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अचलगढ़ की पहाड़ी पर स्थित कुटिया में मीराबाई ने गुजारे थे 12 बरस, जानिए सिरोही के इस आध्यात्मिक केंद्र का रहस्ययात्रा
19 अक्तू॰ 2026, 6:47 am (9 दिन पहले)· 1

अचलगढ़ की पहाड़ी पर स्थित कुटिया में मीराबाई ने गुजारे थे 12 बरस, जानिए सिरोही के इस आध्यात्मिक केंद्र का रहस्य

राजस्थान के माउंट आबू में अचलगढ़ किले के पास स्थित एक साधारण झोपड़ी में भक्त शिरोमणि मीराबाई ने राजसी वैभव त्यागकर बारह वर्षों तक तपस्या की थी।

राजस्थान के इकलौते हिल स्टेशन माउंट आबू से लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित अचलगढ़ क्षेत्र सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि भक्ति कालीन इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय के लिए भी जाना जाता है। कृष्ण भक्ति की अप्रतिम साधिका मीराबाई का इस पावन पहाड़ी से गहरा आत्मिक जुड़ाव रहा है। यहां अचलगढ़ किले के नजदीक एक पहाड़ी पर आज भी वह झोपड़ी मौजूद है, जहां रहकर उन्होंने कई वर्षों तक प्रभु श्री कृष्ण की अनन्य भक्ति और कठोर तपस्या की थी।

राजसी ऐश्वर्य छोड़ चुनी थी एकांत कुटिया

इतिहास के पन्नों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मीराबाई ने इस एकांत स्थान पर पूरे बारह वर्षों तक साधना की थी। स्थानीय निवासी दिलीप भाई इस बारे में बताते हैं कि निकट ही मेवाड़ के प्रतापी शासक महाराणा कुम्भा का राजमहल मौजूद था। मीराबाई का वैवाहिक संबंध भी कुम्भा के पड़पोते से ही हुआ था। इतना वैभवशाली राजपरिवार होने और पास में ही महल की सुख सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद उन्होंने महलों की चकाचौंध को पूरी तरह ठुकरा दिया था। उन्होंने इस साधारण सी कुटिया में एकांतवास करते हुए प्रभु के चरणों में अपना जीवन समर्पित कर दिया। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण आज भी इस जगह को मीराबाई की झोपड़ी के नाम से पुकारा जाता है।

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सावन भादो कुंड और लोक परंपराओं में दर्द की गूंज

अचलगढ़ की इस पहाड़ी पर स्थित सावन भादो कुंड को लेकर भी एक बेहद भावुक लोककथा प्रचलित है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जब मीराबाई भगवान श्री कृष्ण के विरह में व्याकुल होकर अश्रु बहाती थीं, तो उनके उन्हीं आंसुओं से इस कुंड का स्वरूप बना था। सिरोही और अचलगढ़ की लोकसंस्कृति तथा मारवाड़ी लोकगीतों में मीराबाई की इस निष्काम तपस्या का सुंदर चित्रण मिलता है। ‘आंकड़े री झोपड़ी छोड़ो मीराबाई हो’ जैसे प्रसिद्ध लोकभजन आज भी क्षेत्र में गाए जाते हैं। ये भजन दर्शाते हैं कि कैसे एक रानी ने शाही ठाठ-बाट को त्यागकर वैराग्य और भक्ति का कांटों भरा रास्ता अपनाया था।

धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक धरोहर का अनूठा संगम

अचलगढ़ की यह झोपड़ी आज के दौर में न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए एक अहम पड़ाव है, बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी काफी बढ़ चुका है। वर्तमान समय में इस झोपड़ी के भीतर मीराबाई की एक प्रतिमा स्थापित की गई है, जहां श्रद्धालु श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। इस कुटिया के आसपास अचलगढ़ दुर्ग के प्राचीन अवशेष मौजूद हैं। साथ ही पास में मां चामुंडा माता और मां काली के ऐतिहासिक मंदिर भी स्थित हैं। देश के कोने-कोने से माउंट आबू आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इस पवित्र झोपड़ी के दर्शन करने अचलगढ़ की पहाड़ियों तक जरूर पहुंचते हैं।

सवाल-जवाब

मीराबाई की झोपड़ी माउंट आबू में कहां स्थित है?
यह झोपड़ी माउंट आबू से लगभग 7 किलोमीटर दूर अचलगढ़ क्षेत्र में पहाड़ी पर बने अचलगढ़ किले के पास स्थित है।
मीराबाई ने अचलगढ़ की इस कुटिया में कितने वर्ष बिताए थे?
स्थानीय मान्यताओं और इतिहास के अनुसार मीराबाई ने इस झोपड़ी में 12 वर्षों तक रहकर प्रभु श्री कृष्ण की भक्ति की थी।
सावन भादो कुंड को लेकर क्या लोकमान्यता है?
लोककथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण के विरह में मीराबाई द्वारा बहाए गए आंसुओं से सावन भादो कुंड का निर्माण हुआ था।
वर्तमान में इस झोपड़ी के अंदर क्या स्थापित है?
वर्तमान समय में इस ऐतिहासिक झोपड़ी के भीतर मीराबाई की प्रतिमा स्थापित है, जहां श्रद्धालु दर्शन करते हैं।
इस झोपड़ी के आसपास कौन से अन्य ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल मौजूद हैं?
इस स्थल के नजदीक अचलगढ़ किले के अवशेष, मां चामुंडा माता का मंदिर और मां काली का प्राचीन मंदिर स्थित हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

राजसी सुख छोड़कर ऐसी तपस्या करना सचमुच हैरान करता है। माउंट आबू घूमने जाऊं तो इस कुटिया के दर्शन जरूर करूंगा।

Rohan Gupta@rohan-gupta·9 दिन पहले

रविकेश जी, सही कहा आपने! राजसी ठाठ-बाट छोड़कर ऐसा एकांत अपनाना सचमुच हैरान करने वाला है। अगली बार माउंट आबू जाना हो तो अचलगढ़ की इस कुटिया तक ज़रूर जाइएगा।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·9 दिन पहले

बारह बरस तक किसी एक ही झोपड़ी में बिना राजसी सुखों के रहना थोड़ा मुश्किल सा लगता है, शायद बीच-बीच में वो अपने परिवार के पास भी जाती रही होंगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 दिन पहले

पूजा जी, बात तो आपकी ठीक है, लेकिन क्या वाकई वो इतने लंबे समय तक एकदम अकेली रहीं होंगी?

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