सितंबर और अक्टूबर के महीनों में घूमने का प्लान बनाने वालों की तादाद अचानक बढ़ जाती है। मानसून की झमाझम बारिश धीरे-धीरे थमने लगती है, पहाड़ों और जंगलों की हरियाली अपने चरम पर नजर आती है और चिलचिलाती गर्मी की जगह ठंडी हवाएं चलने लगती हैं। यही सुहावना मौसम लोगों को वीकेंड ट्रिप से लेकर लंबी छुट्टियों की बुकिंग तक के लिए उकसाता है, लेकिन इस मौसम में घूमने जाने से पहले स्मार्ट पैकिंग करना उतना ही जरूरी है जितना डेस्टिनेशन चुनना।
मौसम पर आंख मूंदकर भरोसा करना भारी पड़ सकता है
पोस्ट-मॉनसून सीजन की सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि इस दौरान मौसम का कोई ठिकाना नहीं होता। किसी भी वक्त अचानक तेज बारिश शुरू हो सकती है, पहाड़ी इलाकों में तापमान चंद घंटों में काफी नीचे गिर सकता है और कई रास्ते अब भी गीले व फिसलन भरे रह जाते हैं। इसलिए ट्रिप पर निकलने से पहले सिर्फ जगह तय करना काफी नहीं, बैग में सही सामान रखना भी उतना ही अहम है।
बैग वॉटरप्रूफ हो या साथ रखें अच्छा कवर
पहाड़, जंगल या ऐसी किसी जगह जा रहे हैं जहां बारिश कभी भी दस्तक दे सकती है, तो बैकपैक वॉटरप्रूफ होना चाहिए या उस पर अच्छी क्वालिटी का कवर जरूर चढ़ा हो। कपड़ों के अलावा फोन, कैमरा, लैपटॉप, चार्जर जैसी चीजों और जरूरी कागजात को भी नमी से बचाना पड़ेगा, इसके लिए एक छोटा वॉटरप्रूफ पाउच बैग में रखना समझदारी भरा कदम है।
भारी जैकेट नहीं, हल्के कपड़ों की लेयरिंग चुनें
सितंबर के अंत और अक्टूबर में सुबह-शाम खासकर हिल स्टेशनों पर हल्की ठंडक महसूस होने लगती है। ऐसे में एक भारी-भरकम जैकेट ढोने के बजाय टी-शर्ट, फुल स्लीव टॉप, हल्की जैकेट, स्वेटर या शॉल जैसी कई परतों वाले कपड़े साथ रखना बेहतर रहता है, ताकि दिन में गर्मी और रात में ठंडक, दोनों के हिसाब से कपड़े कम या ज्यादा किए जा सकें।
फुटवियर की ग्रिप देखें, एक्स्ट्रा मोजे भी रखें
बारिश थम जाने के बाद भी कई रास्तों और पगडंडियों पर मिट्टी-कीचड़ बना रहता है। ट्रेकिंग या नेचर वॉक का इरादा है तो सिर्फ लुक देखकर नहीं बल्कि अच्छी ग्रिप वाले जूते चुनना जरूरी है। इसके साथ कम से कम एक-दो जोड़ी अतिरिक्त मोजे भी बैग में रखें, क्योंकि गीले मोजे पहनकर घंटों चलना पैरों के लिए तकलीफदेह साबित हो सकता है।
बेसिक फर्स्ट-एड किट भूलकर भी न छोड़ें
सफर के दौरान छोटी चोट लगने या अचानक तबीयत बिगड़ने पर हर जगह मेडिकल स्टोर मिल जाए, यह जरूरी नहीं। इसलिए बैंड-एड, एंटीसेप्टिक, ORS, अपनी नियमित दवाइयां और डॉक्टर की सलाह वाली जरूरी दवाइयां साथ रखना बेहतर है। सफर के दौरान बिना डॉक्टरी सलाह किसी नई दवा को आजमाने से बचना चाहिए।
सनस्क्रीन, मॉइश्चराइजर और पानी की बोतल साथ रखें
बारिश के बाद मौसम खुशनुमा लगते ही ज्यादातर लोग सनस्क्रीन लगाना बंद कर देते हैं, जबकि खुले आसमान के नीचे लंबे समय तक रहने पर UV एक्सपोजर तब भी बना रहता है। इसलिए यात्रा बैग में सन प्रोटेक्शन वाली क्रीम, लिप बाम और मॉइश्चराइजर जरूर शामिल करें और दिनभर शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पानी की बोतल साथ लेकर चलें।
पावर बैंक और वॉटरप्रूफ टॉर्च इमरजेंसी में संभालेंगे
सफर में मोबाइल सिर्फ फोटो खींचने के काम नहीं आता, बल्कि मैप देखने, टिकट दिखाने, होटल बुकिंग संभालने और इमरजेंसी में किसी को कॉल करने तक हर जगह उसकी जरूरत पड़ती है। इसलिए पावर बैंक और चार्जिंग केबल साथ रखना न भूलें। अगर आप किसी ऑफबीट या कम आबादी वाली जगह जा रहे हैं तो एक छोटी वॉटरप्रूफ टॉर्च भी बेहद काम आ सकती है।
निकलने से पहले मौसम का पूर्वानुमान जरूर देख लें
सामान पैक करने के अलावा रवाना होने से पहले उस इलाके का ताजा मौसम पूर्वानुमान और ट्रैवल एडवाइजरी चेक करना भी उतना ही जरूरी है, खासकर अगर मंजिल पहाड़ी इलाके में हो। भारी बारिश की आशंका, भूस्खलन या रास्ता बंद होने की सूचना मिले तो योजना में बदलाव करना ही समझदारी है। किसी जगह की खूबसूरत तस्वीर देखकर वहां का मौसम सुरक्षित मान लेना बड़ी भूल हो सकती है।
मच्छरों और नमी से बचाव की तैयारी भी रखें साथ
बारिश थमने के बाद कई इलाकों में मच्छरों की तादाद अचानक बढ़ जाती है, इसलिए मॉस्किटो रिपेलेंट क्रीम या स्प्रे बैग में जरूर रखें। इसके अलावा जल्दी सूखने वाले कपड़े चुनें और एक अलग प्लास्टिक या ड्राई बैग साथ रखें, जिसमें गीले कपड़ों को सूखे सामान से अलग रखा जा सके।
पोस्ट-मॉनसून ट्रिप का असली मजा तभी मिलता है जब हरियाली और सुहावने मौसम के साथ-साथ अचानक बदलते हालात के लिए भी तैयारी पूरी हो। ज्यादा सामान भरने के बजाय ऐसी चीजें साथ रखें जो बारिश, हल्की ठंड, फिसलन भरे रास्तों और अनिश्चित मौसम में असल में काम आएं। सही जूते, वॉटरप्रूफ कवर, हल्के गर्म कपड़े, फर्स्ट-एड किट, सनस्क्रीन और मौसम की सही जानकारी जैसी छोटी-छोटी तैयारियां सितंबर-अक्टूबर की ट्रिप को कहीं ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक बना सकती हैं।


















