सफर की तैयारी में बैग ठूंस-ठूंसकर भरने से पहले एक बार रेलवे के लगेज नियमों पर नजर डाल लेना फायदे का सौदा है। बाड़मेर में रेल यात्रियों को आगाह किया गया है कि तय वजन से ज्यादा और बिना बुकिंग का सामान लेकर डिब्बे में चढ़ना जेब पर भारी पड़ सकता है। ऐसी सूरत में अतिरिक्त शुल्क के अलावा लगेज दर का छह गुना तक जुर्माना ठोका जा सकता है, जो कई बार आपके टिकट से भी ज्यादा बैठ जाता है। इसीलिए बेहतर यही है कि जरूरत से ज्यादा सामान को सफर से पहले ही स्टेशन के लगेज कार्यालय में बुक करा लिया जाए।
भारतीय रेलवे ने यात्रियों से इन नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी के अनुसार हर यात्रा श्रेणी के लिए मुफ्त में सामान ले जाने की एक तय सीमा है। अगर कोई यात्री इस सीमा से ज्यादा वजन बिना बुकिंग के साथ ले जाते हुए पकड़ा गया, तो उस बढ़े हुए वजन पर लगेज दर का छह गुना तक शुल्क वसूला जाएगा।
किस श्रेणी में कितना सामान मुफ्त
त्रिपाठी के मुताबिक एसी प्रथम श्रेणी में यात्री 70 किलोग्राम तक सामान बिना किसी शुल्क के ले जा सकते हैं। एसी द्वितीय टियर और प्रथम श्रेणी में यह सीमा 50 किलोग्राम है, जबकि एसी तृतीय टियर तथा एसी चेयर कार में 40 किलोग्राम तक की छूट है। स्लीपर श्रेणी में भी 40 किलोग्राम और द्वितीय श्रेणी में 35 किलोग्राम तक का सामान मुफ्त में साथ ले जाया जा सकता है।
तय सीमा से ज्यादा हुआ तो क्या
नियमों में एक राहत की बात यह है कि अगर आपका अतिरिक्त सामान सिर्फ तय मार्जिनल अलाउंस के दायरे में है, तो उस पर लगेज दर का सिर्फ 1.5 गुना शुल्क लगेगा। लेकिन अधिकतम सीमा से ज्यादा वजन को यात्री डिब्बे में ले जाने की इजाजत बिल्कुल नहीं है। इतना भारी सामान सफर शुरू होने से पहले स्टेशन के लगेज कार्यालय में बुक कराना होगा और उसे ब्रेक वैन यानी लगेज वैन के जरिए भेजा जाएगा।
बड़े ट्रंक और बोरियां बर्थ पर नहीं
रेलवे ने यह भी दो टूक कहा है कि व्यापारिक या व्यावसायिक सामान, बड़े ट्रंक, बोरियां और कार्टन जैसी चीजें यात्री बर्थ पर ले जाना पूरी तरह मना है। ऐसे सामान की ब्रेक वैन में बुकिंग कराना अनिवार्य होगा। सीनियर डीसीएम हितेश यादव के अनुसार बड़े ट्रंक, बॉक्स, सूटकेस, व्यावसायिक सामान, बोरियां और कार्टन जैसे भारी-भरकम सामान को यात्री कोच में ले जाने पर रोक है, क्योंकि इससे बाकी यात्रियों को चढ़ने-उतरने में दिक्कत होती है और सुरक्षा पर भी असर पड़ता है।
एमएसटी वालों को भी नहीं मिलेगी छूट
खास बात यह है कि ये नियम एमएसटी यानी मासिक सीजन टिकट रखने वाले यात्रियों पर भी उतने ही सख्ती से लागू होंगे। एमएसटी होने का मतलब यह नहीं कि सामान की सीमा में कोई अतिरिक्त रियायत मिल जाएगी। रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को भी उसी वजन सीमा में रहना होगा जो आम टिकट धारकों के लिए तय है, वरना उन्हें भी जुर्माना भरना पड़ सकता है।



















