डॉक्टरों द्वारा मरीज के गले का निरीक्षण करना चिकित्सा पद्धतियों का एक अति प्राचीन और बुनियादी हिस्सा रहा है। सदियों से शरीर का तापमान मापने और दिल की धड़कन सुनने की तरह ही गले की जांच भी शारीरिक परीक्षण का मुख्य स्तंभ मानी जाती है। हालांकि, गले के भीतर ग्रसनी में बनने वाले पैटर्न और लालिमा विभिन्न प्रकार के रोगाणुओं के अनुसार अलग-अलग होते हैं, जिससे वहां स्वास्थ्य से जुड़ी बहुत सी छिपी हुई जानकारी मौजूद रहती है। अब जापान की एक अभिनव मेडिकल टेक कंपनी आयरिस, जिसके प्रमुख पूर्व आपातकालीन चिकित्सक शो ओकुयामा हैं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीक की मदद से इस छिपी हुई जानकारी का विश्लेषण करके पारंपरिक जांच प्रणाली को पूरी तरह बदलने में जुट गई है।
पारंपरिक जांच की तकलीफ से मुक्ति और AI का नया तरीका
सामान्य तौर पर जब किसी मरीज में फ्लू या इन्फ्लूएंजा के लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर नाक के पिछले हिस्से में एक लंबी रुई की सलाई (स्वैब) डालकर नमूना इकट्ठा करते हैं। यह प्रक्रिया बेहद कष्टदायक और असहज करने वाली होती है। इसके अलावा, पारंपरिक परीक्षणों में सटीक परिणाम पाने के लिए लक्षणों के पूरी तरह उभरने का इंतजार भी करना पड़ता है। आयरिस द्वारा विकसित प्रणाली, जिसे नोडोका नाम दिया गया है, इस परेशानी को जड़ से खत्म करती है। नोडोका एक छोटे कैमरा-युक्त उपकरण के जरिए गले की ग्रसनी के चित्र लेता है। इसके बाद, मरीज के मेडिकल इंटरव्यू और अन्य उपलब्ध स्वास्थ्य डेटा के साथ इन तस्वीरों का AI से विश्लेषण किया जाता है। यह पूरा सिस्टम महज 10 सेकंड से कुछ अधिक समय में इन्फ्लूएंजा का सटीक आकलन पेश कर देता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से लक्षणों की शुरुआत के शुरुआती चरण में ही बीमारी की पहचान की जा सकती है।
सरकारी मंजूरी और अस्पतालों में व्यापक स्वीकार्यता
जापान के चिकित्सा क्षेत्र में नोडोका ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2022 में यह जापान में एक नए मेडिकल डिवाइस के रूप में स्वीकृति पाने वाला और राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा प्रणाली के तहत कवरेज प्राप्त करने वाला पहला AI-युक्त मेडिकल उपकरण बना। अपनी उपयोगिता और सटीकता के कारण इसे जापान भर के 2,000 से अधिक चिकित्सा संस्थानों में अपनाया जा चुका है। कंपनी ने अपनी तकनीक का विस्तार जारी रखा और अक्टूबर 2025 में इस उपकरण को कोविड-19 से जुड़े अतिरिक्त जांच कार्यों के लिए भी नियामक मंजूरी प्राप्त हो गई, जिससे अब यह एक से अधिक श्वसन संक्रमणों का निदान करने में सक्षम है।
दूरदराज के अनुभव से उपजा हार्डवेयर का विचार
