टेनिस जगत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां एलेना रबाकिना ने अपने करियर में पहली बार विश्व रैंकिंग में नंबर वन का स्थान हासिल कर लिया है। इस मुकाम पर पहुंचते ही उन्होंने एरिना सबालेका के 99 सप्ताह के लंबे दबदबे को समाप्त कर दिया है। महिला टेनिस में हुए इस बड़े फेरबदल के बाद खेल पंडितों और प्रशंसकों के बीच इसकी तुलना मारिया शारापोवा से करने और दोनों खिलाड़ियों की कार्यशैली परखने का दौर शुरू हो गया है। साथ ही, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या इस शीर्ष पद पर रहने के लिए किसी खिलाड़ी का अधिक बहिर्मुखी होना जरूरी होता है या नहीं।
कोको गॉफ की शानदार सफलता और ऐतिहासिक सेमीफाइनल लाइनअप
इस बीच, कोको गॉफ ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए एक सेट से पिछड़ने के बाद वापसी की और रोमांचक अंदाज में जीत दर्ज कर सेमीफाइनल का टिकट कटाया। उनकी इस बेहतरीन जीत के साथ ही विंबलडन 2009 के बाद यह पहला मौका है जब किसी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के चारों शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी सेमीफाइनल में पहुंचने में कामयाब रहे हैं। मुकाबले के बाद कोको गॉफ ने मैदान पर मौजूद दर्शकों से बातचीत की और अपने इस सफर तथा अंतिम चार में जगह बनाने को लेकर प्रतिक्रिया दी।
देर रात तक चलने वाले मैचों पर गंभीर सवाल
टूर्नामेंट में चर्चा का एक और बड़ा केंद्र यूएस ओपन के इतिहास का सबसे देर से समाप्त होने वाला मुकाबला रहा, जिसमें बेन शेल्टन ने कार्लोस अल्काराज को मात दी। इस बेहद नाटकीय और रात के सत्र में खेले गए मुकाबले के बाद खिलाड़ियों के कल्याण और स्टेडियम में मैच देखने वाले प्रशंसकों के अनुभव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इतनी रात तक मैच खींचने से खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति पर पड़ने वाले असर और खेल के शेड्यूल में बदलाव की जरूरतों पर भी विचार किया जा रहा है, क्योंकि यह स्थिति न सिर्फ खिलाड़ियों बल्कि दर्शकों के लिए भी काफी कठिन साबित होती है।


















