इतिहास में अपना नाम सबसे ऊपर दर्ज कराने और अपने 25वें ग्रैंड स्लैम खिताब के सपने को पूरा करने के लिए नोवाक जोकोविच को विंबलडन के पहले ही दौर में कड़े संघर्ष से गुजरना पड़ा। उन्होंने विंबलडन के हरी घास वाले कोर्ट पर चीन के वू यिबिंग के खिलाफ चार सेटों तक चले एक बेहद रोमांचक मुकाबले में जीत हासिल कर अपने अभियान की शुरुआत की। 39 वर्षीय सर्बियाई खिलाड़ी पिछले साल के यूएस ओपन के बाद से ही ऑस्ट्रेलिया की दिग्गज मार्गरेट कोर्ट के 24 मेजर खिताबों के रिकॉर्ड की बराबरी पर टिके हुए हैं। अब वह इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़कर टेनिस इतिहास में एकल रूप से सबसे सफल खिलाड़ी बनने की राह पर हैं। सेंटर कोर्ट पर दर्शकों के भारी शोर-शराबे के बीच उन्होंने वू यिबिंग को 6-4, 5-7, 6-4, 6-4 से मात देकर विंबलडन के SW19 कोर्ट पर अपने पहले दौर के मुकाबलों में अजेय रहने का रिकॉर्ड कायम रखा है। यह उनके करियर में पहले दौर की लगातार 21वीं जीत है।
ऐतिहासिक 25वें खिताब की तलाश और सेंटर कोर्ट का रोमांच
फ्रेंच ओपन के तीसरे दौर में ब्राजील के युवा खिलाड़ी जोआओ फोन्सेका से मिली हार के बाद नोवाक जोकोविच पहली बार कोर्ट पर उतरे थे। लंबे समय बाद खेलने उतरे जोकोविच के लिए यह राह आसान नहीं थी। मैच के बाद उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि उनके लिए आज का दिन वास्तव में काफी चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने कहा कि वह इस जीत से खुश जरूर हैं लेकिन पूरी तरह से तरोताजा महसूस नहीं कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह मुकाबला उन्हें किसी भी तरह से पहले दौर के साधारण मैच जैसा नहीं लगा। बंद छत के नीचे खेले गए इस मुकाबले के दौरान जोकोविच के चेहरे पर कई बार तनाव, झुंझलाहट और कभी-कभी हंसी के भाव भी देखे गए। खेल के दौरान ही स्टैंड्स में एक प्रशंसक ने अपनी साथी को शादी का प्रस्ताव दिया, जिस पर जोकोविच ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें भी इस शादी का निमंत्रण मिलना चाहिए।
जोकोविच के इस जुझारू खेल को देखकर तीन बार के विंबलडन एकल चैंपियन जॉन मैकेनरॉ ने BBC TV पर उनकी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि जोकोविच खेल में जो ऊर्जा, तीव्रता, इच्छाशक्ति और प्यार लेकर आते हैं, उसका हर किसी को सम्मान करना चाहिए। मैकेनरॉ ने कहा कि उन्होंने जोकोविच को सैकड़ों बार खेलते देखा है, लेकिन आज भी उन्हें देखकर ऐसा लगता है जैसे इस खिलाड़ी में जीतने की भूख पहले जैसी ही बरकरार है।
चार सेटों का रोमांचक सफर और कोर्ट पर संघर्ष
मैच की शुरुआत में जोकोविच ने पहले ही गेम में वू यिबिंग की सर्विस तोड़कर अच्छी शुरुआत की और पहला सेट 6-4 से अपने नाम कर लिया। हालांकि, चीनी खिलाड़ी ने हार नहीं मानी और दूसरे सेट में जोकोविच को कड़ी टक्कर दी। वू यिबिंग ने सेट के अंत में 6-5 के स्कोर पर शानदार खेल दिखाते हुए जोकोविच की सर्विस ब्रेक की और दूसरा सेट 7-5 से जीतकर मैच को बराबरी पर ला खड़ा किया। तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच बेसलाइन से लंबी और थका देने वाली रैलियां देखने को मिलीं, जिससे जोकोविच की फिटनेस की कड़ी परीक्षा हुई।
जब वू यिबिंग विनर शॉट लगाते थे, तब जोकोविच कभी हताशा में अपने सपोर्ट स्टाफ की तरफ देखते तो कभी सिर हिलाते नजर आते थे। इसके बावजूद उन्होंने सेंटर कोर्ट के माहौल का पूरा आनंद लिया। जब उन्होंने चौथे सेट पॉइंट पर तीसरा सेट 6-4 से जीता, तो उन्होंने दर्शकों से और अधिक शोर मचाने की अपील की। चौथे सेट में सातवीं वरीयता प्राप्त जोकोविच के खेल में कुछ अनफोर्स्ड एरर्स देखने को मिले, लेकिन उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए कुल छह ब्रेक पॉइंट्स का सफलतापूर्वक बचाव किया। इसके बाद उन्होंने 4-4 के स्कोर पर वू यिबिंग की सर्विस ब्रेक की और कोर्ट पर 3 घंटे 12 मिनट के कड़े संघर्ष के बाद मुकाबला अपने नाम कर लिया।
मैच खत्म होने के बाद जोकोविच ने अपने प्रतिद्वंद्वी की सराहना करते हुए कहा कि वू यिबिंग ने उन पर बहुत दबाव डाला था। उन्होंने स्वीकार किया कि वू यिबिंग के रिटर्न सर्व, फोरहैंड और बैकहैंड के स्तर ने उन्हें पूरी तरह से हैरान कर दिया था और कई मौकों पर ऐसा लगा जैसे उनके खेल में कोई कमजोरी ही नहीं थी। जीत दर्ज करने के बाद जोकोविच ने अपनी बेटी को समर्पित करते हुए वायलिन बजाने के अंदाज में जश्न मनाया, जबकि वू यिबिंग भी दर्शकों की तालियों और उत्साहवर्धन के बीच कोर्ट से बाहर गए। अब दूसरे दौर में जोकोविच का मुकाबला ग्रीस के स्टेफानोस सितसिपास से होगा, जिन्हें वे 2021 के फ्रेंच ओपन और 2023 के ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में हरा चुके हैं।
खेल जगत की अन्य बड़ी हलचल
विंबलडन के इसी दौर में अन्य मैचों की बात करें तो डिफेंडिंग चैंपियन यानिक सिनर को भी पहले दौर में पांच सेटों तक चले कड़े मुकाबले में हार का डर सता रहा था, लेकिन उन्होंने अंततः जीत दर्ज की। वहीं जापान की स्टार खिलाड़ी नाओमी ओसाका ने विंबलडन कोर्ट पर पारंपरिक किमोनो पहनकर अपने देश जापान के प्रति सम्मान और प्यार प्रदर्शित किया। इसके अलावा खेल जगत में फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान भी बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहां जर्मनी, नीदरलैंड और जापान जैसी बड़ी टीमें टूर्नामेंट से बाहर हो गईं, जबकि पराग्वे, मोरक्को और ब्राजील ने अगले दौर में प्रवेश किया। मोरक्को ने पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड को मात दी, जबकि नागेल्समैन के मार्गदर्शन में खेल रही जर्मनी की टीम को एक बार फिर पेनल्टी पर हार का सामना करना पड़ा।













