मुंबई के कांदिवली लिंक रोड क्षेत्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के दो समूहों के बीच भाषा की अनिवार्यता के मुद्दे पर भारी विवाद उत्पन्न हो गया। हिंदुस्तान नाका इलाके में हुई यह घटना महज आपसी कहासुनी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने मारपीट, गाड़ियों में तोड़फोड़ और सड़क जाम का हिंसक रूप ले लिया। इस घटना ने मुंबई शहर में भाषा, क्षेत्रीय पहचान और अस्मिता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को एक बार फिर से गर्मा दिया है।
हिंदुस्तान नाका पर तड़के हुआ विवाद और मारपीट
यह पूरा मामला सुबह तड़के उस समय शुरू हुआ जब मराठी भाषी ऑटो-रिक्शा चालक प्रकाश बंडू शेजवल अपनी गाड़ी में सवारियों को लेकर हिंदुस्तान नाका क्षेत्र से होकर गुजर रहे थे। इसी दौरान गैर-मराठी ऑटो चालकों के एक समूह ने शेजवल का रास्ता जबरन रोक लिया। प्रदर्शन कर रहे चालकों ने ऑटो हड़ताल और चक्का-जाम का हवाला देते हुए शेजवल को आगे जाने से मना किया। जब प्रकाश बंडू शेजवल ने सफाई देते हुए कहा कि वे स्वयं मराठी हैं और उन्हें इस तरह की किसी भी हड़ताल या बंद की कोई जानकारी नहीं थी, तो प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। बातचीत से शुरू हुआ यह संवाद जल्द ही तीखी बहस और हाथापाई में बदल गया।
उग्र भीड़ ने मराठी चालक प्रकाश बंडू शेजवल के साथ न केवल बदसलूकी और मारपीट की, बल्कि उनकी ऑटो-रिक्शा का वाइपर तोड़कर वाहन को भी नुकसान पहुंचाया। अचानक हुए इस हिंसक हमले में शेजवल के होंठ पर गंभीर चोट आई।
कांदिवली लिंक रोड पर 25 मिनट तक ठप रहा यातायात
मारपीट की घटना के तुरंत बाद गैर-मराठी ऑटो चालकों ने अपना विरोध जताने के लिए बीच सड़क पर अपनी गाड़ियां खड़ी कर दीं। इसके चलते कांदिवली लिंक रोड पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से रुक गई। लगभग 25 मिनट तक पूरा लिंक रोड जाम रहा, जिससे सुबह के समय दफ़्तर और अपने काम पर निकलने वाले आम यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और यातायात व्यवस्था चरमरा गई।
मनसे कार्यकर्ताओं की मौके पर कार्रवाई और पुलिस को सौंपा आरोपी
घटना की जानकारी फैलते ही महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ता तुरंत सक्रिय हो गए। मनसे के स्थानीय विभागप्रमुख दिनेश सालवी अपने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ तुरंत कांदिवली के हिंदुस्तान नाका पहुंचे। मनसे कार्यकर्ताओं ने घटनास्थल से ही मारपीट में कथित रूप से शामिल एक संदिग्ध ऑटो चालक को रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके पश्चात कार्यकर्ताओं ने आरोपी चालक को हिरासत में लेकर कांदिवली पुलिस स्टेशन पहुंचाया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाषा नियम पर दी सफाई
महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के निर्णय पर बढ़ते विवाद के बीच राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान सामने आया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य हिंदी भाषी चालकों को मराठी भाषा का विद्वान या साहित्यकार बनाना बिल्कुल नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल यह चाहती है कि चालकों के पास दैनिक कामकाज निपटाने और यात्रियों से बात करने लायक बुनियादी मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान होना चाहिए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह भी बताया कि चालकों को बुनियादी मराठी सीखने के लिए दी जाने वाली समय-सीमा को सरकार द्वारा अब तक तीन बार बढ़ाया जा चुका है। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि महायुति सरकार किसी भी नागरिक के साथ भाषा के आधार पर कोई अन्याय नहीं होने देगी और राज्य के हर वर्ग के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।



















