अमेरिकी रोजगार बाजार के ताजा आंकड़ों के बाद सोने की कीमतों में देखने को मिला उछाल ज्यादा देर टिक नहीं सका। लंबी अवधि की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती बने रहने और अमेरिकी डॉलर के उच्च स्तरों पर टिके रहने से पीली धातु पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं में कमी आने से सोने की गिरावट कुछ हद तक थमी है, लेकिन बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि केवल दर वृद्धि के जोखिम में कमी आना किसी ठोस और टिकाऊ तेजी के लिए पर्याप्त नहीं है। एक मजबूत सुधार के लिए लंबी अवधि की और वास्तविक यील्ड में साफ और निरंतर गिरावट के साथ-साथ कच्चे तेल से जुड़ी महंगाई की चिंताओं का शांत होना बेहद जरूरी है।
बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स का दबाव
अमेरिकी लेबर रिपोर्ट के कमजोर रहने के बावजूद बुलियन बाजार अपनी बढ़त बरकरार रखने में नाकाम रहा। ओसीबीसी के क्रिस्टोफर वोंग के अनुसार, लंबी अवधि की यील्ड में कोई टिकाऊ गिरावट नहीं आई और अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत बना रहा, जिससे सोने में खरीदारी का सिलसिला आगे नहीं बढ़ सका। बाजार प्रतिभागी अब यह मान रहे हैं कि जब तक अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में स्पष्ट रूप से नरमी नहीं आती, तब तक सोने की कीमतों के लिए ऊपरी दायरा सीमित ही रहेगा। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों के चलते बनी महंगाई की चिंताएं भी बॉन्ड यील्ड को ऊपर बनाए रखने में भूमिका निभा रही हैं।
दैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेत और मुख्य स्तर
दैनिक तकनीकी चार्ट पर सोने में हल्का मंदी का रुझान अभी भी बना हुआ है और रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई है। चार्ट पर मूविंग एवरेज में आ रहा संकुचन अक्सर किसी बड़े ब्रेकआउट से पहले देखा जाता है, लेकिन फिलहाल अल्पावधि में सोने के निचले स्तरों का परीक्षण करने का जोखिम बना हुआ है। यदि गिरावट बढ़ती है, तो सोने के लिए 4110 डॉलर, 4030 डॉलर और पिछले निचले स्तर 3944 डॉलर पर अहम सपोर्ट मौजूद है। वहीं मंदी के दबाव को पूरी तरह बेअसर करने के लिए सोने को 21, 50 और 100 डीएमए के दायरे यानी 4280 डॉलर से 4330 डॉलर के ऊपर निकलना होगा। ऊपरी स्तरों पर 4300 डॉलर से 4350 डॉलर और उसके बाद 4460 डॉलर के स्तर पर कड़ा रेजिस्टेंस देखा जा रहा है।
लाइव मार्केट डेटा और तकनीकी परिदृश्य
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, सोने का भाव 4,194 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 4,162 डॉलर के बंद भाव के मुकाबले 0.76 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। 52 हफ्तों के दौरान सोने का दायरा 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है, जबकि मौजूदा कारोबारी वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.25 गुना दर्ज किया गया है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय RSI 38 पर है, जबकि MACD -64.30 पर है जो -43.76 के सिग्नल लाइन से नीचे रहकर मंदी का संकेत दे रहा है। 20-दिवसीय ईएमए 4,298 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 4,340 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 4,442 डॉलर पर है, जहां 50-दिवसीय ईएमए के 200-दिवसीय ईएमए से नीचे फिसलने से डेथ क्रॉस बना हुआ है। इसके अलावा 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड्स 4,123 डॉलर से 4,518 डॉलर के बीच हैं। दिन के लिए पिवट स्तर 4,182 डॉलर पर स्थित है, जिसके लिए पहला रेजिस्टेंस R1 4,211 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस R2 4,228 डॉलर है, जबकि पहला सपोर्ट S1 4,165 डॉलर और दूसरा सपोर्ट S2 4,135 डॉलर पर बना हुआ है।
वैश्विक मुद्राओं और डिजिटल परिसंपत्तियों का हाल
सोने के दायरे में बने रहने के साथ-साथ मुद्रा बाजार में भी व्यापक हलचल देखने को मिल रही है। यूरोप और एशिया के कारोबारी सत्रों के दौरान अमेरिकी डॉलर अप्रैल 2025 के बाद के अपने नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिससे प्रमुख मुद्रा जोड़ियों पर गहरा असर पड़ा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर यानी AUD/USD में नए सिरे से बिकवाली देखी गई और यह लेट एशियाई सत्र में गिरकर 0.6900 के करीब आ गया। इस गिरावट के पीछे पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें प्रमुख कारक हैं। वहीं USD/JPY ने अपनी पिछली गिरावट की भरपाई करते हुए 158.00 का स्तर दोबारा हासिल कर लिया, हालांकि बैंक ऑफ जापान की संभावित सख्ती और मुद्रा हस्तक्षेप का जोखिम इसकी बढ़त को सीमित कर सकता है।
यूरोपीय मुद्रा EUR/USD भी मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। यह जोड़ी बुधवार को 1.1312 के स्तर तक फिसल गई, जो जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। डॉलर की मजबूती और ऊर्जा की ऊंची कीमतों से यूरोप की अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान ने इस गिरावट को तेज किया है। दूसरी तरफ डिजिटल एसेट बाजार में बीएनबी यानी BNB, जिसे पहले बिनांस कॉइन के नाम से जाना जाता था, लगातार तीन हफ्तों की बढ़त के बाद सोमवार को 790 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा। डेरिवेटिव्स बाजार में ओपन इंटरेस्ट में बढ़ोतरी और पॉजिटिव फंडिंग रेट्स यह दर्शा रहे हैं कि वहां तेजी की स्थितियां मजबूत बनी हुई हैं।
















