राजस्थान के पाली जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा गोरम घाट, जिसे सैलानी प्यार से 'मिनी कश्मीर' कहते हैं, अब पहले जैसा बेरोकटोक नहीं रहेगा. ग्राम पंचायत काछबली और वन विभाग ने मिलकर तय किया है कि इस हरी-भरी वादी की खूबसूरती और पर्यावरण से अब कोई खिलवाड़ नहीं कर पाएगा, और इसके लिए बाकायदा सख्त नियम और भारी जुर्माना तय कर दिया गया है.
जंगल के भीतर अब क्या-क्या पूरी तरह बैन
नए आदेश के मुताबिक गोरम घाट के जंगल क्षेत्र में किसी भी तरह का नशा करना, मदिरा यानी शराब साथ ले जाना, मांस ले जाना और शोर-शराबा या हुड़दंग मचाना अब पूरी तरह गैर-कानूनी करार दे दिया गया है. जो भी पर्यटक इन नियमों की अनदेखी करते पकड़ा जाएगा, उसे 5,100 रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भरना होगा. सिर्फ जुर्माना ही नहीं, नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी, यानी मामला गंभीर होने पर जेल तक की नौबत आ सकती है.
बारिश के बाद भीड़ बढ़ी, तो बढ़ीं शिकायतें भी
दरअसल बारिश शुरू होते ही गोरम घाट में पर्यटकों का तांता लग जाता है. बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने पहुंचते हैं और इसी दौरान कई बार यहां अवैध गतिविधियां देखने को मिलती रही हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत और वन विभाग ने यह सख्त फैसला लिया है, ताकि न तो प्रकृति को कोई नुकसान पहुंचे और न ही यहां किसी तरह का हादसा हो. प्रशासन का मकसद साफ है, पर्यटन तो चलता रहे, लेकिन प्रकृति और अनुशासन की कीमत पर नहीं.
आखिर गोरम घाट में है क्या खास
गोरम घाट राजस्थान के सबसे खूबसूरत और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में गिना जाता है. इसे अरावली की पहाड़ियों का 'मिनी कश्मीर' यूं ही नहीं कहा जाता. चारों तरफ फैली हरी-भरी पहाड़ियां, कल-कल बहते प्राकृतिक झरने और यहां से गुजरती हेरिटेज ट्रेन, यही तीन चीजें इस जगह की असली पहचान हैं. पर्यटक यहां प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने आते हैं. ट्रैकिंग और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह जगह किसी वरदान से कम नहीं. झरनों का मनमोहक नजारा और यहां का शांत माहौल प्रकृति प्रेमियों को बार-बार यहां खींच लाता है.
संरक्षित और पवित्र क्षेत्र, जिम्मेदारी सबकी
गोरम घाट को एक संरक्षित और पवित्र प्राकृतिक क्षेत्र माना जाता है, इसलिए यहां स्वच्छता और अनुशासन बनाए रखना हर पर्यटक की जिम्मेदारी है. यहां शराब पीना, मांस या मांसाहारी भोजन करना और किसी भी तरह का अवैध काम करना पूरी तरह मना है. अगर कोई भी व्यक्ति प्राकृतिक स्थल को नुकसान पहुंचाते या नियम तोड़ते पकड़ा जाता है, तो उसे न सिर्फ 5,100 रुपये का जुर्माना भरना पड़ सकता है, बल्कि जेल भी जाना पड़ सकता है.
असामाजिक तत्वों पर आखिर क्यों कसनी पड़ी नकेल
बीते समय में गोरम घाट की प्राकृतिक सुंदरता और पवित्रता को कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा नुकसान पहुंचाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं. पर्यटन स्थल पर गंदगी फैलाना, शराब पीकर हुड़दंग मचाना और अव्यवस्था खड़ी करना जैसे मामले आम होते जा रहे थे. इसका खामियाजा सिर्फ पर्यावरण और स्थानीय वन्यजीवों को ही नहीं भुगतना पड़ रहा था, बल्कि परिवार के साथ घूमने आने वाले आम पर्यटकों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ती थी. यही वजह है कि इस बार प्रशासन और वन विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह फैसला लिया, ताकि इस खूबसूरत जगह का माहौल सुरक्षित और अनुशासित बना रहे.
मानसून में गोरम घाट का जादुई रूप
बारिश के मौसम में गोरम घाट का पूरा नजारा ही बदल जाता है और यह अपनी सुंदरता के चरम पर नजर आता है. मानसून की दस्तक के साथ ही पूरी अरावली श्रृंखला हरी चादर ओढ़ लेती है और पहाड़ियों से बहते झरने एक बार फिर जीवंत हो उठते हैं. चारों तरफ छाई धुंध, ठंडी हवाएं और इन्हीं हरी-भरी वादियों से गुजरती ट्रेन का नजारा किसी सपने जैसा महसूस होता है. बारिश के दिनों में यहां का मौसम बेहद सुहावना हो जाता है, यही वजह है कि इसे देखने और महसूस करने के लिए दूर-दूर से पर्यटक यहां खिंचे चले आते हैं.




















