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उत्तराखंड के इस अनूठे गांव को क्यों कहा जाता है भारत का पहला गांव, जानिए इसकी हर खूबीयात्रा
9 सित॰ 2026, 1:00 am (49 दिन पहले)· 2

उत्तराखंड के इस अनूठे गांव को क्यों कहा जाता है भारत का पहला गांव, जानिए इसकी हर खूबी

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित माणा गांव कभी देश का आखिरी छोर माना जाता था, जिसे अब सरकार ने भारत के पहले गांव के तौर पर नई पहचान दी है।

भारत की गोद में कई ऐसे अनूठे स्थान बसे हैं जो अपनी बेमिसाल प्राकृतिक छटा और सांस्कृतिक विरासत के लिए दुनिया भर में पहचाने जाते हैं। ऐसा ही एक खास मुकाम उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है, जिसे माणा गांव के नाम से जाना जाता है। तिब्बत सीमा के बेहद करीब और समुद्र तल से करीब 3,200 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह इलाका बरसों तक देश के अंतिम छोर के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए था। लेकिन साल 2022 के बाद से इस जगह का रुतबा पूरी तरह बदल चुका है और इसे आधिकारिक तौर पर देश के पहले गांव का गौरव हासिल हुआ है। तब से लेकर आज तक सैलानियों के बीच इस ठंडी वादी की लोकप्रियता तेजी से आसमान छू रही है।

चारों तरफ विशाल पर्वतों की श्रृंखलाओं से घिरा यह पर्वतीय क्षेत्र अपनी अद्भुत सुंदरता से किसी का भी मन मोह लेता है। यहां की बर्फ से ढकी चोटियां, पत्थरों से तराशे गए पुराने मकान और चारों तरफ पसरा हुआ सन्नाटा पर्यटकों को बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित करता है। इस क्षेत्र के आसपास कलकल करती अलकनंदा और पौराणिक सरस्वती नदियों के उद्गम व बहाव से जुड़े कई अद्भुत प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं। अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां का तापमान साल भर काफी कम रहता है और शीतकाल के दौरान यहां भयंकर बर्फबारी दर्ज की जाती है, जो इस इलाके को और भी ज्यादा मनमोहक बना देती है।

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क्यों कहा जाता था आखिरी गांव

इस बसावट की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि यह भारत और तिब्बत की सीमा के बिल्कुल नजदीक स्थित है। इसी सामरिक और भौगोलिक परिस्थिति के चलते दशकों तक इसे देश के आखिरी छोर के रूप में पुकारा जाता था। हालांकि देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास को बढ़ावा देने और वहां पर्यटन को गति देने की सरकारी नीति के तहत इस परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया। नीति निर्माताओं ने सीमा से लगे इस आखिरी मुकाम को राष्ट्र के प्रथम गांव के रूप में प्रमोट करना शुरू किया। इस रणनीतिक बदलाव ने इस जगह की पूरी तस्वीर बदलकर रख दी और अब यह महज एक सीमा चौकी न रहकर देश के नक्शे पर एक लोकप्रिय और प्रमुख पर्यटन केंद्र बन चुका है।

पौराणिक कथाओं से गहरा नाता

यह পাহাড়ি बस्ती केवल अपनी भौगोलिक स्थिति के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि इसका प्राचीन कथाओं से भी बहुत गहरा ताल्लुक रहा है। ऐसा माना जाता है कि महाभारत काल के दौरान पांडवों ने स्वर्ग की ओर अपनी अंतिम यात्रा यानी स्वर्गारोहण के समय इसी भूभाग से होकर प्रस्थान किया था। इसके अलावा यहां का प्रसिद्ध भीम पुल भी खासी आस्था का केंद्र है। लोक मान्यताओं के अनुसार इस स्थान पर पांडव पुत्र भीम ने उफनती सरस्वती नदी को पार करने के मकसद से एक बहुत भारी चट्टान को उठाकर उसके ऊपर रखा था, जिससे एक प्राकृतिक पुल का निर्माण हुआ था.

पर्यटकों के लिए खास आकर्षण

जो सैलानी इस ऊंचाई वाले इलाके की सैर करने पहुंचते हैं, वे हिमालय की भव्य चोटियों के दीदार करने के साथ-साथ यहां की स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक जीवन शैली से भी रूबरू होते हैं। इसके नजदीक ही कई सारे धार्मिक और प्राकृतिक स्थल मौजूद हैं जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। चूंकि यह पवित्र धाम बद्रीनाथ के बेहद करीब स्थित है, इसलिए वहां आने वाले तमाम श्रद्धालु इस ऐतिहासिक और खूबसूरत गांव की यात्रा करना कभी नहीं भूलते हैं।

सवाल-जवाब

माणा गांव कहां स्थित है?
माणा गांव उत्तराखंड के चमोली जिले में भारत-तिब्बत सीमा के पास स्थित है।
इस गांव को पहले किस नाम से जाना जाता था?
यह गांव लंबे समय तक देश के आखिरी गांव के रूप में जाना जाता था।
इसे भारत का पहला गांव कब घोषित किया गया?
इसे साल 2022 में आधिकारिक तौर पर भारत का पहला गांव घोषित किया गया था।
भीम पुल का निर्माण किसने और क्यों किया था?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भीम ने सरस्वती नदी को पार करने के लिए एक विशाल चट्टान का इस्तेमाल कर यह रास्ता बनाया था।
यह गांव किस प्रसिद्ध धाम के पास है?
माणा गांव पवित्र तीर्थस्थल बद्रीनाथ धाम के बेहद करीब स्थित है।
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