नोवाक जोकोविच ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उम्र महज एक संख्या है। ओगर-एलियासिम के खिलाफ पांच सेटों के थ्रिलर में जीत दर्ज कर उन्होंने शानदार तरीके से सेमीफाइनल में जगह बनाई है। यह गौर करने वाली बात है कि जो आप देख रहे हैं, वह सामान्य नहीं है। 39 साल की उम्र में अपने से 14 साल छोटे खिलाड़ी को ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फाइनल में पांच सेटों तक चले मुकाबले में हराना किसी चमत्कार से कम नहीं है।
मैदान पर अद्भुत सहनशक्ति
मैच के दौरान जोकोविच की फुर्ती देखते ही बनती थी। 5 घंटे और 15 मिनट की लंबी लड़ाई के बाद भी वे हर शॉट के पीछे पूरी ताकत के साथ भाग रहे थे। वे बेसलाइन पर तेजी से दौड़ते हुए नेट की तरफ जाकर ड्रॉप शॉट्स को वापस भेज रहे थे, और तो और 122 mph की रफ्तार से दूसरी सर्विस भी कर रहे थे। 24 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन और सर्वकालिक रिकॉर्ड के बेहद करीब खड़े जोकोविच उन लोगों को गलत साबित करने में माहिर हैं जो उनकी उम्र पर सवाल उठाते हैं।
सेंटर कोर्ट का ऐतिहासिक मुकाबला
सेंटर कोर्ट की दूधिया रोशनी में खेला गया यह मैच इतना रोमांचक था कि इसकी वजह से समाचार बुलेटिन के प्रसारण में भी देरी हुई। खचाखच भरे स्टेडियम में मौजूद दर्शक एक-एक पल का आनंद ले रहे थे। शुरुआत में दर्शकों का समर्थन ओगर-एलियासिम को मिला, लेकिन तीसरे सेट के बाद जोकोविच के प्रशंसकों ने उनका हौसला जोरदार तरीके से बढ़ाया। ब्रिटेन के डेविस कप कप्तान लियोन स्मिथ ने कहा कि इस उम्र में इस स्तर का टेनिस खेलना बिल्कुल भी सामान्य नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि जोकोविच ने अपने शरीर पर सालों तक जो मेहनत की है, वह वाकई में आश्चर्यजनक है और उन्हें हर सम्मान मिलना चाहिए।
चोट से जूझकर हासिल की जीत
मैच के बाद थके हुए लेकिन खुश नोवाक जोकोविच ने कहा कि उन्होंने यह मुकाबला अपने रैकेट और ढेर सारे जज्बे के साथ जीता है। हालांकि, उनका सफर आसान नहीं रहा। मैच के दौरान एक बैकहैंड शॉट के लिए फिसलने से उनकी बाईं पिंडली (calf) में खिंचाव आ गया, जिसके चलते उन्हें मेडिकल टाइमआउट की आवश्यकता पड़ी। पहले सेट के बाद उनकी मूवमेंट, खासकर सर्विस के समय काफी प्रभावित हुई, लेकिन विपक्षी खिलाड़ी की गलतियों का फायदा उठाकर उन्होंने पहला सेट अपने नाम किया। हालांकि, पांच घंटे बाद भी वे कोर्ट पर उसी गति और चुस्ती के साथ खेल रहे थे। टिम हेनमैन ने कहा कि जोकोविच का बड़े मौकों पर प्रदर्शन करना ही उनकी असली पहचान है।
नई पीढ़ी के लिए बड़ी चुनौती
आज के समय में जब टेनिस जगत रोजर फेडरर और राफेल नडाल के संन्यास के बाद खालीपन महसूस कर रहा है, जोकोविच का बने रहना खेल के लिए वरदान है। युवा सितारों जैसे यानिक सिनर और कार्लोस अल्कराज के उभरने के बावजूद, जोकोविच अभी भी मजबूती से टिके हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई ओपन में सिनर को हराया था और फाइनल में अल्कराज के खिलाफ भी कड़ा मुकाबला दिया था। अपनी उम्र के बावजूद वे युवाओं की ताकत और फुर्ती को मात देने का हुनर रखते हैं।
सेमीफाइनल की ओर कदम
मैच के बाद जोकोविच से जब उनके स्तर के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे खुद को लेकर ऊंचे मानक रखते हैं और काफी आत्म-आलोचक भी हैं। अब सवाल यह है कि सेमीफाइनल में यानिक सिनर के खिलाफ उनकी यह मेहनत कितनी कारगर साबित होगी। पिछले साल उन्हें चोटों के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था, लेकिन वे चारों ग्रैंड स्लैम के सेमीफाइनल में पहुंचने में कामयाब रहे। अब उन्हें रिकवरी के लिए दो दिन का समय मिलेगा, लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि वे टूर्नामेंट का सबसे लंबा मैच खेल चुके हैं, जबकि सिनर ने पिछले चार राउंड में एक भी सेट नहीं गंवाया है। जोकोविच ने कहा कि वे नहीं जानते कि कल क्या होगा, लेकिन वे कम से कम एक और कदम आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने इसे अपने लिए फाइनल जैसा ही एक बेहतरीन मैच करार दिया।











