मानसून के इस सुहावने मौसम में अगर आप राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पुष्कर की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो आपके पास प्रकृति और आस्था के एक अनोखे संगम को करीब से देखने का बेहतरीन मौका है। पुष्कर से करीब 5 किलोमीटर दूर, कानस और होकरा गांवों के बीच अरावली की ऊंची पहाड़ियों पर बादर माता का एक प्राचीन मंदिर स्थित है। बारिश के दिनों में यह पूरा क्षेत्र हरी-भरी वादियों और कल-कल बहते प्राकृतिक झरनों से घिर जाता है, जो यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं का मन मोह लेता है।
1300 साल पुराना है मंदिर का इतिहास
इस धार्मिक स्थल के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह पावन धाम 1300 वर्ष से भी अधिक पुराना है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच यह अटूट विश्वास है कि जो भी भक्त यहां सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। यही वजह है कि साल के बारह महीने यहां लोगों का तांता लगा रहता है। हालांकि, मानसून आते ही इस पहाड़ी की सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है, जिससे इस दौरान यहां पहुंचने वाले सैलानियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाती है।
पवित्र कुंड के जल में है रोगों को ठीक करने की शक्ति
मंदिर के प्रांगण में एक बेहद पवित्र कुंड बना हुआ है, जिसका धार्मिक और औषधीय महत्व बहुत अधिक माना जाता है। इस कुंड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पूरे साल पानी भरा रहता है। भक्तगण इस जल को दिव्य और चमत्कारी मानते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस कुंड के पानी के उपयोग से त्वचा से जुड़ी बीमारियों समेत कई तरह की शारीरिक परेशानियों और व्याधियों से राहत मिलती है।
प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफर्स के लिए पसंदीदा जगह
बारिश के दिनों में बादर माता मंदिर की चढ़ाई का रास्ता पूरी तरह से हरियाली की चादर से ढक जाता है। पहाड़ियों से नीचे गिरते छोटे-छोटे पानी के सोते और पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाएं श्रद्धालुओं को मानसिक शांति और सुकून का अहसास कराती हैं। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण मंदिर परिसर से आसपास की पहाड़ियों और घाटियों का अद्भुत नजारा दिखाई देता है। यही कारण है कि प्रकृति प्रेमी और बेहतरीन तस्वीरें खींचने के शौकीन लोग इस मौसम में यहां आना नहीं भूलते।
बादर माता मंदिर कैसे पहुंचें
अगर आप इस ऐतिहासिक और सुंदर मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो यहां पहुंचना बेहद आसान है। यह जगह पुष्कर से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर है। पुष्कर के मुख्य बाजार और बस स्टैंड से मंदिर तक जाने के लिए पर्यटकों को आसानी से ई-रिक्शा और ऑटो मिल जाते हैं। इसके अलावा, जो लोग अपने निजी वाहनों या बाइक से आना चाहते हैं, उनके लिए भी सड़क मार्ग पूरी तरह से सुगम और आरामदायक है।




















