ट्रेन का सफर तभी सुकून भरा होता है जब हर यात्री अपनी तय सीट पर आराम से बैठ सके, और यही जिम्मेदारी टीटीई की होती है। लेकिन कई बार यही टीटीई परेशानी की जड़ बन जाता है। सोचिए, आप आरएसी टिकट लेकर चढ़े हैं और इंतजार कर रहे हैं कि कोई बर्थ खाली होते ही टीटीई आपको पूरी सीट दे देगा। मगर आपकी आंखों के सामने ही वह वो जगह किसी और को बेच देता है। या फिर मान लीजिए आपके नाम पूरी सीट अलॉट है, पर टीटीई किसी अनजान शख्स को लाकर आपके साथ बिठा देता है। थोड़ी देर की बात होती तो चलता, लेकिन वह धीरे धीरे पैर पसारता है और आधी सीट दबा लेता है। आप शिकायत करते हैं तो टीटीई उल्टा आपको ही एडजस्ट करने की नसीहत देकर चुप करा देता है। ऐसे में आखिर यात्री करे तो क्या करे।
अच्छी खबर यह है कि टीटीई की मनमानी के खिलाफ शिकायत का पूरा सिस्टम मौजूद है। अगर वह आपसे बदसलूकी करता है, अभद्रता पर उतर आता है या आपकी बात सुनने से साफ इनकार कर देता है, तो सबसे पहला कदम ट्रेन के गार्ड तक पहुंचना है।
गार्ड के पास दर्ज कराएं लिखित शिकायत
हर ट्रेन में एक गार्ड मौजूद रहता है और उसके पास एक कंप्लेंट रजिस्टर होता है। यही आपका शुरुआती और सबसे सीधा रास्ता है। गार्ड के पास जाकर पूरी घटना लिखित में दर्ज कराएं ताकि मामला रिकॉर्ड में आ जाए और उस पर आगे कार्रवाई हो सके।
शिकायत के वक्त ये जानकारी जरूर नोट करें
शिकायत लिखवाते समय कुछ बातें दर्ज करना बेहद जरूरी है, वरना बाद में मामला कमजोर पड़ सकता है। टीटीई का नाम, उसका बैज नंबर, ट्रेन नंबर, कोच नंबर, वक्त और स्टेशन का नाम, ये सारी जानकारी साथ रखें। अगर हालात सुरक्षित हों तो सबूत के तौर पर फोटो या वीडियो भी बना लें। यह दस्तावेज बाद में जांच के दौरान आपके पक्ष को मजबूत करते हैं।
मामला बिगड़ जाए तो सुरक्षा बल को बुलाएं
अगर बात इतने पर न बने और झगड़ा धक्का मुक्की या मारपीट तक पहुंच जाए, तो देर बिल्कुल न करें। ट्रेन में मौजूद रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF या सरकारी रेलवे पुलिस यानी GRP से तुरंत संपर्क करें। सुरक्षा से जुड़ी गंभीर स्थिति में यही लोग सबसे जल्दी मदद कर सकते हैं।
फोन और ऐप से भी हो सकती है शिकायत
रेलवे की चौबीसों घंटे चलने वाली हेल्पलाइन 139 पर आप कभी भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सुरक्षा से जुड़ी परेशानी के लिए 182 नंबर मौजूद है। वहीं ऑनलाइन शिकायत का सबसे आसान जरिया है रेल मदद ऐप या उसकी वेबसाइट। यहां अपना पीएनआर या ट्रेन की जानकारी भरकर स्टाफ बिहेवियर कैटेगरी में शिकायत डाली जा सकती है। इसमें फोटो और वीडियो अपलोड करने की सुविधा भी है और आप अपनी शिकायत की स्थिति भी ट्रैक कर सकते हैं। शिकायत मिलते ही रेलवे जांच शुरू करता है और टीटीई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। मतलब साफ है, यात्री के पास चुप रहने की कोई मजबूरी नहीं, हर स्तर पर सुनवाई का रास्ता खुला है।



















