अगर आप विदेश घूमने या काम के सिलसिले में जाने का प्लान बना रहे हैं और वहां खुद गाड़ी चलाना चाहते हैं, तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या आपका भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस वहां काम आएगा। सच्चाई यह है कि हर देश के अपने अलग नियम हैं। कहीं आपका भारतीय लाइसेंस बिना किसी झंझट के चल जाता है, तो कहीं इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट यानी IDP जरूरी होता है, और कुछ देश ऐसे भी हैं जहां भारतीय लाइसेंस को बिल्कुल मान्यता नहीं मिलती। चलिए, देश दर देश समझते हैं कि कहां क्या नियम लागू होता है।
चीन और जापान में नहीं चलेगी दाल
भारत के पड़ोसी देश चीन में भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस के दम पर गाड़ी चलाने की इजाजत नहीं है। यहां तक कि सामान्य IDP भी वहां मान्य नहीं माना जाता। अगर आपको चीन में ड्राइविंग करनी है तो पहले वहां का अस्थायी लाइसेंस बनवाना पड़ेगा, उसके बाद ही आप स्टीयरिंग संभाल सकते हैं। जापान में भी यही कहानी है। वहां भारतीय लाइसेंस और आम IDP दोनों पर रोक है। जापान में खुद गाड़ी चलाने के लिए आपको एक खास सरकारी IDP बनवाना होता है, तभी आप वहां की सड़कों पर उतर सकते हैं।
अमेरिका और ब्रिटेन में मिलती है छूट
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका और ब्रिटेन में ट्रैफिक के नियम बेहद सख्त होने के बावजूद यहां भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाई जा सकती है। अमेरिका में इसके लिए आपके पास IDP होना जरूरी है, जबकि ब्रिटेन में आप सीधे अपने आम भारतीय लाइसेंस पर ही गाड़ी दौड़ा सकते हैं और किसी अतिरिक्त कागज की जरूरत नहीं पड़ती। हां, स्थानीय नियमों का पालन करना दोनों जगह अनिवार्य है। समय सीमा की बात करें तो अमेरिका में भारतीय लाइसेंस पर आप करीब 3 से 12 महीने तक गाड़ी चला सकते हैं, वहीं ब्रिटेन में भी यह अवधि एक साल तक की होती है।
कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के अपने कायदे
कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में भी भारतीय लाइसेंस चलता है, लेकिन शर्तों के साथ। कनाडा में लाइसेंस के साथ IDP रखना होता है और इसके सहारे आप 60 से 90 दिनों तक गाड़ी चला सकते हैं। ध्यान रहे कि कनाडा के अलग-अलग राज्यों में इस अवधि को लेकर नियम बदल सकते हैं। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया के कई राज्यों में भी लाइसेंस के साथ IDP जरूरी है और यहां ड्राइविंग की अवधि राज्य के हिसाब से 3 से 12 महीने तक हो सकती है।
जर्मनी और फ्रांस में भाषा का पेच
यूरोप के देशों में भी भारतीय लाइसेंस पर गाड़ी चलाने का रास्ता खुला है, बस कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं। जर्मनी में IDP अनिवार्य है और बेहतर यही रहेगा कि आपका लाइसेंस अंग्रेजी में हो या फिर IDP जर्मन भाषा में बना हो। इन दस्तावेजों के साथ आप जर्मनी में 6 महीने तक गाड़ी चला सकते हैं। फ्रांस का नियम थोड़ा अलग है, जहां भारतीय लाइसेंस पर 6 से 12 महीने तक ड्राइविंग की इजाजत मिलती है, लेकिन इसके लिए IDP के साथ-साथ फ्रेंच भाषा का होना जरूरी है।
बाकी यूरोपीय देशों का हाल
यूरोप के ज्यादातर मुल्कों में IDP के साथ भारतीय लाइसेंस पर गाड़ी चलाने की अनुमति मिल जाती है। इटली, स्पेन, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, आइसलैंड, पुर्तगाल और ग्रीस जैसे देशों में आप अधिकतम 6 से 12 महीने तक गाड़ी चला सकते हैं। हालांकि इन सभी जगहों पर IDP का होना अनिवार्य है और अधिकतर यूरोपीय देश लाइसेंस या IDP को तभी स्वीकार करते हैं जब वह अंग्रेजी भाषा में हो।
खाड़ी देशों में क्या हैं शर्तें
खाड़ी के देशों में भी भारतीय ड्राइविंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने की सुविधा मिलती है। संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब में भारतीय लाइसेंस के साथ IDP रखना जरूरी है। इसके अलावा इन देशों में गाड़ी चलाने की अवधि भी सीमित रहती है। अगर आपको यहां लंबे समय तक ड्राइविंग करनी है तो स्थानीय लाइसेंस बनवाना पड़ेगा। इसलिए बेहतर यही रहेगा कि इन देशों में जाने से पहले भारत से ही अपना IDP बनवाकर ले जाएं।
नेपाल और भूटान में सबसे आसान
भारत के पड़ोसी नेपाल और भूटान में ड्राइविंग को लेकर सबसे ज्यादा सहूलियत मिलती है। इन दोनों देशों में आज भी सामान्य भारतीय लाइसेंस पर ही गाड़ी चलाई जा सकती है और यहां IDP की भी जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि यह छूट सीमित समय के लिए ही होती है। अगर आप यहां लंबे अरसे तक गाड़ी चलाना चाहते हैं तो स्थानीय लाइसेंस या परमिट लेना जरूरी हो जाता है। कुल मिलाकर, विदेश निकलने से पहले अपने गंतव्य देश के नियम जान लेना और जरूरत के हिसाब से IDP साथ रखना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।



















