हादसे, गंभीर बीमारी अथवा जन्मजात कारणों से शरीर का कोई अंग गंवा चुके लोगों के लिए दैनिक कामकाज निपटाना एक कठिन चुनौती बन जाता है। शारीरिक सीमाओं के साथ-साथ यह स्थिति व्यक्ति को मानसिक स्तर पर भी गहरे तनाव में डाल देती है। ऐसी मुश्किलों से जूझ रहे लोगों को आत्मनिर्भर बनाने और उनका आत्मविश्वास बहाल करने के लिए आधुनिक बायो-मैकेनिकल तकनीक बेहद असरदार साबित हो रही है। सिकंदराबाद के वेस्ट मार्रेडपल्ली स्थित सरस्वती कॉलोनी में संचालित एब्सोल्यूट प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स केंद्र उन्नत कृत्रिम अंगों के जरिए प्रभावित लोगों की जिंदगी को दोबारा सामान्य पटरी पर लाने का काम कर रहा है।
उन्नत बायो-मैकेनिकल तकनीक से तैयार होते हैं प्राकृतिक रूप वाले अंग
इस केंद्र पर आधुनिक मेडिकल इंजीनियरिंग की मदद से उच्च गुणवत्ता वाले कृत्रिम हाथ, पैर और उंगलियां बनाई जा रही हैं। इसके अलावा चेहरे की बनावट से जुड़े जरूरी अंग जैसे कृत्रिम कान और नाक भी तैयार किए जाते हैं। इन प्रोस्थेटिक्स उत्पादों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे बनावट और रंग-रूप में बिल्कुल प्राकृतिक अंगों जैसे दिखाई देते हैं। दिखने में वास्तविक लगने के साथ-साथ ये कृत्रिम अंग व्यक्ति की शारीरिक गतिशीलता को प्रभावी तरीके से दुरुस्त करते हैं, जिससे प्रभावित लोग बिना किसी बाहरी मदद के अपनी दैनिक गतिविधियां पूरी कर पाते हैं और उनका आत्मसम्मान लौट आता है।
घर-घर जाकर नाप लेने की विशेष होम-विजिट व्यवस्था
आमतौर पर गंभीर रूप से दिव्यांग लोगों, सर्जरी के बाद उबर रहे मरीजों या बुजुर्गों के लिए बार-बार क्लीनिक अथवा अस्पताल के चक्कर काटना शारीरिक रूप से अत्यंत कष्टदायक होता है। मरीजों की इसी आवागमन की परेशानी को खत्म करने के लिए इस केंद्र ने होम-विजिट की अनूठी पहल शुरू की है। इसके तहत तकनीकी विशेषज्ञों की टीम सीधे मरीज के आवास पर पहुंचती है। विशेषज्ञ घर पर ही मरीज की शारीरिक स्थिति का सूक्ष्म परीक्षण करते हैं और कृत्रिम अंग के निर्माण के लिए जरूरी सटीक नाप दर्ज करते हैं, जिससे मरीज को बिना किसी भागदौड़ के जरूरी चिकित्सकीय सुविधा मिल जाती है।
किफायती लागत में फिटिंग और प्रशिक्षण का पूरा सहयोग
व्यावसायिक बाजार में आधुनिक तकनीक वाले कृत्रिम अंगों की कीमतें अक्सर इतनी अधिक होती हैं कि सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए उन्हें खरीद पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इस आर्थिक बाधा को दूर करने के लिए संस्थान बाजार की प्रचलित दरों के मुकाबले काफी कम और उचित खर्च पर आर्टिफिशल अंग व ऑर्थोटिक सपोर्ट मुहैया करा रहा है। केंद्र केवल अंग तैयार करके देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि प्रारंभिक नाप से लेकर अंग की सटीक फिटिंग और उसके बाद मरीज को उसके साथ चलने-फिरने या काम करने का अभ्यास कराने तक लगातार तकनीकी मार्गदर्शन देता है।



