नोडोका के विकास के पीछे इसके संस्थापक शो ओकुयामा का व्यावहारिक अनुभव रहा है। ओकुयामा एक पूर्व इमरजेंसी फिजिशियन हैं, जिन्होंने जापान के सुदूर द्वीपों पर भी चिकित्सा सेवाएं दी हैं। महज कुछ सौ निवासियों वाले एक छोटे से द्वीप पर काम करते समय उनके पास स्टेथोस्कोप के अलावा कोई आधुनिक जांच उपकरण उपलब्ध नहीं था। वहां उन्हें मरीजों का इलाज करने के लिए पूरी तरह से अपनी आंखों और कानों के अवलोकन पर निर्भर रहना पड़ता था। अधिकांश मेडिकल AI कंपनियां केवल सॉफ्टवेयर या डायग्नोस्टिक एल्गोरिदम बनाने पर ध्यान केंद्रित करती हैं। लेकिन ओकुयामा का मानना था कि असली अंतर डेटा जुटाने और सेंसिंग तकनीक में निहित है। उन्होंने कहा, "जब लोग मेडिकल AI सुनते हैं, तो वे डायग्नोसिस वाले हिस्से के बारे में सोचते हैं, लेकिन असली अंतर सेंसिंग में है कि डेटा कैसे प्राप्त किया जाता है।" इसी सोच के तहत उन्होंने अपनी कंपनी के लिए खुद का विशेष हार्डवेयर तैयार किया और गले के चित्रों का विश्लेषण करने वाले उस क्षेत्र में कदम रखा, जिसे पहले किसी ने नहीं छुआ था।
डेटा की कमी को चुनौती मानकर बनाया मजबूत नेटवर्क
जब 2017 में आयरिस कंपनी की स्थापना हुई थी, तब गले के आंतरिक चित्रों का विश्लेषण करने के लिए AI के पास कोई पूर्व निर्मित प्रशिक्षण डेटा उपलब्ध नहीं था। ओकुयामा ने इस बड़ी चुनौती का सामना करने के लिए लगभग 100 चिकित्सा संस्थानों को विशेष कैमरे दिए। मरीजों की सहमति से अगले तीन वर्षों के दौरान लगातार डेटा एकत्र किया गया। हार्डवेयर निर्माण, प्रशिक्षण डेटा का संग्रह और AI द्वारा सटीक निदान की संभावना जैसी तीन बड़ी अनिश्चितताओं को पार करते हुए कंपनी ने इसे व्यावहारिक रूप से लागू करने का रास्ता साफ किया। नोडोका के व्यावसायिक रूप से बाजार में आने के बाद इसकी कार्यप्रणाली में तेजी से सुधार हुआ। नैदानिक अभ्यास में उपयोग किए जाने पर अनाम संसाधित डेटा लगातार एकत्र होता रहता है। लॉन्च से पहले जिन गले की तस्वीरों की संख्या कुछ लाख थी, वह अब बढ़कर कई मिलियन तक पहुंच चुकी है। डेटा का यह विशाल नेटवर्क प्रतिस्पर्धियों के लिए बाजार में प्रवेश की एक बड़ी बाधा बन गया है, यही वजह है कि इस क्षेत्र में अब तक कोई अन्य प्रतिद्वंद्वी सामने नहीं आ पाया है।
भविष्य का खाका: जीवनशैली की बीमारियों की पहचान और वैश्विक विस्तार
नोडोका की क्षमता केवल संक्रामक रोगों तक सीमित नहीं है। गले की श्लेष्मा झिल्ली और रक्त वाहिकाओं में कई तरह के शारीरिक बदलाव दर्ज होते हैं। आयरिस की शोध टीम अब इस AI को इस तरह प्रशिक्षित कर रही है कि यह गले के आंतरिक पैटर्न में बदलाव देखकर डायबिटीज (मधुमेह) और हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगा सके। ओकुयामा का अनुमान है कि आने वाले 10 वर्षों में एक ऐसा दौर आएगा जब गले की सिर्फ एक फोटो से व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण किए जा सकेंगे। AI के काम करने की लागत बेहद कम होने के कारण परीक्षणों की संख्या बढ़ाने पर भी कुल खर्च में शायद ही कोई बदलाव आएगा। इसके साथ ही, वह पूरे हेल्थकेयर सिस्टम को AI के जरिए पुनर्गठित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिसमें AI इंटरव्यू से लेकर प्राथमिक चिकित्सकों और विशेषज्ञ अस्पतालों तक हर स्तर पर तकनीक को जोड़ा जा सके। मानव शरीर की श्लेष्मा झिल्ली की संरचना दुनिया भर में समान होने के कारण जापान में एकत्र डेटा को अन्य देशों में भी लागू किया जा सकता है। इसके लिए अमेरिका में क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी चल रही है।


















