तालमेल

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने दोनों देशों की पूरक शक्तियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग का यह अवसर केवल सेमीकंडक्टर चिप्स तक सीमित नहीं है बल्कि यह न्यूरल नेटवर्क तक फैला हुआ है। भारत का सेमीकंडक्टर, AI और क्वांटम तकनीकों में मिशन-आधारित दृष्टिकोण जब अमेरिका के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के साथ जुड़ता है, तो इससे सहयोग की अनंत संभावनाएं बनती हैं। दोनों देश मिलकर एक सुरक्षित तकनीकी ढांचा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का विकास कर सकते हैं।

यूएसआईएसपीएफ के अध्यक्ष और CEO मुकेश अघी ने इस बात पर जोर दिया कि माइक्रोचिप्स और महत्वपूर्ण खनिज आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय कर रहे हैं। ये दो ऐसे क्षेत्र हैं जो 21वीं सदी में तकनीकी नेतृत्व का निर्धारण करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकारें केवल सहायक नीतियां और नियम बना सकती हैं, लेकिन वास्तविक निवेश लाने, नई तकनीकों की खोज करने और परियोजनाओं को धरातल पर उतारने का पूरा जिम्मा निजी कंपनियों का ही होगा।

इस गोलमेज बैठक में अमेरिकी वाणिज्य विभाग के बिल गाइडेरा और अमेरिकी ऊर्जा विभाग के क्रिस्टोफर सल्डाना सहित कई अन्य महत्वपूर्ण हितधारकों ने भी हिस्सा लिया। बैठक के दौरान खनिजों, आवश्यक सामग्रियों, विनिर्माण और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं के बीच कड़ियों को मजबूत करने पर व्यावहारिक रणनीतियां साझा की गईं।

सवाल-जवाब

भारत-अमेरिका तकनीकी गोलमेज बैठक का मुख्य फोकस क्या था?
इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमीकंडक्टर विनिर्माण, क्वांटम तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों को सुरक्षित करने सहित प्रमुख रणनीतिक तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करना था।
इस साझेदारी में निजी क्षेत्र को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?
जहां सरकारें केवल नियामक और नीतिगत ढांचा तैयार करती हैं, वहीं इन परियोजनाओं में वास्तविक निवेश लाने, तकनीकी नवाचार करने और उन्हें धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी निजी कंपनियों की होती है।
इस द्विपक्षीय गोलमेज बैठक का आयोजन किसने किया था?
इस गोलमेज बैठक का आयोजन यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) द्वारा भारतीय दूतावास और सिल्वरैडो पॉलिसी एक्सीलरेटर के सहयोग से किया गया था।
भारत के सेमीकंडक्टर विनिर्माण की वर्तमान स्थिति क्या है?
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तेजी से बढ़ा है और सेमीकंडक्टर विनिर्माण अब वास्तविक रूप लेने के बेहद करीब है, जिसे गति देने के लिए देश के सेमीकंडक्टर मिशन का अगला चरण तैयार है।
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