हवाई यात्रियों की जेब पर एक बार फिर अतिरिक्त बोझ पड़ने जा रहा है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने सोमवार को घोषणा की कि वह अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने जा रही है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ की लगातार चढ़ती कीमतों के असर को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है। कंपनी की ओर से लागू किए जाने वाले यह संशोधित शुल्क 6 अक्टूबर से प्रभावी हो जाएंगे, जिसके चलते आने वाले दिनों में हवाई टिकटों के दाम बढ़ जाएंगे।
दूरी के आधार पर तय होगा अतिरिक्त किराया
विमानन कंपनी की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, घरेलू मार्गों पर फ्यूल सरचार्ज में की गई बढ़ोतरी दूरी के हिसाब से अलग-अलग होगी। घरेलू उड़ानों के लिए यह अतिरिक्त शुल्क 100 रुपये से लेकर 350 रुपये के बीच तय किया गया है। यात्रा जितनी लंबी होगी, सरचार्ज की राशि उसी अनुपात में अधिक वसूली जाएगी। इसके अलावा, एयरलाइन ने स्पष्ट किया है कि केवल घरेलू नेटवर्क ही नहीं, बल्कि विदेशी गंतव्यों के लिए संचालित होने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी फ्यूल सरचार्ज में इजाफा लागू किया गया है।
एविएशन टर्बाइन फ्यूल के दामों में भारी उछाल
इस फैसले की मुख्य वजह विमान ईंधन की लागत में आया तेज उछाल है। इंडिगो का कहना है कि फ्यूल की कीमतों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। हाल ही में महीने-दर-महीने के आधार पर एटीएफ के भाव में 14 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखने को मिली है। इस ताजा बढ़ोतरी ने जेट फ्यूल के खर्च को ऐसे स्तर पर पहुंचा दिया है, जो पिछले एक दशक में सबसे ऊंचे स्तरों में गिना जा रहा है।
एयरलाइन के परिचालन खर्च पर सीधा असर
विमानन उद्योग की लागत संरचना में एटीएफ का हिस्सा बेहद महत्वपूर्ण होता है। विमानन कंपनी ने अपने बयान में बताया कि किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल की हिस्सेदारी काफी बड़ी होती है। ऐसे में जेट ईंधन के दामों में इस स्तर का उछाल एयरलाइंस की लागत संरचना और नेटवर्क अर्थशास्त्र को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाला है। इंडिगो ने कहा कि इस दबाव का असर उसके अपने परिचालन पर भी पड़ रहा है। इसी मौजूदा परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए एयरलाइन ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों श्रेणियों की उड़ानों पर अपने फ्यूल चार्ज को आंशिक रूप से पुनर्समायोजित किया है।
















